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एक्सप्रेस-वे पर फिर मौत का तांडव, ट्रक में जा घुसी कार; चार लोगों की मौके पर मौत

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मंदसौर। दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेस-वे पर एक बेहद दर्दनाक और भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जिसमें हताहत हुए लोगों की पहचान पूरी तरह साफ हो गई है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सीतामऊ थाना क्षेत्र के अंतर्गत तितरोद के समीप हुए इस भयानक एक्सीडेंट ने चार हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजाड़ दीं। एक्सप्रेस-वे पर दौड़ रही एक अत्यधिक तेज रफ्तार कार अपने आगे चल रहे एक ट्रक में पीछे से बेहद ताकत के साथ जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वाहन में सवार चार व्यक्तियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

प्राप्त विवरण के अनुसार, इस वीभत्स हादसे के शिकार हुए सभी लोग महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) और उसके आस-पास के इलाकों के निवासी थे। मृतकों की पहचान सचिन गंगाधर, संदीप बोरसे, राजेंद्र कोवडे और रविंद्र काले के रूप में की गई है। वहीं, इस दुर्घटना में अब्दुल खलील और उमर जागीरदार गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नाजुक हालत में इलाज के लिए मंदसौर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

व्यापारिक काम से दिल्ली जा रहे थे कार सवार

हादसे के संबंध में बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी छह लोग औरंगाबाद से दिल्ली की तरफ जा रहे थे। उनका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के बाजारों से मोबाइल इक्विपमेंट और उससे संबंधित अन्य व्यापारिक सामग्रियां खरीदना था। यात्रा के दौरान जैसे ही उनकी कार सीतामऊ इलाके के तितरोद के पास पहुंची, तभी अचानक तेज रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और सीधे आगे चल रहे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराया। टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और उसमें बैठे लोग मलबे के बीच ही बुरी तरह फंस गए, जिन्हें बाद में काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

परिजनों के आने के बाद होगा शवों का पोस्टमार्टम

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद मृतकों के पास से मिले दस्तावेजों के आधार पर उनकी शिनाख्त की और महाराष्ट्र में रह रहे उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी है। शोक संतप्त परिजनों के गुरुवार देर रात या शुक्रवार की सुबह तक मंदसौर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों के यहां पहुंचने और उनके द्वारा पहचान की पुष्टि के बाद ही शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। फिलहाल चारों मृतकों के शवों को सुरक्षा के लिहाज से सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के शवगृह (मोर्चरी) में रखवाया गया है, वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम जिला अस्पताल में दोनों घायलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रही है।

तेज रफ्तार के कारण एक्सप्रेस-वे पर बढ़ीं दुर्घटनाएं

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हाल के दिनों में लगातार हो रहे इन बड़े सड़क हादसों ने एक बार फिर वाहनों की बेलगाम रफ्तार और एक्सप्रेस-वे पर सड़क सुरक्षा के इंतजामों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। स्थानीय थाना पुलिस ने इस दुर्घटना के संबंध में वैधानिक मामला दर्ज कर लिया है और तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के बयानों के मुताबिक, कार की अत्यधिक गति और चालक द्वारा अचानक संतुलन खो देना ही इस भीषण दुर्घटना की मुख्य वजह नजर आ रही है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन पूरे मामले पर पैनी नजर रखे हुए है और परिजनों के आगमन की प्रतीक्षा की जा रही है।

सहयोगियों के बीच उद्धव की चिंता, बोले- क्या हमारी एकता सिर्फ दिखावा है?

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मुंबई: महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को मजबूत करने के लिए शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। गठबंधन के भीतर एकजुटता बढ़ाने के इरादे से उन्होंने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ सीधे संवाद के लिए महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें की हैं। इस बैठक में उद्धव ठाकरे ने मौजूद नेताओं और विधायकों के सामने कुछ बेहद तीखे और आत्मनिरीक्षण करने वाले सवाल रखे। साथ ही राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर भी गहराई से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे नाजुक समय में बुलाई गई, जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों ने बगावत का रास्ता चुना है, जिसके कारण अब पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए एकजुट रहना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है।

उद्धव ठाकरे ने पूछा- क्या हम सच में एक हैं?

