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बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीत साई पल्लवी ने जाहिर की अपनी खुशी

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रविवार यानी 9 अक्‍टूबर की शाम बेंगलुरु में 67वें पारले फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ 2022  का आयोजन हुआ था। इस दौरान तेलुगू, तमिल, कन्नड़ और मलयालम इंडस्‍ट्री के सभी सितारों ने शिरकत की थी। हर इंडस्ट्री में अपने नाम कई अवॉर्ड भी किए। तेलुगू में फिल्म इंडस्ट्री में अल्लू अर्जुन ने अपने नाम बेस्ट एक्टर का खिताब हासिल किया तो वहीं, एक्ट्रेस सई पल्लवी तेलुगू की बेस्ट एक्ट्रेस बनीं। वहीं अब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी इस खुशी को फैंस के साथ शेयर किया है।

साई पल्लवी ने दो पुरस्कार जीते-फिल्म लव स्टोरी और श्याम सिंघा रॉय के लिए उन्हें इस अवॉड से नवाजा गया। वहीं अब साई पल्लवी ने अपने इंस्टाग्राम पर अवॉर्ड के साथ तस्वीर पोस्ट की है और कैप्शन में लिखा-"ऐसे दिन अक्सर नहीं होते! एक ही साल की दोनों फिल्में, ये है बेहद खास! मैं इन किरदारों के लिए मिले आपसे प्यार के लिए आभारी हूं और प्रार्थना करता हूं कि मुझे ऐसी और भी खूबसूरत भूमिकाएं निभाने के लिए मिले।

96 साल की उम्र में एंजेला लैंसबरी का निधन

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'मर्डर, शी रोट' में अपने किरदार राइटर-जासूस बनकर घर-घर में लोकप्रिय हुईं एंजेला लैंसबरी का 11 अक्टूबर 2022 यानी कि मंगलवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। इस बात की घोषणा खुद उनके परिवार द्वारा की गई।

यूएस मीडिया में छपी खबर के मुताबिक उनके बेटे डेम एंजेला लैंसबरी ने एक स्टेटमेंट में ये अपनी मां एंजेला के निधन की दुखद खबर उनके फैंस को दी और बताया कि एक्ट्रेस का निधन उस दौरान हुआ जब वह अपने घर लॉस एंजेलिस में आराम से सो रही थीं। ब्रिटिश में जन्मी एंजेला पिछले 60 साल से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का हिस्सा थीं और उन्होंने टेलीविजन पर अलग-अलग किरदार निभाए।

96 साल की एंजेला को सिर्फ टेलीविजन ने ही पहचान नहीं दिलाई, बल्कि उन्हें स्टेज एक्ट्रेस के रुप में भी एक बड़ी सफलता हासिल हुई। एक्ट्रेस टीवी और स्टेज पर शानदार परफॉर्मेंस के लिए पांच बार टोनी अवॉर्ड भी जीत चुकी है। परिवार द्वारा दिए गए बयान में ये भी बताया गया कि एक्ट्रेस के तीन बच्चों एंथनी, डिएड्रे और डेविड के अलावा उनके तीन पोते पीटर, कैथरीन और इयान हैं। इसके अलावा एंजेला के तीन परपोते और निर्माता एडगर लैंसबरी उनके भाई हैं। एंजेला को उनके शानदार अभिनय के लिए सिर्फ टोनी पुरस्कार से ही नहीं, बल्कि साल 2009 में उन्हें 'ब्लिथ स्पिरिट' में उनकी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में सम्मानित किया गया था।

BIGG BOSS 16: शालीन ने डॉक्टर से की बदतमीजी

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बिग बॉस हाउस में इस बार कुछ कंटेस्टेंट ऐसे हैं जिन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है कि बाहर उनकी छवि कैसी बन रही है। वो ना जाने किस गुरूर में बिग बॉस हाउस के भीतर रह रहे हैं। कंटेस्टेंट शालीन भनोट के साथ भी कुछ ऐसा ही है। शालीन जब से बिग बॉस हाउस में आए हैं तबसे उनके झगड़े और विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे। हाल ही में शालीन फिर एक बार एक सम्मानित व्यक्ति से बदतमीजी करते दिखे।

