Home Blog Page 5014

मैचिंग हैट पहनकर कूल डूड बने रणवीर सिंह

0

अभिनेता रणवीर सिंह अपने ड्रेसिंग सेंस के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, कपड़ों के चयन को लेकर वह कई बार ट्रोल्स के निशाने पर आ चुके हैं, लेकिन इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। स्टाइल के मामले में वह सिर्फ अपने मन की करते हैं। एक बार फिर रणवीर सिंह की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई हुई है। इसमें वह हैट पहनकर कूल डूड बने नजर आ रहे हैं।

रणवीर सिंह ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक तस्वीर साझा की है। जिसमें रणवीर सिंह अपनी जैकेट से मैच करती हुई हैट पहने नजर आ रहे हैं। देखकर लग रहा है कि यह डैनिम हैट है, जिस पर व्हाइट कलर से डिजाइन बनी हुई है। इसके साथ रणवीर सिंह ने काला चश्मा पहना हुआ है। उनके चश्मे का डिजाइन भी निराला है। एक हाथ से चश्मा पकड़कर पोज देते हुए रणवीर सिंह ने यह सेल्फी क्लिक की है। इस तस्वीर के साथ रणवीर सिंह ने लिखा है, 'वेडनसडे।' रणवीर सिंह का यह लुक इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। एक्टर का यह अंदाज हर किसी को पसंद आ रहा है। 

रणवीर सिंह आखिरी बार फिल्म जयेशभाई जोरदार में नजर आए थे। वह जल्द ही करण जौहर की फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी।' में नजर आएंगे। यह फिल्म अगले साल 10 फरवरी को रिलीज होगी। इसके अलावा रणवीर सिंह जैकलीन फर्नांडिस और पूजा हेगड़े के साथ 'सर्कस' में भी नजर आएंगे। यह फिल्म 23 दिसंबर 2022 को रिलीज होगी।

इंदौर के कारोबारी विनोद अग्रवाल मध्‍य प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति

0

इंदौर ।    देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हो गई है। शीर्ष अमीरों में श्ाहर के कोल कारोबारी विनोद अग्रवाल प्रदेश के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में सामने आए हैं। वित्तीय सेवाएं देने वाली देश की अग्रणी कंपनियों में से एक आइआइएफएल हुरून ने एक हजार करोड़ से अधिक संपत्ति वाले देश के 1037 अमीरों की सूची जारी की है। इसमें इंदौर के कोल कारोबारी विनोद अग्रवाल देश में 279 वें स्थान पर हैं। पिछले वर्ष वे सूची में 494 वें स्थान पर थे। इस बार 215 पायदान की बढ़त मिली है। विनोद अग्रवाल की अग्रवाल कोल कार्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड का नेटवर्थ छह हजार करोड़ रुपये है, जबकि पिछले वर्ष यह चार हजार करोड़ था। एक साल में कंपनी की नेटवर्थ दो हजार करोड़ रुपये बढ़ी है। कंपनी का टर्नओवर 11 हजार करोड़ रुपये है। 2022 में विनोद अग्रवाल ने 243 करोड़ का आयकर और 625 करोड़ रुपये का जीएसटी जमा किया है। विनोद अग्रवाल फाउंडेशन ने 2022 में 25 करोड़ रुपये का दान दिया है। कंपनी के स्तर पर अग्रवाल कोल कार्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड और व्यक्तिगत तौर पर विनोद अग्रवाल प्रदेश में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले व्यक्ति हैं। इनके साथ ही इंदौर के राजरतन ग्लोबल वायर के एमडी सुनील चौरड़िया 389वें पर रहे हैं। लिस्ट में पहली बार शहर की यूनिकार्न कंपनी ईकेआइ एनर्जी सर्विसेस को भी जगह मिली है। कंपनी के संचालक मनीष डबकारा 459वें स्थान पर हैं। भोपाल की दिलीप बिल्डकान कंपनी के दिलीप सूर्यवंशी 681 और दिलीप बिल्डकान के ही देवेंद्र जैन 950वें पायदान पर हैं।

