सिंगरौली । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में एयर क्वालिटी इंडेक्स के आधार पर पटाखों के क्रय, विक्रय एवं उपयोग के संबंध में दिये गये निर्देशों के पालन में कलेक्टर सिंगरौली द्वारा सम्पूर्ण नगर पालिक क्षेत्र में 22 अक्टूबर से 05 नवंबर तक पटाखों के क्रय-विक्रय एवं उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीन पटाखों के उपयोग के साथ आंशिक रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधीक्षक सिंगरौली वीरेन्द्र कुमार सिंह द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिंगरौली शिव कुमार वर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए समस्त राजपत्रित पुलिस अधिकारी, थाना, चौकी प्रभारियों को इस संबंध में अपने क्षेत्रान्तर्गत आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया। दीपावली पर्व के दौरान पटाखों के क्रय, विक्रय एवं उपयोग के संबंध में निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध थाना वैढ़न पुलिस द्वारा 15 प्रकरण, थाना विंध्य नगर पुलिस द्वरा 02 प्रकरण, थाना नवानगर पुलिस द्वारा 05 प्रकरण, थाना मोरवा पुलिस द्वारा 03 प्रकरण, थाना बरगवां पुलिस द्वारा 02, थाना माड़ा पुलिस द्वारा 03, थाना सरई पुलिस द्वारा 01 प्रकरण, थाना लंघाडोल पुलिस द्वारा 01 प्रकरण, थाना चितरंगी पुलिस द्वारा 04 एवं थाना गढ़वा पुलिस द्वारा 02 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये। पुलिस अधीक्षक सिंगरौली बीरेन्द्र कुमार सिंह द्वारा जनता से सहयोग की अपील करते हुए बताया गया कि सिंगरौली, कटनी एवं ग्वालियर में एयर क्वालिटी इंडेक्स पूअर होने के कारण आम जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पटाखों के उपयोग के संबंध में गाइडलाइन जारी की गई। इस संबंध में 05 नवंबर तक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पटाखों के संबंध में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने हेतु समस्त पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
फॉलो करें ये सिंपल मेकअप टिप्स, हर आउटफिट में लगेंगी ‘Gorgeous’
मेकअप रखें लाइट : मेकअप को लाइट और नेचुरल रखें।
ट्रेडिशनल ड्रेस : गर्ली लुक को मेंटेन रखते हुए ट्रेडिशनल ड्रेस कैरी करें। इसके लिए लॉन्ग स्कर्ट के साथ दुपट्टा कैरी कर सकती हैं। दुपट्टे वाला सूट पहन सकती हैं या कोई लॉन्ग ड्रेस विद दुपट्टा ले सकती हैं।
बालों को रखें खुला : इंडियन ड्रेस के साथ अपने बालों को खुले रखें या पोनीटेल बनाएं।
त्वचा को करें तैयार : मेकअप करने से पहले अपनी त्वचा को तैयार कर लें ताकि मेकअप स्किन के साथ घुलमिल जाए। इसके लिए मेकअप प्रोडक्ट को लगाने से पहले चेहरे और गर्दन को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसके लिए आप फेसवॉश या क्लींजर से चेहरा साफ करें।

प्राइमर लगाएं : चेहरे पर फाउंडेशन लगाने से पहले प्राइमर लगाएं। ये स्किन को मॉइश्चर करने के साथ फाउंडेशन को लंबे समय तक टिका रहने में मदद करता है।
फाउंडेशन : चेहरे पर नॉर्मल मेकअप लुक के लिए बीबी या सीसी क्रीम लगा सकती हैं। ऐसा करने से त्वचा को हल्का कवरेज मिलता है। फाउंडेशन लगाते समय इसे चेहरे पर अच्छी तरह से ब्लेंड करके कंसीलर लगाएं। आंखों के नीचे, नाक के आसपास और होठों के किनारों पर कंसीलर लगाकर ब्लेंड कर लें।
आई मेकअप : आंखों पर अगर आप हल्का मेकअप चाहती हैं तो गुलाबी रंग के आईशैडो को लगाएं। ये लगभग सारे कपड़ों के साथ मैच कर जाएगा। अब काजल और आईलाइनर की मदद से अपने आई मेकअप को पूरा करें। आखिर में मस्कारा लगा लें।
गालों पर ब्लश : गालों पर ब्लश लगाने के साथ ठुड्डी, नाक के पास भी ब्लश लगाएं। इइसके बाद हाईलाइटर लगाकर चेहरे को शाइन दें।
लिपस्टिक : कपड़़ों से मैच करती हुई लिपस्टिक लगाकर अपने लुक को पूरा करें। अपनी त्वचा के रंग के अनुसार आप गुलाबी, ब्राउन, लाल रंग के शेड की लिपस्टिक लगा सकती हैं।
सिल्वर साड़ी में अपसरा सी दिखीं जाह्नवी कपूर
बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर अपने लुक्स से सभी का दिल जीत लेती हैं। एक्ट्रेस बीते कई दिनों से अपने स्टाइल के लेवल को अप कर रही हैं। हाल ही में अमृतपाल सिंह बिंद्रा की दिवाली पार्टी के लिए सभी सेलेब्स ने ट्रेंडी एथनिक आउटफिट पहना था। इस लुक में उन्होंने एक चांदी की साड़ी को कैरी किया था। ये कहना गलत नहीं होगा की एक्ट्रेस इस लुक में कुल अप्सरा की तरह लग रही थी। एक्ट्रेस का लुक बेस्ट फ्रेंड की वेडिंग के लिए बेस्ट है।
डीपनेक ब्लाउज में जीता दिल
जाह्नवी ने एक सुंदर सिल्वर शेड और फिगर-हगिंग मेश फैब्रिक में आते हैं जो जाह्नवी के आकर्षक कर्व्स को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक शैली में साड़ी को ड्रेप किया है। पल्लू को अपनी टोन्ड मिड्रिफ दिखाया है। इसी के साथ उन्होंने एक स्लीवलेस सीक्विन वाला ब्लाउज पहना है। जिसमें एक प्लंजिंग नेकलाइन है। क्रॉप्ड हेम के साथ उन्होंने आउटफिट को पूरा किया।
ग्लैम पिक्स के लिए यूं क्रिएट किया लुक

खूबसूरत आउटफिट में ग्लैम पिक्स के लिए जाह्नवी ने मौव लिप शेड, स्मोकी पिंक आई शैडो, बोल्ड विंग्ड आईलाइनर, कोहल-लाइनेड आईज, लैशेज पर मस्कारा, डार्क ब्रो, ब्लश गाल, शार्प कॉन्टूरिंग और बीमिंग हाइलाइटर को चुना। इसी के साथ चांदी के लटकते झुमके और हाई हील्स के साथ लुक को कम्पलीट किया है।
गोवर्धन पूजा के लिए प्रसाद में बनाए अन्नकूट
हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का अत्यधिक महत्व है। यह त्योहार प्रकृति और मनुष्य की श्रद्धा का अच्छा उदाहरण है। इस दिन अन्नकूट का प्रसाद बनता है और भगवान कृष्ण को इसका ही भोग लगाया जाता है। गोवर्धन के दिन भगवान कृष्ण की पूजा होती है ।
सामग्री : गोवर्धन पर अन्नकूट का प्रसाद बनाने के लिए आप अपनी पसंद की कोई भी सब्जी डाल सकते हैं।आलू, बैगन, फूलगोभी, सेम, सांगरी, गाजर, मूली, गोल लौकी, अरबी, भिंडी, परवल, लौकी, शिमला मिर्च, कच्चा केला, कद्दू, पालक
मसाले : अदरक, हरी मिर्च, हरी मेथी, तेल, हींग, जीरा, हल्दी पाउडर,धनिया पाउडर,लाल मिर्च पाउडर,अमचूर पाउडर,गरम मसाला, नमक,हरा धनिया
विधि : इसे बनाने के लिए सारी सब्जियां साफ करें। और सभी को काट लें। सभी सब्जियों को मीडियम साइज की शेप में कट करें।धुली हुई सब्जियों को छान लें। और मूली के पत्तों को भी बारीक काट लें। टमाटर को धोएं और छोटे छोटे टुकड़ों में काट लीजिये। इसके अलावा मिर्च को काट लें। अदरक को छील कर धोएं और कद्दूकस करें। इसी के साथ हरे धनिये को धो कर बारीक काट लें। एक कढा़ई में तेल डालकर गरम कर लीजिए। गरम तेल में हींग और जीरा डालें। जीरा भुनने के बाद हल्दी पाउडर, धनियां पाउडर डाल कर कुछ देर भूनें। अब हरी मिर्च, अदरक डालकर मसाले को हल्का सा भूनें। अब कढ़ाई में सारी कटी सब्जियां डाल दें. साथ ही आलू, बैगन और कच्चा केला भी काट कर डाल दें। नमक और लाल मिर्च पाउडर डाल कर सारी सब्जियां मिलाएं। इसमें लगभग 1 कप पानी डालें और फिर पैन को ढक दें और सब्जियों को तेज आंच पर उबाल आने तक पकाएं। करी में उबाल आने के बाद |इसे धीमी आंच पर पकाएं और 15 से 20 मिनट बाद चैक कर लें।जब सब्जियां नरम हो जाएं तो कटे हुए टमाटर मिलाएं। टमाटर के नरम होने तक पकाएं। सब्जी में गरम मसाला, अमचूर पाउडर और हरा धनियां डाल दें औ आंच बंद कर दें।टेस्टी अन्नकूट भोग तैयार है।
आदित्य हृदय स्तोत्र का चमत्कारिक पाठ देगा छठ पूजा का पूरा फल
इस बार 28 अक्टूबर से छठ पूजन प्रारंभ हो रहा है।
सूर्यदेव की पूजा का पर्व है 'छठ'। इस 4 दिवसीय छठ पर्व के दिनों में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से यह जहां हर तरह के शत्रु से मुक्ति, कार्यक्षेत्र में पदोन्नति, व्यापार-व्यवसाय में सफलता देता है, आसान शब्दों में कहा जाए तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र हर क्षेत्र में चमत्कारी सफलता देता है। यह धन, प्रसन्नता, आत्मविश्वास तथा समस्त कार्यों में सफलता देने वाला तथा हर मनोकामना सिद्ध करने वाला पावन स्तोत्र माना गया है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं आदित्य ह्रदय स्तोत्र का सम्पूर्ण पाठ-
