जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में सरकारी खाद्यान्न वितरण प्रणाली और भंडारण व्यवस्था में एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। यहाँ के शासकीय अनाजों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए अधिकृत 'अन्नपूर्णा' और 'मां नर्मदा वेयरहाउस' के गोदामों में जब प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) किया, तो स्टॉक रजिस्टर के मुकाबले वास्तविक अनाज में करीब 1000 टन गेहूं कम पाया गया। इस गंभीर गड़बड़ी और हेराफेरी को छुपाने के लिए वेयरहाउस संचालकों ने अन्य सहायक गोदामों के रिकॉर्ड्स में बड़े पैमाने पर हेरफेर करते हुए केवल कागजी आंकड़ों का खेल खेला। प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस पूरे महाघोटाले को अत्यंत संज्ञान में लेते हुए इसे बेहद गंभीर माना है और उच्च स्तरीय जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं। राजधानी भोपाल से खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष तकनीकी टीम जांच के लिए जबलपुर पहुंच रही है, जो फिजिकल स्टॉक रजिस्टर, अनाज परिवहन चालान और विभागीय ऑनलाइन पोर्टल के डेटा का बारीकी से मिलान करेगी। इस जांच के घेरे में आए दोषी वेयरहाउस मालिकों के साथ-साथ इस भ्रष्टाचार में मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने की पूरी विधिक तैयारी कर ली गई है।
प्रारंभिक पड़ताल में खुली पोल, पुराने घोटालों की फाइलें भी दोबारा खोलने की तैयारी
जांच से जुड़े भीतरी सूत्रों से प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार, गोदामों में अनाज की इस भारी कमी को दूर करने या उसकी वास्तविक जांच करने के स्थान पर, जिला स्तर पर बैठे कुछ रसूखदार अधिकारियों ने केवल कागजी आंकड़ों को 'मैनेज' (संतुलित) करने का कुत्सित प्रयास किया था। जिला स्तर पर गठित उपार्जन समिति से जुड़े कुछ चिन्हित अधिकारियों की कार्यप्रणाली और संदिग्ध भूमिका पर अब जांच की सुई टिक गई है। उच्च प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए केवल वर्तमान मामले की ही नहीं, बल्कि जबलपुर संभाग के पूर्व में ठंडे बस्ते में डाल दिए गए सभी पुराने और लंबित मामलों की फाइलें भी दोबारा खोली जाएंगी, ताकि पूरे सिस्टम की व्यापक सफाई की जा सके। जिला प्रशासन के लिए यह पूरा मामला इसलिए भी नाक का विषय बन गया है क्योंकि इससे पहले भी क्षेत्र के 'श्रीजी वेयरहाउस' से करीब 1400 टन धान रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया था, लेकिन उस समय रसूखदारों के दबाव के चलते कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी थी। अब भोपाल से आने वाली विशेष विजिलेंस टीम का मुख्य एजेंडा यही पता लगाना है कि गायब हुआ यह सरकारी अनाज किस काले बाजार में बेचा गया और इस संगठित गिरोह में कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
सरकारी तंत्र पर उठा बड़ा सवाल, सख्त दंडात्मक कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार
जबलपुर संभाग के सरकारी गोदामों से बार-बार इतनी भारी मात्रा में कीमती अनाजों के गायब होने की इन श्रृंखलाबद्ध घटनाओं ने सरकार के आंतरिक निगरानी और ऑडिट तंत्र की कार्यकुशलता पर बहुत बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक तरफ जहां सरकार वेयरहाउसिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण और पूर्ण पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सामने आए इस नए घोटाले ने आम जनता और किसानों का सरकारी मशीनरी पर से भरोसा पूरी तरह डिगा दिया है। इन विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए अब स्थानीय प्रशासन हर छोटे-बड़े डिजिटल और मैनुअल रिकॉर्ड को बहुत ही बारीकी से खंगालने की एक नई रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि सफेदपोश अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसा जा सके। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि इस जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष और बाहरी दबाव से मुक्त रखा जाए तथा संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। वर्तमान में, समूचे राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की निगाहें भोपाल के उस जांच दल की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे संगठित भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का कच्चा-चिट्ठा सार्वजनिक करेगी।