शालीन की सेहत को ध्यान में रखते हुए बिग बॉस ने घर के भीतर एक डॉक्टर भेजा। शालीन बातचीत के दौरान डॉक्टर से ही बदतमीजी करने लगे। शालीन बिग बॉस हाउस में इस डॉक्टर को यह समझाने लगे कि उन्हें बिग बॉस की टीम से क्या कहना है। शालीन ने बताया कि वह टीम को बताएं कि उन्हें किस तरह की डायट की जरूरत है।

'तुम मेरा इलाज करने लायक नहीं हो'
इसके कुछ ही देर बाद शालीन भनोट अपना स्टैंडर्ड और भी ज्यादा डाउन करते दिखाई पड़े। उन्होंने डॉक्टर की क्वालिफिकेशन और डिग्री को लेकर सवाल कर डाला। शालीन ने डॉक्टर से कहा कि तुम मेरा इलाज करने लायक नहीं हो। तुमने कौन सी डिग्री ली है? क्या पढ़ा है, MBBS पढ़ा है? जाकर उनकी टीम को बताओ कि तुम मुझे हैंडल करने लायक नहीं हो।

 

आईएमएफ द्वारा विकास अनुमान में कटौती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है

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संयुक्त राष्ट्र| अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भले ही इस वित्तीय वर्ष के लिए भारत के विकास अनुमान को घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया है, लेकिन यह दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी हुई है, जो भारी मंदी का सामना कर रही है।

मंगलवार को वाशिंगटन में जारी आईएमएफ की वल्र्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट ने जुलाई में किए गए 7.2 प्रतिशत के अनुमान से भारत की विकास दर में 0.6 प्रतिशत की कटौती की, लेकिन अगले वर्ष के लिए धीमी विकास दर को 6.1 प्रतिशत पर रखा, जो अभी भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए उच्चतम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डाउनग्रेड दूसरी तिमाही में उम्मीद से कमजोर और बाहरी मांग में कमी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल कोविड के झटके से भारत की विकास दर 8.7 प्रतिशत थी। इस साल भारत के लिए आईएमएफ विकास अनुमान पिछले सप्ताह जारी विश्व बैंक के 6.5 प्रतिशत से थोड़ा अधिक था। आईएमएफ ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल केवल 3.2 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और अगले साल मुद्रास्फीति, यूक्रेन युद्ध के नतीजे और कोविड महामारी के प्रभाव से प्रभावित होकर 2.7 प्रतिशत तक धीमी हो जाएगी।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि वैश्विक मुद्रास्फीति 8.8 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है और कहा कि मौद्रिक नीति मुद्रास्फीति को कम करने के लिए सही रुख का गलत अनुमान लगा सकती है और असामान्य रूप से बड़ी और नकारात्मक पक्ष पेश करती है। अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में, इस वर्ष अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.6 प्रतिशत, चीन में 3.2 प्रतिशत, जर्मनी में 1.5 प्रतिशत, यूरो क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और यूके में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया था।

अगले साल, रिपोर्ट ने वैश्विक विकास को 2.7 प्रतिशत तक धीमा करने का अनुमान लगाया, और एक धूमिल पूवार्नुमान पेश करते हुए कहा कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के केवल 1.1 प्रतिशत और अमेरिका के 1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है जबकि जर्मनी 0.3 प्रतिशत तक अनुबंधित होगा। चीन की अर्थव्यवस्था के अगले साल 4.4 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।

दक्षिण एशिया में, बांग्लादेश में इस वर्ष के लिए भारत की तुलना में 7.2 प्रतिशत की उच्च वृद्धि का अनुमान था, लेकिन केवल 416 बिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के साथ, यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ रैंक नहीं करता है, जबकि 3.17 ट्रिलियन की जीडीपी के साथ भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है। बांग्लादेश की विकास दर अगले साल 6 फीसदी रहने का अनुमान है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस साल 6 फीसदी और अगले साल 4.4 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, नेपाल इस साल 4.2 प्रतिशत और अगले साल 5 प्रतिशत, इस वर्ष भूटान में 4.9 प्रतिशत और अगले वर्ष 4.3 प्रतिशत और मालदीव में इस वर्ष 4.3 प्रतिशत और अगले वर्ष 4.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में 8.7 प्रतिशत और अगले वर्ष 3 प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान था।

उज्जैन में महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर का क्या है प्राचीन और पौराणिक इतिहास?

