होर्मुज बंद होने से दुनिया चिंतित, खाड़ी देश इस रूट का खोज रहे विकल्प

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दुबई। पिछले दिनों ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के बाद होर्मुज खुला था, लेकिन हालिया तनाव के चलते ये फिर बंद कर दिया गया है। इस समुद्री रूट से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले हुए हैं, जिससे यातायात बहुत कम हो गया है। इसने दुनिया के बड़े हिस्से की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर से खाड़ी देशों में अपने तेल और गैस के एक्सपोर्ट की चिंता है। ऐसे में तेल-गैस से संपन्न खाड़ी देश इस रूट के विकल्प खोज रहे हैं। वे नई पाइपलाइनों और एक नए बंदरगाह के जरिए भविष्य में किसी भी रुकावट से निपटने की तैयारी कर रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का कहना है कि ईरान कुछ महीनों तक होर्मुज का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। उनका तर्क है कि युद्ध ने दुनिया को हालात के हिसाब से ढलने और ऊर्जा के लिए सिर्फ एक संकरे रास्ते पर अपनी भारी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर किया है। हालांकि लंबे समय में ये विकल्प कितने कारगर होंगे, इस पर राय बंटी हुई है। ईरान पर हमले 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस का व्यापार होर्मुज से होता था। इससे बाकी दुनिया को रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल मिलता था। एक्सपर्ट का दावा है कि लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद ग्लोबल ऑयल मार्केट में घबराहट कम है, जिसकी वजह आपातकालीन योजनाएं हैं।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन 1980 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थी। यह सऊदी अरब में 1,200 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के जरिए कच्चा तेल ले जाती है और पूर्व में अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग सुविधा को पश्चिम में यानबू के रेड सी पोर्ट से जोड़ती है। वहां से सऊदी तेल टैंकरों में भरा जाता है और रेड सी से होते हुए स्वेज नहर के जरिए यूरोप या बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गल्फ ऑफ एडेन तक ले जाया जाता है।
इस पाइपलाइन की क्षमता रोजाना 70 लाख बैरल तेल प्रोसेस करने की है। सऊदी अरब अब इसकी क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
यूएई क्रूड ऑयल पाइपलाइन पर काम कर रहा है। यह अबू धाबी के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में मौजूद तेल क्षेत्रों से हर दिन 1.8 मिलियन बैरल तक तेल उस अमीराती टर्मिनल तक ले जा सकती है। यह जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में है, जो चोक पॉइंट से बचकर निकलता है। यूएई होर्मुज पर अपनी निर्भरता को और कम करने के लिए एक नया बंदरगाह बनाने की भी कोशिश कर रहा है। दुबई की एक सप्लाई चेन कंपनी फुजैराह के तटीय इलाके में एक नया बंदरगाह और कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए बातचीत कर रही है, जहां मौजूदा हबशान-फुजैराह पाइपलाइन खत्म होती है।
इराक में भी बसरा-हदीथा पाइपलाइन को 2024 में मंजूरी मिली है। यह एक बहुत बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत इराक के दक्षिणी शहर बसरा के आस-पास के तेल क्षेत्रों को जॉर्डन के लाल सागर वाले बंदरगाह शहर अकाबा से जोड़ा जाएगा और सीरिया व तुर्की से गुज़रने वाले प्रोजेक्ट्स से भी जोड़ा जाएगा। कुछ एनालिस्ट वैकल्पिक रास्तों से होर्मुज पर दुनिया की निर्भरता को कम होने की बात कह रहे हैं लेकिन कई इसे नकार रहे हैं।  वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के एनर्जी पॉलिसी एनालिस्ट का कहना है कि लोग जल्दबाजी में बहुत आगे की सोच रहे हैं। इनमें से कुछ पाइपलाइन प्रस्ताव मुख्य रूप से भूमध्य सागर के तट तक तेल पहुंचाने के लिए हैं। यह वह जगह नहीं है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। एक्सपर्ट ने इसको लेकर भी आगाह किया है कि ईरान एक और अहम समुद्री रास्ते बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यह यमन और अफ्रीका के बीच एक संकरा रास्ता है जो लाल सागर और एशिया के बीच आने-जाने का जरिया है। दुनिया का लगभग 5 प्रतिशत तेल उत्पादन इस जलडमरूमध्य से गुजरता है।
कुछ साल पहले बाब अल-मंडेब क्षमता दोगुनी थी। 2023 में इजराइल-हमास युद्ध की शुरुआत में यमन में हूती लड़ाकों ने कमर्शियल जहाजों पर बार-बार हमले किए। यमन में हूती शिपमेंट में रुकावट डाल रहे हैं। इसलिए सऊदी पाइपलाइन एक आंशिक समाधान तो है, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद समाधान नहीं है। यूएई की नई योजनाएं भी बहुत भरोसेमंद समाधान नहीं हैं। फुजैराह बंदरगाह पर ईरान पहले ही हमला कर चुका है। इसलिए फुजैराह तक एक और पाइपलाइन बनाना समस्या का समाधान कर दे, ये जरूरी नहीं है।