आदित्य ह्रदय स्तोत्र Aditya Hirdayam Stotra Path
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥1॥
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥
राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम् । येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥4॥
सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम् । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥5॥
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् । पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥6॥
सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । एष देवासुरगणांल्लोकान् पाति गभस्तिभि: ॥7॥
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥
पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥
आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान् । सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥
हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान् । तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान् ॥11॥
हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: । अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥
व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: । घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥
आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥
नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: । तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते ॥15॥
नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: । ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥
जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: । नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥
नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥
ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे । भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥
तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥
तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे । नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥
नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: । पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥
एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम् ॥23॥
देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च । यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥
एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च । कीर्तयन् पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम् । एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥
अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि । एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम् ॥27॥
एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत् तदा ॥ धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान् ॥28॥
आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान् । त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥29॥
रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम् । सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत् ॥30॥
अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण:। निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥ ।
।संपूर्ण।।
छठ पूजा की 7 खास बातें, जानिए क्यों करते हैं पूजा क्या है इसकी कथा
30 अक्टूबर 2022 को छठ पूजा का पर्व मनाया जाएगा। खासकर यह पर्व उत्तर भारतीयों में ज्यादा प्रचलित है। इस पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होती है और सप्तमी पर इसका समापन होता है।