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आदि-अनंत भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में मंगलवार शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नवनिर्मित भव्य 'श्री महाकाल लोक' कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे।
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल ज्योतिर्लिंग को सबसे प्रमुख माना जाता है। राजा विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में यह शिवलिंग उनके काल से पूर्व से ही विराजमान है। आओ जानते हैं मंदिर का प्राचीन और पौराणिक इहिहास।

विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। यहां पर ज्योतिर्लिंग के साथ दो शक्तिपीठ हरसिद्धि और गढ़कालिका है और 84 महादेव के साथ ही यहां पर देश का एक मात्र अष्ट चिरंजीवियों का मंदिर है। यह मंगलदेव की उत्पत्ति का स्थान भी है और यहां पर नौ नारायण और सात सागर है। यहां के शमशान को तीर्थ माना जाता है जिसे चक्रतीर्थ कहते हैं। यहां पर माता पार्वती द्वारा लगाया गया सिद्धवट है। श्रीराम और हनुमान ने उज्जैन की यात्रा की थी। यहां के कुंभ पर्व को सिंहस्थ कहते हैं। राजा विक्रमादित्य ने ही यहीं से विक्रमादित्य के कैलेंडर का प्रारंभ किया था और उन्होंने ही इस देश को सर्वप्रथम बार सोने की चिढ़िया कहकर यहां से सोने के सिक्के का प्रचलन किया था। महाभारत की एक कथानुसार उज्जैन स्वर्ग है।

कहते हैं कि 'आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम्। भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते।।'

अर्थात- आकाश में तारक शिवलिंग, पाताल में हाटकेश्वर शिवलिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है।

महाकाल के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना भी जरूरी है। कुछ लोगों के अनुसार जब मुगलकाल में इस शिवलिंग को खंडित करने की आशंका बढ़ी तो पुजारियों ने इसे छुपा दिया था और इसकी जगह दूसरा शिवलिंग रखकर उसकी पूजा करने लगे थे। बाद में उन्होंने उस शिवलिंग को वहीं महाकाल के प्रांगण में अन्य जगह स्थापित कर दिया जिसे आज 'जूना महाकाल' कहा जाता है। हालांकि कुछ लोगों के अनुसार असली शिवलिंग को क्षरण से बचाने के लिए ऐसा किया गया।

यहां पर विक्रमादित्य के बाद किसी भी राजा को राज करने के अधिकार तभी प्राप्त होता है जबकि वह राजा विक्रमादित्य की तरह पराक्रमी और न्यायप्रिय हो। कुछ लोग मानते हैं कि यही कारण था कि राजा भोज को अपनी राजधानी धार और भोपाल में बनाना पड़ी थी। कहते हैं कि अवंतिका अर्थात उज्जैन के एक ही राजा है और वह है महाकाल बाबा। कोई भी राजा यहां रात नहीं रुक सकता। उनके रुकने के लिए उज्जैन से बाहर एक अलग स्थान नियुक्त है। किवदंति है कि जो भी राजा यहां रात रुकता है और यदि वह सत्यवादी नहीं है तो उसके जीवन में संकट प्रारंभ हो जाते हैं।

 
महाकाल ज्योर्लिंग मंदिर का इतिहास | History of Mahakal Temple:

पौराणिक कथा के अनुसार इस शिवलिंग की स्थापना राजा चन्द्रसेन और गोप बालक रूप की कथा से जुड़ी है। कथा से हनुमानजी का संबंध भी जुड़ा हुआ है। कथानुसार राजा चंद्रसेन भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा, साथ ही दूरस्थ देशों में उसकी यश-कीर्ति बढ़ने लगी। उस 'मणि' को प्राप्त करने के लिए दूसरे राजाओं ने प्रयास आरंभ कर दिए। कुछ ने प्रत्यक्षतः मांग की, कुछ ने विनती की।