500 वर्ग फीट के मकान में रहते थे

अग्रवाल परिवार ने भारत-पाकिस्तान बंटवारे में अपना सबकुछ खो दिया था। विनोद अग्रवाल तीन वर्ष की उम्र में इंदौर आए थे और संघर्ष के बीच आगे बढ़े। 500 वर्गफीट के मकान में आठ भाई-बहन, माता-पिता के साथ रहते थे। विनोद अग्रवाल देश के सबसे बड़े दानदाताओं की सूची में भी पिछले वर्ष 66वें स्थान पर थे।

दिवाली पर रिलीज होगी राजू श्रीवास्तव की आखिरी फिल्म

0

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार को सुबह 10.20 बजे राजू श्रीवास्तव ने अंतिम सांस ली। बीते 41 दिन से वेंटिलेटर पर मौत से जंग लड़ने के बाद राजू ने 21 सितंबर को दुनिया को अलविदा कह दिया। राजू के परिवार वाले, दोस्त और प्रशंसक नम आंखों से आज राजू को अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं।

बता दें कि राजू न सिर्फ एक बेहतरीन कॉमेडियन थे बल्कि एक अभिनेता भी थे। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में कई सारी फिल्मों में काम किया। वहीं, अब राजू आखिरी बार कुणाल खेमू के साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिवंगत कॉमेडियन की आखिरी फिल्म 'कंजूस मक्खीचूस' रिलीज होने वाली है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजू श्रीवास्तव की आखिरी फिल्म 'कंजूस मक्खीचूस' मां-बाप और बच्चों के बीच के रिश्तों पर आधारित है। फिल्म के प्रोड्यूसर अनुज शर्मा ने बताया कि इस फिल्म में राजू श्रीवास्तव ने सरकारी बाबू का किरदार निभाते हुए नजर आएंगे। बता दें कि इस फिल्म में कुणाल खेमू के साथ-साथ कई बड़े कलाकार हैं। राजू श्रीवास्तव की आखिरी फिल्म 'कंजूस मक्खीचूस' दिवाली के मौके पर ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज की जाएगी। 

मध्य प्रदेश में पीएफआइ के ठिकानों पर एनआइए की रेड, इंदौर से 3 गिरफ्तार

0

 इंदौर ।   राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआइए) की टीम ने मध्य प्रदेश के इंदौर में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) के ठिकानों पर छापा मारा। इस दौरान एनआइए ने इंदौर से पीएफआइ के तीन लीडर को गिरफ्तार किया गया है, एडिशन पुलिस कमिश्नर राजेश हिंगणकर ने इसकी पुष्टि की है। जिनकी गिरफ्तारी हुई है उनमें पीएफआइ स्टेट हेड अब्दुल करीब बैकरी और एक का नाम जावेद बताया गया है। पीएफआइ का एक प्रमुख पदाधिकारी अब्दुल रऊफ बेलिम पहले से जिलाबदर है। इंदौर में जवाहर मार्ग स्थित पीएफआइ के आफिस में भी छापा मारा गया। एनआइए की टीम गुरुवार सुबह से देशभर में पीएफआइ के ठिकानों पर कार्रवाई कर रही है। इस दौरान टेरर फंडिंग से जुड़े दस्तावेज समेत साहित्य मिलने की बात सामने आ रही है। खरगोन में हर दंगों में पीएफआइ के शामिल होने की बात कही जाती रही है। वहीं 17 फरवरी 2021 को उज्जैन में पीएफआइ ने अपने स्थापना दिवस पर सभा में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया था। इसके पहले भी इंदौर में सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश में पीएफआइ से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पीएफआइ का संगठन मालवा-निमाड़ के इलाके में काफी एक्टिव बताया जाता है। गौरतलब है कि सिमी भी इसी इलाके में सक्रिय रहा है।

हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करे इस तरह के जूस

0

1. संतरे और अदरक का जूस : सिटरस फल स्वस्थ त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं।सिटरस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो यूवी रेडिएशन से बचाते हैं और विटामिन-सी से भरपूर होते हैं। अदरक, जिसका स्वाद मीठा और हल्का तेज़ होता है, लेकिन त्वचा की जलन में मदद करता है।

2. टमाटर का जूस : त्वचा की सेहत के लिए विटामिन-सी काफी फायदेमंद होता है।विटामिन-सी त्वचा के सेहत के लिए ज़रूरी है, क्योंकि इसके एंटीऑक्सीडेंट्स कोलाजन बनाने में अहम रोल अदा करते हैं, हालांकि, सिटरस फल ही विटामिन-सी के स्त्रोत नहीं होते। टमाटर भी विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो त्वचा को यूवी किरणों से बचाता है।

3. चुकंदर और बादाम का जूस : विटामिन-ए की तरह विटामिन-ई भी हमारी त्वचा में जलन को कम करता है। यहां तक कि, कई अध्ययनों से पता चला है कि यह यूवी एक्सपोजर से होने वाली क्षति को कम कर सकता है। चुकंदर और बादाम दोनों पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

4. पत्तेदार हरी सब्ज़ियों का जूस : हरी पत्तेदार सब्ज़ियां कैरोटीनॉयड का एक उत्कृष्ट स्रोत होती हैं। सिर्फ एक कप केल में कैरोटेनॉयड्स की मात्रा एक दिन में आपकी ज़रूरत से दस गुना ज्यादा होती है। विटामिन-ए या कैरोटेनॉयड्स का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन नुकसान भी नहीं करता है। इस जूस को बनाने के लिए एक कप केल और पालक को ब्लेंड कर लें। फिर इसमें कुछ पुदीना के पत्ते डालें और अपनी पसंद का फल डालकर जूस निकाल लें।

5. गाजर का जूस : गाजर में त्वचा को बेहतर बनाने वाले विटामिन और खनीज होते हैं, जिसमें बायोटिन और विटामिन-ए दोनों शामिल हैं। आप जूस के फायदों को बढ़ाने के लिए इसमें हल्दी भी मिला सकते हैं।हल्दी एक शक्तिशाली एंटी-इफ्लामेटरी और एंटीऑक्सीडेंट है, जिसमें पूरे शरीर के लिए चिकित्सीय गुण होते हैं।

6. सेब और पुदीने का जूस : सेब में कुछ पत्तियां पुदीने की डालकर इस जूस को तैयार किया जा सकता है। सेब का स्वाद मीठा और अच्छा होता है, जो एंटी-इंफ्लामेटरी भी होते हैं। इनमें पेक्टीन भी होता है, जो आंत के बैक्टीरिया को बढ़ाने में मददगार साबित होता है। पुदीना के पत्ते त्वचा के पोर्स को साफ करते हैं और स्किन को मुलायम और हाइड्रेट बनाते हैं। इसके अलावा स्किन में ब्लड फ्लो को बेहतर बनाते हैं और झुर्रियों को दूर करते हैं।

