छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी पर CM चेहरे को लेकर बोले दीपक बैज, कही ये बात

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अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनावों में लगभग दो वर्ष का समय शेष है, परंतु प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज के एक ताजा बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। सरगुजा संभाग में आयोजित कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्षों व ट्रेनरों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर बैज ने दावा किया कि वर्ष 2028 में प्रदेश में पुनः कांग्रेस की सरकार बनेगी।

मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी में कई योग्य चेहरे मौजूद

प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस संगठन के भीतर मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए कई वरिष्ठ व सक्षम नेता मौजूद हैं। उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी नेता मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंततः मुख्यमंत्री के चेहरे का चयन पार्टी हाईकमान द्वारा ही तय किया जाता है।

भाजपा संगठन में असंतोष, जल्द गिरेंगे विकेट

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए बैज ने कहा कि प्रदेशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भारी असंतोष का माहौल है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस अभी केवल अपनी फील्डिंग जमा रही है और बिना बल्लेबाजी शुरू किए ही विपक्षी दल के विकेट गिरना प्रारंभ हो गए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर केंद्र सरकार पर साधा निशाना

दीपक बैज ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों को लेकर मैदान में है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से जूझ रही है। देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम नागरिक परेशान हैं।

बैज के बयान पर टीएस सिंहदेव की प्रतिक्रिया

पीसीसी प्रमुख के बयान के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि बैज ने चार नाम तो गिना दिए, लेकिन वे स्वयं भी प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते इस पद के स्वाभाविक दावेदार हैं। इसके साथ ही सिंहदेव ने स्वीकार किया कि पिछले कार्यकाल में 'ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री' की निरंतर चली चर्चाओं से पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था, जो अंततः चुनाव में हार का एक मुख्य कारण बना।