चूंकि वह राजा की अत्यंत प्रिय वस्तु थी, अतः राजा ने वह मणि किसी को नहीं दी। अंततः उन पर मणि आकांक्षी राजाओं ने आक्रमण कर दिया। शिवभक्त चंद्रसेन भगवान महाकाल की शरण में जाकर ध्यानमग्न हो गया। जब चंद्रसेन समाधिस्थ था तब वहां कोई गोपी अपने छोटे बालक को साथ लेकर दर्शन हेतु आई। बालक की उम्र थी पांच वर्ष और गोपी विधवा थी। राजा चंद्रसेन को ध्यानमग्न देखकर बालक भी शिव की पूजा हेतु प्रेरित हुआ। वह कहीं से एक पाषाण ले आया और अपने घर के एकांत स्थल में बैठकर भक्तिभाव से शिवलिंग की पूजा करने लगा। कुछ देर पश्चात उसकी माता ने भोजन के लिए उसे बुलाया किन्तु वह नहीं आया। फिर बुलाया, वह फिर नहीं आया। माता स्वयं बुलाने आई तो उसने देखा बालक ध्यानमग्न बैठा है और उसकी आवाज सुन नहीं रहा है।

तब क्रुद्ध हो माता ने उस बालक को पीटना शुरू कर दिया और समस्त पूजन-सामग्री उठाकर फेंक दी। ध्यान से मुक्त होकर बालक चेतना में आया तो उसे अपनी पूजा को नष्ट देखकर बहुत दुःख हुआ। अचानक उसकी व्यथा की गहराई से चमत्कार हुआ। भगवान शिव की कृपा से वहाँ एक सुंदर मंदिर निर्मित हो गया। मंदिर के मध्य में दिव्य शिवलिंग विराजमान था एवं बालक द्वारा सज्जित पूजा यथावत थी। उसकी माता की तंद्रा भंग हुई तो वह भी आश्चर्यचकित हो गई।

राजा चंद्रसेन को जब शिवजी की अनन्य कृपा से घटित इस घटना की जानकारी मिली तो वह भी उस शिवभक्त बालक से मिलने पहुँचा। अन्य राजा जो मणि हेतु युद्ध पर उतारू थे, वे भी पहुंचे। सभी ने राजा चंद्रसेन से अपने अपराध की क्षमा माँगी और सब मिलकर भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन करने लगे। तभी वहाँ रामभक्त श्री हनुमानजी अवतरित हुए और उन्होंने गोप-बालक को गोद में बैठाकर सभी राजाओं और उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया।

ऋते शिवं नान्यतमा गतिरस्ति शरीरिणाम्‌॥

एवं गोप सुतो दिष्टया शिवपूजां विलोक्य च॥

अमन्त्रेणापि सम्पूज्य शिवं शिवम्‌ वाप्तवान्‌।

एष भक्तवरः शम्भोर्गोपानां कीर्तिवर्द्धनः

इह भुक्तवा खिलान्‌ भोगानन्ते मोक्षमवाप्स्यति॥

अस्य वंशेऽष्टमभावी नंदो नाम महायशाः।

प्राप्स्यते तस्यस पुत्रत्वं कृष्णो नारायणः स्वयम्‌॥

अर्थात 'शिव के अतिरिक्त प्राणियों की कोई गति नहीं है। इस गोप बालक ने अन्यत्र शिव पूजा को मात्र देखकर ही, बिना किसी मंत्र अथवा विधि-विधान के शिव आराधना कर शिवत्व-सर्वविध, मंगल को प्राप्त किया है। यह शिव का परम श्रेष्ठ भक्त समस्त गोपजनों की कीर्ति बढ़ाने वाला है। इस लोक में यह अखिल अनंत सुखों को प्राप्त करेगा व मृत्योपरांत मोक्ष को प्राप्त होगा।