पितरों का आशीर्वाद जरुरी 

0

पितरों के आशीर्वाद से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। घर के बड़े-बुजुर्ग सिर्फ मान-सम्मान चाहते हैं, इनको कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसे प्यार पर घर के छोटों का अधिकार होता है वैसे ही पूर्वज सम्मान के अधिकारी होते हैं। खुश होकर ये दिल से अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं लेकिन पितृ जब नाराज हो जाते हैं तो बसा हुआ संसार उजड़ जाता है। पितर उस स्थिति में नाराज होते हैं, जब घर के किसी मांगलिक कार्यक्रम में, किसी शुभ कार्य में उन्हें याद नहीं करते, उनकी अनदेखी करते हैं। 
मान-प्रतिष्ठा का अभाव
पितरों की नाराजगी से व्यक्ति को मान-प्रतिष्ठा के अभाव का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों को पग-पग पर समस्याओं से जूझना पड़ता है।
धन का अभाव
पितृदोष होने के कारण धन का अभाव रहता है। व्यक्ति को किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाती। जमा धन बर्बाद हो जाता है। फिजूल खर्ची को वह रोक नहीं पाता है। साथ ही लाख कोशिश के बाद भी कर्ज कभी नहीं उतार पाता।
घर-परिवार में अशांति
पितरों के नाराज होने से घर-परिवार में किसी न किसी कारण झगड़ा होता है। परिवार के सदस्यों में मनमुटाव बना रहता है। घर में अशांति का वातावरण बना रहता है। घर के सदस्यों की शादी में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं।
संतान की ओर से कष्ट
पितृदोष के कारण संतान की ओर से कष्ट मिलता है। उनके यहां संतान होने में परेशानी आती है। संतान का स्वास्थ्य खराब रहने या संतान का बुरी संगति में फंसने से परेशानी झेलना होती है।
कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाना
पितृदोष जब होता है तो जाने-अनजाने ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिसके कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन की वजह से कोई समस्या हो सकती है, जिससे लंबे समय तक मामला उलझा रहता है।
गंभीर प्रकार का रोग होना
पितृदोष के कारण कई गंभीर व असाध्य रोग घर के सदस्यों को हो जाते हैं। पितर दोष का प्रभाव घर की स्त्रियों पर भी रहता है। इन्हें ऐसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जो जल्दी ठीक नहीं होती। ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं।
 

स्नान भी बना सकता धनवान

0

ग्रहों की स्थिति का आपके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर यह अनुकूल होते हैं तो आपके जीवन में सब कुछ अच्‍छा चलता है। ग्रहों की दशा बदलने पर व्‍यक्ति को अमीर से गरीब और राजा से रंक बनने में देर नहीं लगती। आज हम आपको बता रहे हैं औषधि स्‍नान के माध्‍यम से 9 ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को कम करने के उपाय…
सूर्य के दुष्‍प्रभाव को कम करने के लिए
इलाइची, केसर एपवं गुलहठी, लाल रंग के फूल मिश्रित जल द्वारा स्‍नान करने से सूर्य के दुष्‍प्रभाव कम होते हैं।
चंद्र की पीड़ा के निवारण के लिए
सफेद चंदन, सफेद फूल, सीप, शंख और गुलाब जल मिश्रित पानी से नहाने से आपकी राशि पर चंद्र के दुष्‍प्रभाव कम होते हैं।
ऐसे दूर कर सकते हैं मंगल की पीड़ा
लाल चंदन, लाल फूल, बेल वृक्ष की छाल, जटामांसी, हींग मिश्रित जल से नहाने से मंगल ग्रह के दुष्‍परिणों को भी कम किया जा सकता है।
बुध की कृपा ऐसे कर सकते हैं प्राप्‍त
अगर आप चाहते हैं कि आप पर बुध की कृपा दृष्टि बनी रहे तो आपको अपने स्‍नान के जल में अक्षत, जायफल, गाय का गोबर मिश्रित करके स्‍नान करना होगा।
गुरु के दुष्‍प्रभाव ऐसे करें दूर
सफेद सरसों, दमयंती, गूलर और चमेली के फूल मिलाकर स्‍नान करने से आप पर गुरु के दुष्‍प्रभावों का असर बहुत कम होता है।
शुक्र को ऐसे कर सकते हैं प्रसन्‍न
शुक्र को आपके वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। शुक्र को खुश रखने से आपका वैवाहिक जीवन सदैव खुशहाल रहता है। इसके लिए बस आपको अपने स्‍नान के जल में जायफल, मैनसिल, केसर, इलाइची और मूली के बीज मिलाकर नहाना होगा। ऐसा करने से शुक्र ग्रह के दुष्‍प्रभाव दूर हो सकते हैं।
शनि ग्रह के प्रकोप से ऐसे बचें
शनि को न्‍याय के देवता का सम्‍मान प्राप्‍त है। यह व्‍यक्ति को उसके कर्म के अनुरूप परिणाम देते हैं। अत: हमको अपने कर्म तो दुरुस्‍त रखने ही चाहिए साथ ही कुछ विशेष चीजों को स्‍नान के जल में मिलाकर नहाने से आप शनि के दुष्‍प्रभावों से दूर रह सकते हैं। इन चीजों में सरसों, काले तिल, सौंफ, लोबान, सुरमा, काजल आदि शामिल हैं।
राहु की पीड़ा ऐसे कर सकते है दूर
इसके लिए आप स्‍नान औषधि के रूप में लोबान, कस्‍तूरी, गजदंत आदि सामग्री से मिश्रित जल से स्‍नान करके राहु की पीड़ा को दूर कर सकते हैं।
केतु की पीड़ा ऐसे करें दूर
लाल चंदन और छाग मूत्र मिश्रित जल से स्‍नान करके आप केतु के दुष्‍प्रभावों को अपने आप खत्‍म कर देंगे।
 