हर घर में इस पर्व को मनाया जाता है। आओ जानते हैं इस पर की 7 खास बातें।
1. किसकी होती है पूजा : छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है।
2. सूर्यदेव : शस्त्रों के अनुसार एक अन्य सूर्यदेव हैं जिन्हें प्रत्यक्ष सूर्यदेव से जोड़कर भी देखा जाता है। सूर्य देवता के पिता का नाम महर्षि कश्यप व माता का नाम अदिति है। इनकी पत्नी का नाम संज्ञा है जो विश्वकर्मा की पुत्री है। संज्ञा से यम नामक पुत्र और यमुना नामक पुत्री तथा इनकी दूसरी पत्नी छाया से इनको एक महान प्रतापी पुत्र हुए जिनका नाम शनि है।
3. छठ मैया : छठ पूजा में सूर्यदेव के साथ ही छठ मैया की पूजा भी होती है, जिन्हें षष्ठी देवी भी कहते हैं। माता षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है। इन्हें ही मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि के दिन होती है। षष्ठी देवी मां को ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं। छठी माता की पूजा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी मिलता है।
4. कितने दिन मनाते हैं छठ पूजा : छठ पूजा व व्रत का प्रारंभ हिन्दू माह कार्तिक माह के शुक्ल की चतुर्थी तिथि से होता है और षष्ठी तिथि को कठिन व्रत रखा जाता है तथा दूसरे दिन सप्तमी को इसका पारण होता है।
5. छठ पूजा में क्या करते हैं : पहले दिन नहाय खाये अर्थात साफ-सफाई और शुद्ध शाकाहारी भोजन सेवन का पालन किया जाता है, दूसरे दिन खरना अर्थात पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर, घी लगी हुई रोटी और फलों का सेवन करते हैं, इसके बाद संध्या षष्ठी को अर्घ्य अर्थात संध्या के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और विधिवत पूजन किया जाता है तब कई तरह के वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। उसी दौरान प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य देव की उपासना के बाद रात्रि में छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा सुनी जाती है और अंत में दूसरे अर्थात अंति दिन उषा अर्घ्य अर्थात सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। पूजा के बाद व्रति कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत को पूरा करती हैं, जिसे पारण या परना कहा जाता है।
6. क्यों करते हैं छठ पूजा : छठ पूजा का व्रत महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और पूरे परिवार की सुख शांति का वर मांगाने के लिए करती हैं। मान्यता अनुसार इस दिन निःसंतानों को संतान प्राप्ति का वरदान देती हैं छठ मैया।
7. छठ कथा : पौराणिक कथा अनुसार मनु स्वायम्भुव के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने यज्ञ करवाया तब महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया परंतु वह शिशु मृत पैदा हुआ। तभी माता षष्ठी प्रकट हुई और उन्होंने अपना परिचय देते हुए मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया। देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने षष्ठी देवी की आराधना की। तभी से पूजा का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण के साथ मवेशियों की पूजा का पर्व!
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।। ' यह मंत्र है श्री गोवर्धन पूजा का।
दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं, क्योंकि 7 दिन तक भगवान श्रीकृष्ण ने पर्वत अपनी उंगली पर उठाये रखा था और वह कुछ भी खा नहीं पाए थे।इसी लिए उनके भोजन के रूप में अन्नकूट की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है , मां यशोदा श्री कृष्ण को एक दिन में आठ पहर भोजन कराती थीं।इसी कारण जब सातवें दिन के अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने पर्वत धरा पर रखा तो गांव वालों ने उन्हें हर दिन के आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन बना कर खिलाये थे। उसी दिन से अन्नकूट की परम्परा शुरु हुई और इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बना कर श्री कृष्ण और गोवर्धन पूजा की जाने लगी।