इसी के वंश का आठवाँ पुरुष महायशस्वी 'नंद' होगा जिसके पुत्र के रूप में स्वयं नारायण 'कृष्ण' नाम से प्रतिष्ठित होंगे। कहा जाता है भगवान महाकाल तब ही से उज्जयिनी में स्वयं विराजमान है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में महाकाल की असीम महिमा का वर्णन मिलता है। महाकाल साक्षात राजाधिराज देवता माने गए हैं।
 

करवा चौथ पर इस मुहूर्त में सुनें कथा, मिलेगा सौभाग्य का वरदान

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करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और रात को चंद्र दर्शन के बाद ही कुछ खाती हैं.

इस व्रत में महिलाएं सामूहिक रूप से दोपहर के समय करवा चौथ की कथा सुनती हैं. यदि ये कथा किसी अबूझ मुहूर्त में सुनी जाए तो बहुत अच्छा होगा. आइए आपको बताते हैं कि इस साल करवा चौथ की कथा सुनने के लिए कौन सा शुभ मुहूर्त बन रहा है.

करवा चौथ 2022 तिथि
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. इस साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी 13 अक्टूबर को रात 01 बजकर 59 मिनट से लेकर 14 अक्टूबर सुबह 03 बजकर 08 मिनट तक रहने वाली है. उदिया तिथि के चलते करवा चौथ का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा.

कथा सुनने का मुहूर्त
करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं दोपहर के समय एकसाथ बैठकर कथा सुनती हैं. इस दौरान महिलाओं की थाली में पूजा की कुछ विशेष सामग्री रहती है. इसमें हल्दी, कलावा, अक्षत, सिंघाड़ा, केला, मिठाई या बताशा जैसी चीजें शामिल रहती हैं. अगर करवा चौथ की कथा आप शुभ मुहूर्त में ही सुनें तो ज्यादा बेहतर होगा. इस दिन दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है. आप इस शुभ अवधि में करवा चौथ की कथा सुन सकती हैं.

कब निकलेगा चांद और कैसे करें दर्शन?
करवा चौथ की रात सुहागिन महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद ही उपवास खोलती हैं, इसलिए महिलाओं को चंद्रोदय का बेसब्री से इंतजार रहता है. इस बार करवा चौथ पर चांद निकलने का समय रात 08 बजकर 09 मिनट बताया जा रहा है. हालांकि, आप अपने शहर के हिसाब से चांद निकलने का एग्जैक्ट टाइम जरूर चेक कर लें. चांद दिखने के बाद एक थाली में दीपक, सिन्दूर, अक्षत, कुकुम, रोली और सफेद मिठाई रखें. एक करवे में जल भरकर पहले मां गौरी और भगवान गणेश की पूजा करें. फिर चांद को छन्नी से देखें और अर्घ्य दें. इसके बाद चंद्र देव से हाथ जोड़कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करें.
 

छोटी, बड़ी दिवाली 24 अक्टूबर को एक साथ, गोवर्धन पूजा और भाई दूज 26 को

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द्रिक पंचांग के अनुसार इस बार धनतेरस 22 अक्टूबर को है जबकि छोटी और बड़ी दिवाली एक ही दिन 24 अक्टूबर को है वहीं गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन नहीं एक दिन बात 26 अक्टूबर को है.

साथ ही इसी दिन भाई दूज भी है. बता दें कि इस बार दिवाली के दिन सूर्य ग्रहण का भी साया पड़ रहा है. जिसका सूतक काल दिवाली की ही रात से शुरू हो जा रहा है. साल 2022 का अंतिम सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगने जा रहा है. हालांकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और भारत में कहीं-कहीं सीमित समय के लिए नजर आयेगा. द्रिक पंचांग के अनुसार जानें धनतेरस (dhanteras 2022), छोटी दिवाली (choti diwali 2022 date), बड़ी दिवाली (badi diwali 2022) और गोवर्धन पूजा (govardhan puja 2022), भाई दूज (bhai dooj date) की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है.

कब है धनतेरस?