अष्टविनायक वरदविनायक मंदिर की अनोखी कथा 

0

रायगढ़ जिले के कोल्हापुर में महड़ गांव में है अष्टविनायक तीर्थ का चौथा मंदिर वरदविनायक श्री गणेश मंदिर जहां सालों से एक दीप लगातार जल रहा है। अष्ट विनायक में चौथे गणेश हैं श्री वरदविनायक। यह मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कोल्हापुर क्षेत्र में एक सुन्दर पर्वतीय गांव है महड़। इसी गांव में श्री वरदविनायक मंदिर स्थित है। यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार वरदविनायक भक्तों की सभी कामनों को पूरा होने का वरदान प्रदान करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का एक दीपक है जो 1892 से लगातार प्रज्जवलित है। वरदविनायक का नाम लेने मात्र से ही सारी कामनाओं को पूरा होने का वरदान प्राप्त होता है। इस मंदिर में माघी चतुर्थी पर विशेष पूजा होती है। इसके अतिरिक्त भाद्रपद की गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक भी विशेष उत्सव होता है जिसे देखने भक्तों का हुजूम उमड़ता है।  
मंदिर से जुड़ी कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक संतानहीन राजा था। अपने दुख के निवारण के लिए वो ऋषि विश्वामित्र की शरण में गया और सलाह मांगी। ऋषि ने उसे श्री गणेश के एकाक्षरी मंत्र का जाप करने के लिए कहा। राजा ने एेसा ही किया आैर भक्ति भाव गजानन की पूजा करते हुए उनके मंत्र का जाप किया। मंत्र के प्रभाव आैर गणपति के आर्शिवाद से उसका रुक्मांगद नाम का सुंदर पुत्र हुआ जो अत्यंत धर्मनिष्ठ भी था। युवा होने पर एक बार शिकार के दौरान जंगल में घूमते हुए रुक्मांगद, ऋषि वाचक्नवी के आश्रम में पहुंचा। यहां ऋषि की पत्नी मुकुंदा राजकुमार के पुरुषोचित सौंदर्य को देख कर उस पर मोहित हो गर्इ आैर उससे प्रणय याचना की। धर्म के मार्ग पर चलने वाले रुक्मांगद ने इसे अस्वीकार कर दिया आैर तुरंत आश्रम से चला गया। दूसरी आेर ऋषि पत्नी उसके प्रेम में पागल जैसी हो गर्इ। उसकी अवस्था के बारे में जान कर देवराज इंद्र ने इसका लाभ उठाने के लिए रुक्मांगद का भेष धारण कर मुकुंदा से प्रेम संबंध बनाये, जिससे वो गर्भवती हो गर्इ। कुछ समय बाद उसने ग्रिसमाद नामक पुत्र को जन्म दिया। युवा होने पर अपने जन्म की कहानी जान कर इस पुत्र ने मुकुंदा को श्राप दिया कि वो कांटेदार जंगली बेर की झाड़ी बन जाये। इस पर मुकुंदा ने भी अपने बेटे को श्राप दिया कि वो एक क्रूर राक्षस का पिता बनेगा। उसी समय एक आकाशवाणी से पता चला कि मुंकुदा की संतान का पिता वास्तव में इंद्र है। दोनों माता और पुत्र अत्यंत लज्जित हुए और मुकुंदा एक कांटेदार झाड़ी में बदल गयी जबकि उसका पुत्र पुष्पक वन में जाकर श्री गणेश की तपस्या करने लगा। बाद में प्रसन्न हो गणेश जी ने उसे त्रिलोकविजयी संतान का पिता बनने आैर एक वर मांगने का आर्शिवाद दिया। तब ग्रिसमाद ने कहा कि वे स्वयं यहां विराजमान हों और प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूर्ण करें। इसके बाद उसने भद्रका नाम से प्रसिद्घ स्थान पर मंदिर का निर्माण किया और श्री गणेश यहां वरदविनायक के रूप में प्रतिष्ठित हुए।  
मंदिर का स्थापत्य 
वर्तमान वरदविनायक मंदिर के बारे में कहा जाता है की इसका निर्माण 1725 में सूबेदार रामजी महादेव बिवलकर ने करवाया था। मंदिर का परिसर सुंदर तालाब के एक किनारे बना हुआ है। ये पूर्व मुखी अष्टविनायक मंदिर पूरे महाराष्ट्र में काफी प्रसिद्ध है। यहां गणपति के साथ उनकी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियां भी स्थापित हैं। मंदिर के चारों तरफ चार हाथियों की प्रतिमायें बनार्इ गर्इ हैं। मंदिर के ऊपर 25 फीट ऊंचा स्वर्ण शिखर निर्मित है। इसके नदी तट के उत्तरी भाग पर गौमुख है। मंदिर के पश्चिम में एक पवित्र तालाब बना है। मंदिर में एक मुषिका, नवग्रहों के देवताओं की मूर्तियां और एक शिवलिंग भी स्थापित है। अष्टविनायक वरदविनायक मंदिर के गर्भगृह में भी श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति है।
 