एक लोककथा के मुताबिक पुलस्त्य ऋषि द्वारा गोवर्धन पर्वत को एक श्राप मिला हुआ है, जिसके कारण गोवर्धन पर्वत का आकार प्रतिदिन कम होता जा रहा हैं।प्राचीन समय में तीर्थयात्रा करते हुए पुलस्त्य ऋषि गोवर्धन पर्वत के पास पहुंचे, तो पर्वत की सुंदरता देखकर वे मंत्रमुग्ध हो गए, उन्होंने द्रोणाचल पर्वत से निवेदन किया कि आप अपने पुत्र गोवर्धन को मुझे दे दीजिए, मैं उसे काशी में स्थापित कर वहीं रहकर पूजन करुंगा। द्रोणाचल यह सुनकर दुखी हो गए लेकिन गोवर्धन पर्वत ने ऋषि से कहा कि मैं आपके साथ चलने को तैयार हूं लेकिन मेरी एक शर्त है। आप मुझे जहां रख देंगे मैं वहीं स्थापित हो जाऊंगा।
पुलस्त्य ने गोवर्धन की यह बात मान ली। फिर गोवर्धन ने ऋषि से कहा कि मैं दो योजन ऊंचा और पांच योजन चौड़ा हूं। आप मुझे काशी कैसे ले जाएंगे? तब पुलस्त्य ऋषि ने कहा कि मैं अपने तपोबल से तुम्हें अपनी हथेली पर उठाकर ले जाऊंगा। तब गोवर्धन पर्वत ऋषि के साथ चलने के लिए सहमत हो गए।
रास्ते में ब्रज आया, उसे देखकर गोवर्धन सोचने लगे कि भगवान श्रीकृष्ण-राधा जी के साथ यहां आकर बाल्यकाल और किशोर काल की बहुत सी लीलाएं करेंगे। तब उनके मन में यह विचार आया कि वह यहीं रूक जाएं। यह सोचकर गोवर्धन पर्वत पुलस्त्य ऋषि के हाथों में और अधिक भारी हो गया। जिससे ऋषि को विश्राम करने की आवश्यकता महसूस हुई।ऋषि गोवर्धन पर्वत को ब्रज में रखकर विश्राम करने लगे। ऋषि ये बात भूल गए थे कि उन्हें गोवर्धन पर्वत को कहीं रखना नहीं था, कुछ देर बाद ऋषि पर्वत को फिर से उठाने लगे लेकिन गोवर्धन ने कहा कि ऋषिवर अब मैं यहां से कहीं नहीं जा सकता।मैंने आपसे पहले ही कहा था कि आप मुझे जहां रख देंगे, मैं वहीं स्थापित हो जाउंगा। तब पुलस्त्य उसे ले जाने की हठ करने लगे, लेकिन गोवर्धन वहां से नहीं हिले।तब ऋषि ने क्रोधित होकर उसे श्राप दिया कि तुमने मेरे मनोरथ को पूर्ण नहीं होने दिया. इसलिए आज से प्रतिदिन तिल-तिल कर तुम्हारा क्षरण होता जाएगा। फिर एक दिन तुम धरती में समाहित हो जाओगे। तभी से गोवर्धन पर्वत तिल-तिल करके धरती में समा रहा है। कहा जाता है कि कलियुग के अंत तक यह पर्वत धरती में समा जाएगा।इस बार सूर्य ग्रहण लगने के कारण पूरे देश में 26 अक्टूबर के दिन गोवर्धन पूजा मनाई जा रही है।सुबह स्नान करने के बाद गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसे फूलों से सजाना चाहिए। गोवर्धन पर्वत के पास ग्वाल- बाल की आकृति बनाकर उसके पास ही भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखनी चाहिए। गोवर्धन पूजा के समय भगवान श्रीकृष्ण को धूप ,दीप से आरती करें और उन्हें अन्नकूट का भोग लगाएं। गोवर्धन पूजा को लेकर वृंदावन, मथुरा, बरसाना, गोकुल के लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 26 अक्टूबर सुबह 6:29 से लेकर 8:43 तक रहेगा।इस पर्व का प्रकृति के साथ सीधा सम्बन्ध है। गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों मे गंगा है। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। गौ सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है ।गोवर्धन पूजा पर, भगवान कृष्ण को गेहूं, चावल, बेसन से बनी सब्जी और पत्तेदार सब्जियों का भोग लगाया जाता है। दही, दूध, शहद, चीनी, मेवा और तुलसी से बना पंचामृत भगवान कृष्ण को चढ़ाया जाता है कई प्रकार की सब्जियों से तैयार अन्नकूट सब्जी भी भगवान कृष्ण के लिए बनाई जाती है।अन्नकूट और गोवर्धन पूजा का आयोजन बंद कमरे में नही करना चाहिए। इस दिन चंद्रमा को भी नहीं देखना चाहिए।
क्यों कहते हैं विष्णु भगवान को नारायण