धनतेरस, शनिवार, 22 अक्टूबर,

धनतेरस पूजा मुहूर्त – 07:01 शाम से 08:17 शाम तक

कुल अवधि – 01 घंटे 16 मिनट

यम दीप दान, शनिवार, 22 अक्टूबर, 2022

धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मीऔर कुबेर की पूजा

धनत्रयोदशी जिसे धनतेरस के नाम से भी जाना जाता है, पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली उत्सव का पहला दिन है. धनत्रयोदशी के दिन दूधिया सागर के मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी समुद्र से निकली थीं. इसलिए, त्रयोदशी के शुभ दिन, देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर की पूजा की जाती है. हालांकि, धनत्रयोदशी के दो दिनों के बाद अमावस्या को लक्ष्मी पूजा अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है. धनतेरस या धनत्रयोदशी पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल के दौरान की जानी चाहिए जो सूर्यास्त के बाद शुरू होती है और लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक चलती है.

कब है छोटी दिवाली, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा, सोमवार, 24 अक्टूबर, 2022

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – 06:53 शाम से 08:16 रात तक

कुल अवधि- 01 घंटे 23 मिनट

कब है गोवर्धन पूजा?

गोवर्धन पूजा, बुधवार, 26 अक्टूबर, 2022

गोवर्धन पूजा प्रात:काल मुहूर्त – 06:29 सुबह से 08:43 सुबह तक

कुल अवधि – 02 घंटे 14 मिनट

इस दिन है गोवर्धन पूजा

इस बार गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर को है. अधिकांश समय गोवर्धन पूजा का दिन दिवाली पूजा के अगले दिन पड़ता है और इसे उस दिन के रूप में मनाया जाता है जब भगवान कृष्ण ने भगवान इंद्र को हराया था. कभी-कभी दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है. धार्मिक ग्रंथों में कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि के दौरान गोवर्धन पूजा मनाने का सुझाव दिया गया है. प्रतिपदा के शुरुआती समय के आधार पर, गोवर्धन पूजा का दिन हिंदू कैलेंडर पर अमावस्या के दिन एक दिन पहले पड़ सकता है. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है. महाराष्ट्र में इस दिन को बाली प्रतिपदा या बाली पड़वा के रूप में मनाया जाता है. वहीं ज्यादातर समय गोवर्धन पूजा का दिन गुजराती नव वर्ष के दिन होता है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है.

साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को, सूतक का सूय

आंशिक सूर्य ग्रहण ग्रहण प्रारंभ समय – 04:28 अपराह्न

अधिकतम ग्रहण समय – 05:30 अपराह्न

सूर्यास्त के साथ ग्रहण समाप्त होगा – 05:42 शाम

आंशिक ग्रहण की अवधि – 01 घंटा 13 मिनट 30 सेकंड

सूतक प्रारंभ – 03:17 सुबह, सूतक समाप्त – 05:42 अपराह्न

धनतेरस पूजा, शनिवार, 22 अक्टूबर, 2022

काली चौदस, रविवार, 23 अक्टूबर, 2022

लक्ष्मी पूजा, सोमवार, 24 अक्टूबर, 2022

नरक चतुर्दशी, सोमवार, 24 अक्टूबर, 2022

आंशिक सूर्य ग्रहण, 25 अक्टूबर, 2022

गोवर्धन पूजा, बुधवार, 26 अक्टूबर, 2022

भाई दुज, बुधवार, 26 अक्टूबर, 2022
 

अनंत शक्तियों का स्वामी हैं हमारा मन

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हमें यह बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि मन का परमात्मा के साथ घनिष्ठ संबंध है। मन और ब्रह्म दो भिन्न वस्तुएं नहीं हैं। ब्रह्म ही मन का आकार धारण करता है। अत: मन अनंत और अपार शक्तियों का स्वामी है। मन स्वयं पुरुष है एवं जगत का रचयिता है। मन के अंदर का संकल्प ही बाह्य जगत में नवीन आकार ग्रहण करता है। जो कल्पना चित्र अंदर पैदा होता है, वही बाहर स्थूल रूप में प्रकट होता है। सीधी-सी बात है कि हर विचार पहले मन में ही उत्पन्न होता है और मनुष्य अपने विचार के आधार पर ही अपना व्यवहार निश्चित करता है।  अगर मन में विचार ही न हों तो फिर क्रियान्वयन कहां से आएगा। शायद इसीलिए कहा गया है कि मन के जीते जीत है और मन के हारे हार। मन का स्वभाव संकल्प है। मन के संकल्प के अनुरूप ही जगत का निर्माण होता है। वह जैसा सोचता है, वैसा ही होता है। मन जगत का सुप्त बीज है। संकल्प द्वारा उसे जागृत किया जाता है।   
यही बीज, पहाड़, समुद्र, पृथ्वी और नदियों से मुक्त संसार रूपी वृक्ष उत्पन्न करता है। यही जगत का उत्पादक है। सत्, असत् एवं सदसत् आदि मन के संकल्प हैं। मन ही लघु को विभु और विभु को लघु में परिवर्तित करता रहता है। मन में सृजन की अपार संभावनाएं स्वयं द्वारा ही निर्मित की हुई हैं। मन स्वयं ही स्वतंत्रतापूर्वक शरीर की रचना करता है। देहभाव को धारण करके वह जगत् रूपी इंद्रजाल बुनता है। इस निर्माण प्रक्रिया में मन का महत्वपूर्ण योगदान है। मन का चिंतन ही उसका परिणाम है। यह जैसा सोचता है और प्रयत्न करता है, वैसा ही उसका फल मिलता है। मन के चिंतन पर ही संसार के सभी पदार्थों का स्वरूप निर्भर करता है। दृढ़ निश्चयी मन का संकल्प बड़ा बलवान होता है। वह जिन विचारों में स्थिर हो जाता है, परिस्थितियां वैसी ही विनिर्मित होने लगती हैं। जैसा हमारा विचार होता है, वैसा ही हमारा जगत् । 
 

शंकर के सानिध्य में सब कुछ अलौकिक और असाधारण -मोदी

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उज्जैन | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकाल लोक का लोकार्पण करने के बाद कार्तिक मेला ग्राउंड में अपने जन संबोधन में कहा कि, शंकर के सानिध्य में साधारण कुछ भी नहीं है, सब कुछ अलौकिक है, असाधारण है अविस्मरणीय है और अविश्वसनीय हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा, बाबा महाकाल एकमात्र ऐसी ज्योतिलिर्ंग है जो दक्षिण मुखी है। यह शिव के ऐसे रूप हैं जिनकी भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है, यहां की भस्म आरती के हर व्यक्ति दर्शन करना चाहता है। हमारे ज्योतिलिर्ंग का विकास भारत का आध्यात्मिक विकास है। भारत का अध्यात्मिक दर्शन एक बार फिर शिखर पर पहुंचकर विश्व के मार्गदर्शन के लिए तैयार हो रहा है।

हर बारह साल में होने वाले सिंहस्थ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हजारों साल से कुंभ की पुरानी परंपरा है, उसमें अमृत मंथन से जो संकल्प निकलता है, उससे 12 साल तक क्रियान्वित करने की परंपरा रही है। फिर 12 साल बाद कुंभ होता था, फिर एक बार अमृत मंथन होता था फिर संकल्प लिया जाता था। पिछली बार जब यहां कुंभ हुआ था तब मुझे आने का सौभाग्य मिला था। महाकाल का बुलावा आया और यह बेटा आए बिना कैसे रह सकता है। उस समय जो संकल्प बन गया था आज वह मूर्तरुप ले रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भारत के लिए धर्म का अर्थ है हमारे कर्तव्यों का सामूहिक संकल्प हमारे संकल्पों का ध्येय है विश्व का कल्याण।