कर्ज से बचने करें ये काम

0

पूरे दिन जाने-अनजाने हमसे ऐसे कई कार्य हो जाते हैं, जिनके प्रभाव के बारे में बाद में पता चलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि सही समय पर सही कार्य करने से ना सिर्फ भगवान की कृपा मिलती है बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है। वहीं कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें भूलकर भी सुबह और शाम के समय नहीं करना चाहिए। इन्हें करने से पैसा और तरक्की दोनों का नाश होता है। यहां जानिए, सुबह शाम कौन से कार्य नहीं करने चाहिए…
नाराज हो जाती हैं मां लक्ष्मी
तुलसी के पत्तों को भूलकर भी शाम के समय नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। पूजा के लिए सुबह ही पत्ते तोड़कर रख लें। शाम के समय तुलसी के पत्ते तोड़ने से आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है।
दरिद्रता का होता है वास
शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय घर की साफ-सफाई नहीं करनी चाहिए। भूलकर भी घर का कूड़ा शाम को बाहर नहीं फेकना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाएगी। साथ ही घर में दरिद्रता का वास होने से आप पर कर्ज बढ़ सकता है।
भगवान की नहीं होती कृपा
शाम के समय कभी भी नहीं सोना चाहिए, ऐसा करने से पाप लगता है। सुबह और शाम का समय पूजा-ध्यान करने का है। जो लोग इस समय सोते हैं, उन पर भगवान की  कृपा नहीं रहती है। हां, बीमार लोग और बच्चे इस नियम से बाहर होते हैं।
इस दिन करें धन का लेन-देन
धन से संबंधित कोई भी कार्य करना हो तो आप सोमवार या बुधवार को करें। इन दिनों में किया गया धन का लेन-देने फायदेमंद माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से कर्जा धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
इस दिन करें व्रत
लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए सुहागिन महिलाओं को गुरुवार का व्रत करने से लाभ होता है। इस दिन किसी गरीब महिला को सुहाग की सामग्री दान देने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा करने से आपके जीवन की सभी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म होने लग जाएंगी।
इससे निशान न बनने दें
घर की दीवारों या फर्श पर पेंसिल या चॉक आदि का निशान न बनाने दें। ऐसा माना जाता है कि दीवार और फर्श पर बनी ये रेखाएं घर में नकारात्मकता को बढ़ाती है, जिससे आर्थिक तरक्की बाधित होती है और कर्ज बढ़ने की संभावना रहती है।
रूठ जाती है लक्ष्मी
घर में सुबह की गतिविधियों की शुरुआत झाड़ू लगाने के बाद ही करनी चाहिए। जैसे, पूजा करना, नाश्ता करना। घर में झाड़ू लगा देने से रातभर की नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है। घर में ताजगी का माहौल बनता है, जिससे परिवार के लोग उर्जावान रहते हैं और हर तरह की तरक्की के लिए ऊर्जा ही तो चाहिए।
 

