कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी आंतरिक कलह के बीच एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। कुछ समय पहले तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपने और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनने की दो टूक चेतावनी (अल्टीमेटम) देने वाले वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के सुर अब पूरी तरह से बदले हुए नजर आ रहे हैं। अपने तीखे तेवरों को पीछे छोड़ते हुए कल्याण बनर्जी ने एक बेहद नरम और भावनात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने अपने ताजा बयान में अभिषेक बनर्जी को लेकर कड़वाहट खत्म करने के संकेत दिए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
अभिषेक बनर्जी मेरे पुत्र के समान, गलतियों को भूलना मेरा दायित्व
अपने बदले हुए रुख को स्पष्ट करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी उनके लिए एक बेटे की तरह हैं और पारिवारिक तथा राजनीतिक रिश्तों की मर्यादा के तहत वे उनके प्रति कोई द्वेष नहीं रखते। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक पिता होने के नाते यह उनका परम कर्तव्य और दायित्व बनता है कि वह अपने बच्चे की तमाम छोटी-बड़ी भूलों और गलतियों को दिल से माफ कर दे। इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर शीर्ष स्तर पर जारी शह और मात के खेल को शांत करने तथा आपसी मतभेदों को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
देश में चरमरा रही है लोकतांत्रिक व्यवस्था और विपक्ष का संकट
पार्टी के अंदरूनी मामलों पर बात करने के साथ ही वरिष्ठ नेता ने देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समय पूरे मुल्क में लोकतांत्रिक मूल्य और व्यवस्थाएं बेहद नाजुक दौर से गुजर रही हैं और लोकतंत्र पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। कल्याण बनर्जी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी ऐसे हालात पैदा नहीं हुए थे, जहां विपक्षी पार्टियों का इस कदर पूरी तरह से नामोनिशान मिटा दिया गया हो या उनका सफाया हो गया हो।
प्रतिशोध की राजनीति पर प्रहार और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा
कल्याण बनर्जी ने मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सत्ता पूरी तरह से राजनीतिक बदले और प्रतिशोध की भावना से ग्रसित होकर काम कर रही है। उन्होंने सचेत किया कि विरोधियों को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की यह प्रवृत्ति किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा है। नेता ने जोर देकर कहा कि यदि समय रहते संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति आने वाले समय में आम जनता और व्यवस्था दोनों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होगी।