प्रधानमंत्री ने कहा महाकाल के आशीर्वाद से भारत की भव्यता पूरे विश्व के विकास के लिए नई संभावनाओं को जन्म देती है, जहां इनोवेशन है वहां रिनोवेशन भी है। हमने गुलामी के कालखंड में जो कुछ खोया आज भारत उसे रिनोवेट कर रहा है। अपने गौरव की, अपने वैभव की पुनस्र्थापना कर रहा है। एस्ट्रोनॉमी से जुड़े शोध के शीर्ष केंद्र रहे हैं, आज नया भारत जब अपने प्राचीन मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है तो आस्था के साथ साथ विज्ञान और शोध की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जब तक हमारी आस्था के केंद्र जागृत ह,ैं भारत की चेतना जागृत है। भारत की आत्मा जागृत है। जहां महाकाल हैं वहां काल खंडों की सीमाएं नहीं है ।महाकाल की शरण में विष में भी स्पंदन है, महाकाल के सानिध्य में अवसान से भी पुनर्जीवन है, यही हमारी सभ्यता का वह आध्यात्मिक आत्मविश्वास है जिसके सामथ्र्य से भारत हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने उज्जैन की ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा ज्योतिषीय गणना में उज्जैन न केवल भारत का केंद्र रहा है बल्कि यह भारत की आत्मा का भी केंद्र रहा है उज्जैन की क्षण-क्षण में इतिहास समाया हुआ है, कण-कण में आध्यात्मिक समाया हुआ है और कोने कोने में ईश्वरीय ऊर्जा संचालित हो रही है। उज्जैन ने हजारों वर्षों तक भारत की संपन्नता और समृद्धि का, ज्ञान और गरिमा का, सभ्यता और साहित्य का नेतृत्व किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने धार्मिक स्थलों के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा सोमनाथ, केदारनाथ, बदरीनाथ धाम में नव निर्माण अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण तथा चार धाम निर्माण प्रोजेक्ट में ऑल वेदर रोड बन रही है। जब हम उत्तर से दक्षिण तक पूर्व से पश्चिम तक अपने प्राचीन मंदिरों को देखते हैं तो उनका सांस्कृतिक वैभव उनकी विशालता, वैज्ञानिकता हमें आश्चर्य से भर देती है। महाकाल लोक अतीत के गौरव के साथ भविष्य के स्वागत के लिए तैयार हो गया है। महाकाल लोक की भव्यता आने वाली पीढ़ी को अलौकिक दर्षन कराएगी।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया और उसका भ्रमण भी किया। इस मौके पर उनके साथ मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चौहान व राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा शंकर के सानिध्य में साधारण कुछ भी नहीं है, सब कुछ अलौकिक है असाधारण, अविस्मरणीय है और अविश्वसनीय है। आजादी के अमृत काल में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व का आह्वान किया है।
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (12 अक्टूबर 2022)

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  • मेष :- कुटुम्ब की समस्याए सुलझेंगी, स्थिति पर नियंत्रण रखें, असफलता अवश्य ही मिलेगी।
  • वृष :- कारोबार में लाभांवित योजना बनेगी, कुछ नई आशायें सफल अवश्य ही होंगी।
  • मिथुन :- कार्यकुशलता से संतोष एवं स्त्री वर्ग से हर्ष, कार्य-व्यवसाय अवश्य ही होगा।
  • कर्क :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्य-व्यवसाय अवश्य ही होगा, ध्यान रखें।
  • सिंह :- अधिकारियों की उपेक्षा से हानि होगी, मानसिक बेचैनी, कार्य में बाधा सम्भव है।
  • कन्या :- परिश्रम से सोचे कार्य में सफलता, संघर्ष वृद्धि अवश्य बनी ही रहेगी।
  • तुला :- समृद्धि के साधन बनेंगे, कार्य-व्यवस्था अनुकूल अधिकारियों से तनाव बनेगा।
  • वृश्चिक :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य बनेंगे, समय का उपयोग करें।
  • धनु :- मानसिक क्लेश व मन अशांत रहे, धन हाथ से होकर जाता रहे, कार्य अवश्य बनेंगे।
  • मकर :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, इष्ट मित्रों से परेशानी, किसी के धोखे से बचकर अवश्य चलें।
  • कुम्भ :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, चिन्ताएं कम होंगी, तटस्थता से कार्य निपटा लेवें।
  • मीन :- कार्यगति अनुकूल, चिन्ताए कम हों, सफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे।
     
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