उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण से मचा हड़कंप, जानें क्यों बढ़ रहा क्षेत्रीय तनाव

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सियोल। उत्तर कोरिया ने बुधवार को एक बार फिर अपने पूर्वी तट से जापान सागर की दिशा में संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। जापान के रक्षा मंत्रालय ने इस लॉन्च की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल समुद्र में जा गिरी। खास बात यह है कि कुछ ही दिनों के भीतर उत्तर कोरिया की ओर से इस तरह का यह दूसरा परीक्षण सामने आया है।

दक्षिण कोरियाई सेना ने भी दी लॉन्च की जानकारी

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, दक्षिण कोरियाई सेना ने भी उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से एक अज्ञात प्रक्षेप्य दागे जाने की जानकारी दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले से तनाव का माहौल बना हुआ है।

अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से पहले लॉन्च

उत्तर कोरिया का यह नया प्रक्षेपण अमेरिका और दक्षिण कोरिया द्वारा अगले सप्ताह शुरू होने वाले वार्षिक बड़े सैन्य अभ्यास की घोषणा के दो दिन बाद हुआ है। दोनों देशों के मुताबिक, इस अभ्यास का मकसद उत्तर कोरिया से संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों को मजबूत करना है।

'उल्ची फ्रीडम शील्ड' पर उत्तर कोरिया की नजर

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास को 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' नाम दिया गया है। उत्तर कोरिया लंबे समय से ऐसे अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का आरोप है कि ये सैन्य ड्रिल उसके खिलाफ संभावित कार्रवाई की तैयारी का हिस्सा हैं। ऐसे में इस नए मिसाइल परीक्षण को आगामी सैन्य अभ्यास के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

अभ्यासों के दौरान हथियारों का परीक्षण करता रहा है प्योंगयांग

उत्तर कोरिया पहले भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बड़े सैन्य अभ्यासों के आसपास मिसाइल और अन्य हथियारों का परीक्षण करता रहा है। ऐसे परीक्षणों के साथ प्योंगयांग की ओर से कड़े बयान भी सामने आते रहे हैं। हालांकि, बुधवार के ताजा प्रक्षेपण को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर वहां किसी हथियार परीक्षण की आधिकारिक जानकारी अगले दिन सामने आती है।

पिछले सप्ताह भी हुआ था मिसाइल परीक्षण

इससे पहले पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने उत्तर कोरिया की ओर से दागी गई एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाया था। यह जून के अंत के बाद उत्तर कोरिया की पहली बैलिस्टिक हथियार परीक्षण गतिविधि बताई गई थी। ताजा प्रक्षेपण के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताएं बढ़ गई हैं।