भगवान विष्णु के हजारों नाम हैं। इनमें एक प्रमुख नाम है नारायण। फिल्मों, टीवी सीरियल या रामलीला में आपने देखा होगा कि नारद मुनि भगवान विष्णु को नारायण नाम से पुकारते हैं। इस नाम का धार्मिक रूप से बड़ा महत्व है। इस एक नाम में सृष्टि का संपूर्ण सार छिपा हुआ है। इसलिए शास्त्रों में अधिकांश स्थानों पर विष्णु भगवान को नारायण नाम से संबोधित किया गया है। हिन्दू धर्म में अठारह पुराणों का वर्णन मिलता है। इन अठारह पुराणों में विष्णु पुराण एक है। इस पुराण में सृष्टि की रचना का वर्णन किया गया है। इसी प्रम में बताया गया है किस प्रकार विष्णु भगवान ने वाराह रूप धारण करके पृथ्वी को रसातल यानी पाताल लोक से उठाकर जल के मध्य में स्थित किया। इसके बाद ब्रह्मा जी ने सत्व, रज और तम गुणों से असुर, देव, राक्षस, यक्ष, मनुष्य, सर्प एवं अन्य जीव-जन्तुओं की रचना की।
विष्णु पुराण में बताया गया है कि सृष्टि के समाप्ति के समय सब कुछ जल में समा जाता है और संपूर्ण ब्रह्माण्ड अंधकारमय हो जाता है। भगवान विष्णु चिर निद्रा में जल में शयन करते हैं। देवताओं का दिन आरंभ होने पर भगवान विष्णु फिर से सृष्टि की रचना करते हैं और ब्रह्मा एवं शिव की उत्पत्ति उन्हीं से होती है। भगवान विष्णु प्रथम नर रूप में व्यक्त होते हैं। इसलिए शाŒााW में इन्हें आदिपुरूष कहा गया है। आदि पुरूष विष्णु का निवास यानी 'आयन' नार यानी 'जल' है इसलिए भगवान विष्णु को नारायण नाम से संबोधित किया जाता हैं।
अहम् के नाश की सूचक है ‘गोवर्धन पूजा’
हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा को अर्थात् दीवाली के अगले दिन ‘अन्नकूट पर्व’ मनाया जाता है, जिसे ‘गोवर्धन पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि इस वर्ष दीवाली 24 अक्तूबर को मनाई गई जबकि गोवर्धन पूजा 26 अक्तूबर को है। दरअसल इस वर्ष 25 अक्तूबर को सूर्यग्रहण के कारण कोई पूजा नहीं हुई, इसीलिए गोवर्धन पूजा दीवाली के दो दिन पश्चात् 26 अक्तूबर को है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन घर में गाय के गोबर से गोवर्धन की मानव रूपी आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है तथा तरह-तरह के व्यंजन बनाकर गोवर्धन को भोग लगाया जाता है। इन व्यंजनों को ‘छप्पन भोग’ की संज्ञा दी जाती है। अन्नकूट पर्व के दिन गौपूजा का विशेष महत्व है। इसी कारण इस दिन बहुत से लोग गाय, बैल तथा अन्य पशुओं की सेवा करते हैं और गायों की आरती भी उतारी जाती है। इस दिन शाम के समय गोवर्धन पूजा में भगवान विष्णु, भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ दैत्यराज महाप्रतापी एवं महादानवीर बलि का भी पूजन किया जाता है।
माना जाता है कि इस पर्व का प्रचलन द्वापर युग से शुरू हुआ था और तभी से हर वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को यह पर्व मनाया जाता रहा है। मान्यताओं के अनुसार सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ही गोवर्धन पूजा आरंभ कराई गई थी, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर देवताओं के राजा इन्द्र के क्रोध से ब्रजवासियों और पशु-पक्षियों की रक्षा की थी। इसी कारण गोवर्धन पूजा में गिरिराज के साथ श्रीकृष्ण के पूजन का भी विधान है। भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन देवराज इन्द्र के अहंकार को चूर-चूर कर गोकुलवासियों को गोधन के महत्व से परिचित कराया था। इस दिन गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा की जाती है। वेदों में इस दिन वरूण, इन्द्र और अग्निदेव के पूजन का भी विधान है। पुराणों में बताया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु ने लक्ष्मी सहित समस्त देवी-देवताओं को बलि की कैद से मुक्त कराया था।
इस पर्व के संबंध में द्वापर युग की एक कथा प्रचलित है। एक बार भगवान श्रीकृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ गायों को चराते हुए गोवर्धन पर्वत की तराई में पहुंच गए। वहां उन्होंने देखा कि हजारों गोप-गोपियां बड़े उत्साह से नाच-गाकर कोई उत्सव मना रहे हैं और 56 प्रकार के व्यंजन वहां रखे हैं। श्रीकृष्ण के पूछने पर गोपियों ने बताया कि आज के दिन वृत्रासुर नामक राक्षस का वध करने वाले मेघों व देवों के राजा इन्द्र का पूजन किया जाता है क्योंकि उनकी कृपा से ही ब्रज में वर्षा होती है और अन्न पैदा होता है। यह सुनकर श्रीकृष्ण ने वहां उपस्थित समस्त ब्रजवासियों से कहा कि अगर देवराज इन्द्र स्वयं यहां आकर भोग लगाएं, तभी तुम्हें यह उत्सव मनाना चाहिए। ब्रजवासी श्रीकृष्ण की बात से सहमत नहीं हुए। गोपियों ने श्रीकृष्ण से कहा, ‘‘अगर इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए ‘इन्द्रोज’ नामक यह यज्ञ नहीं किया गया तो समस्त ब्रजवासियों को इन्द्र के कोप का सामना करना होगा और समूचा ब्रज अकाल या बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसलिए हमें यह यज्ञ हर हाल में करना ही चाहिए।’’