पितरों का आशीर्वाद हासिल करने करते हैं श्राद्ध

0

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाते हैं। पितरों का आशीर्वाद हम पर बना रहे इसलिए उनकी आत्मा की शांति के लिए हर साल श्राद्ध करते हैं। उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति बनी रहती है। 
इतने होते हैं श्राद्ध
निर्णय सिंधु और भविष्य में पुराण में श्राद्ध के 12 प्रकारों का वर्णन मिलता है। ये हैं नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धयर्थ, कर्मांग, तीर्थ, यात्रार्थ, पुष्ट्यर्थ।
पितरों के प्रसन्न करने के लिए करें यह श्राद्ध
नित्य श्राद्ध: कोई भी व्यक्ति अन्न, जल, दूध, कुश, फूल व फल से हर रोज श्राद्ध करके हर रोज पितरों को प्रसन्न कर सकता है।
नैमित्तिक श्राद्ध: यह श्राद्ध विशेष अवसर पर किया जाता है। जैसे- पिता आदि की मृत्यु तिथि के दिन इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।
काम्य श्राद्ध: इस श्राद्ध को किसी कामना विशेष, सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
वृद्धि श्राद्ध: इस श्राद्ध को सौभाग्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। इसमें वृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
सपिंडन श्राद्ध: इस श्राद्ध को मृत व्यक्ति के 12वें दिन पितरों से मिलने के लिए किया जाता है। इसे स्त्रियां भी कर सकती हैं।
पार्वण श्राद्ध: पिता, दादा, परदादा और दादी, परदादी के निमित्त किया जाता है। इसे पर्व की तिथि पर ही किया जाता है।
समूह में किया जाता है यह श्राद्ध
गोष्ठी श्राद्ध: इस श्राद्ध को परिवार के सभी लोग मिलकर करते हैं। यह श्राद्ध हमेशा समूह में किया जाता है।
शुद्धयर्थ श्राद्ध: परिवार की शुद्धता के लिए शुद्धयर्थ श्राद्ध किया जाता है।
कर्मांग श्राद्ध: यह श्राद्ध को किसी संस्कार के अवसर पर ही किया जाता है। कर्मांग का अर्थ कर्म के अंग से होता है।
यात्रा के लिए करते हैं यह श्राद्ध
तीर्थ श्राद्ध: यह श्राद्ध हमेशा तीर्थ पर ही किया जाता है।
यात्रार्थ श्राद्ध: यात्रा की सफलता के लिए यात्रार्थ श्राद्ध किया जाता है।
पुष्ट्यर्थ श्राद्ध: आर्थिक उन्नति में बढ़ोतरी, अच्छे स्वास्थ्य के लिए पुष्टि के निमित्त जो श्राद्ध किए जाते हैं वे पुष्ट्यर्थ श्राद्ध कहलाते हैं।
अमावस्या को किया जाता है इनका श्राद्ध
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। सांप काटने से मृत्यु और बीमारी में या अकाल मृत्यु होने पर भी अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जाता है। जिनकी आग से मृत्यु हुई हो या जिनका अंतिम संस्कार न किया जा सका हो, उनका श्राद्ध भी अमावस्या को करते हैं।
 

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group