श्रीकृष्ण ने कहा, ‘‘इन्द्र में क्या शक्ति है? उससे ज्यादा शक्तिशाली तो हमारा यह गोवर्धन पर्वत है और ब्रज में इसी के कारण वर्षा होती है। इसलिए हमें इन्द्रोज यज्ञ करने के बजाय गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए।’’
काफी वाद-विवाद के पश्चात् ब्रजवासी इन्द्र के बजाय गोवर्धन की पूजा करने के लिए तैयार हो गए। सभी अपने घरों से पकवान लाकर श्रीकृष्ण द्वारा बताई विधि के अनुसार गोवर्धन का पूजन करने लगे। श्रीकृष्ण ने तब गोवर्धन पर्वत में अपना दिव्य रूप प्रविष्ट कराकर स्वयं गोवर्धन के रूप में समस्त व्यंजनों का भोग लगाया और ब्रजवासियों को आशीर्वाद दिया। ब्रजवासी गोवर्धन को प्रसन्न करने के लिए किए गए अपने यज्ञ को सफल मानकर बड़े प्रसन्न हुए।
नारद मुनि ने इन्द्र को इस घटना की जानकारी दी तो इन्द्र इसे अपना अपमान मानकर क्रोध के मारे फुफकार उठे और मेघों के जरिये ब्रज में तबाही शुरू कर दी। ब्रजवासियों की घबराहट देख श्रीकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत की शरण में चलने को कहा और गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया। इस प्रकार पूरे सात दिन तक ब्रजवासी गोवर्धन के नीचे सुरक्षित रहे।
अंततः देवराज इन्द्र को हार माननी पड़ी और तब ब्रह्मा जी ने उन्हें श्रीकृष्ण अवतार का रहस्य बताया तो इन्द्र श्रीकृष्ण से अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करने लगे। श्रीकृष्ण ने तब गोवर्धन को अपनी उंगली से नीचे उतारते हुए ब्रजवासियों से हर वर्ष इसी दिन गोवर्धन की पूजा करने को कहा। माना जाता है कि तभी से प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को यह पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन गौ पूजन करने के पीछे धारणा यह है कि इससे व्यक्ति को भोग एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व जहां गोधन के महत्व को दर्शाता है, वहीं इसे इन्द्र का अहंकार नष्ट होने के रूप में भी देखा जाता है। प्राणीमात्र को इससे यही सीख मिलती है कि अहंकार मनुष्य को सदा नीचा दिखाता है।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (26 अक्टूबर 2022)
- मेष राशि :- मानसिक अशांति से कार्य में अवरोध होगा, आवास परिवर्तन से परेशानी होगी।
- वृष राशि :-अचल संपत्ति से लाभ होगा पर गृहस्थी की चिंता रहेगी, कार्य में सफलता मिलेगी।
- मिथुन राशि :-स्वयं के विवेक से किये गये कार्य में सफलता मिलेगी, दूसरों के कार्य से लाभ होगा।
- कर्क राशि :-परिवार एवं समाज का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, मुकदमों में हानि अवश्य हेवेगी।
- सिंह राशि :-गृह संपत्ति के निर्माण कार्य से सफलता मिलेगी, बिगड़े काम बनने का योग है।
- कन्या राशि:-प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी, राजनीति के क्षेत्र में उन्नति होगी।
- तुला राशि :- भागीदारी के कार्यो में सावधानी रखें लापरवाही करने से बचें, परेशानी से बचें।
- वृश्चिक राशि :- दैनिक कार्य में सावधानी रखें कोई नया कार्य प्रारंभ होने के आसार बनेंगे।
- धनु राशि :- वाहन, जमीन, जायजाद खरीदने में परेशानी होगी मतभेद बनेंगे, ध्यान रखें।
- मकर राशि :- कार्य योजना बनेगी, वाहन से सुख, नौकरी में लाभ व उन्नति होगी ।
- कुंभ राशि :- कार्य कुशलता से संतोष सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ेगी, तरक्की होगी।
- मीन राशि :- वाहन चलाने में सावधानी रखें, शारीरिक परेशानी तथा पीड़ा का आभाष होगा।