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने बेहद सीधे और साफ शब्दों में कहा, "हम बाहर यह तो कहते हैं कि हम महाविकास अघाड़ी के रूप में पूरी तरह एकजुट हैं, लेकिन क्या सचमुच हम दिल से एक हैं? अगर ऐसा है, तो आज से ही हमें मिलकर जमीनी स्तर पर काम करना होगा और अपनी इस एकता को बनाए रखना होगा।" ठाकरे के इस सवाल ने गठबंधन के नेताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद एमवीए के शीर्ष नेतृत्व ने सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) को एकजुट रहने का कड़ा संदेश दिया। नेताओं ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि जनता के असल मुद्दों को सिर्फ विधानसभा के अंदर ही नहीं, बल्कि सदन के बाहर सड़कों पर भी पूरी ताकत से उठाया जाना चाहिए।

बागी नेताओं को भूल भविष्य की रणनीति पर ध्यान

बैठक में यह रणनीति भी तय की गई कि जो सांसद या नेता पार्टी और गठबंधन का साथ छोड़कर जा चुके हैं, अब उनके बारे में सोचकर समय गंवाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बजाय, महाविकास अघाड़ी के नेतृत्व को बार-बार मिलकर आगे की नई नीतियां तय करनी चाहिए। इस बात को भी रेखांकित किया गया कि विधानसभा के भीतर और बाहर सभी विधायकों को बेहतर तालमेल (समन्वय) के साथ एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर जनता के बीच विपक्ष का भरोसा मजबूत हो सके। इस अहम बैठक में एमवीए के कुल 60 विधायक और 36 एमएलसी शामिल हुए, जो इस गठबंधन की मजबूत मौजूदगी को दिखाता है।

सांसदों की बगावत के बाद बढ़ी चिंता

महाविकास अघाड़ी महाराष्ट्र विधानसभा का मुख्य विपक्षी मोर्चा है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) के साथ-साथ कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं। दरअसल, हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदल लिया था, जिनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल के नाम शामिल हैं। इन सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद से ही उद्धव ठाकरे की चिंताएं बढ़ गई हैं, यही वजह है कि वे अब पूरे कुनबे को एकजुट रखने और अपनी संगठनात्मक ताकत को दोबारा हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश में जुट गए हैं।

परमाणु कार्यक्रम पर ईरान अड़ा, बोला- समझौते के बाद ही मिलेगी निरीक्षण की अनुमति

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तेहरान: ईरान के परमाणु संयंत्रों की जांच संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी करेगी या नहीं, इसे लेकर वैश्विक स्तर पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। तमाम दावों के बीच ईरान ने एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को उसके परमाणु स्थलों (न्यूक्लियर साइट्स) पर जाने की इजाजत केवल अमेरिका के साथ एक अंतिम और पूर्ण समझौता होने के बाद ही दी जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए अपनी बात रखी है।

प्रतिबंध हटने पर ही मिलेगी परमाणु स्थलों तक पहुंच

ईरान के उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि यूएन निरीक्षकों की पहुंच और परमाणु सामग्री से जुड़े सभी मुद्दों को केवल अंतिम समझौते के दायरे में ही सुलझाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष (अमेरिका और उसके सहयोगी) ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए कितने व्यावहारिक और ठोस कदम उठाता है। गरीबाबादी ने यह भी खुलासा किया कि स्विट्जरलैंड में हुई हालिया बातचीत के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी के अनुरोध के बावजूद ईरान के किसी भी अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की।

राफेल ग्रोसी और अमेरिका के दावों पर ईरान का पलटवार

दूसरी तरफ, टोक्यो में मौजूद आईएईए (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने दृढ़ता से कहा है कि ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण हर हाल में होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि यह जांच आज हो, परसों हो, एक हफ्ते या दस दिनों में हो—यह अलग बात है, लेकिन यह निश्चित रूप से होगी। इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी दावा किया था कि ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स पर आईएईए के निरीक्षकों को वापस बुलाने के लिए राजी हो गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि ग्रोसी के साथ उनकी कोई बैठक नहीं हुई है और न ही निरीक्षण के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है।

साल 2025 के संघर्ष के बाद से लगी है पाबंदी

दरअसल, जून 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से ही तेहरान (ईरान) ने आईएईए को अपने उन यूरेनियम संवर्धन स्थलों (एनरिचमेंट साइट्स) की जांच करने से पूरी तरह रोक दिया था, जहां माना जाता है कि उसने बहुत बड़े पैमाने पर उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम इकट्ठा कर लिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सामग्री से ईरान चाहे तो करीब 10 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। हालांकि, इन आरोपों के बीच ईरान लंबे समय से दुनिया के सामने यही दावा करता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है।

भाजपा संगठन में बड़ा फैसला, अंबेडकरनगर के अवधेश द्विवेदी को मिला प्रमुख पद

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अंबेडकरनगर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक लंबे इंतजार के बाद बृहस्पतिवार को अपने प्रांतीय संगठन के नए पदाधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी है। भाजपा संगठन की इस नई टीम के सामने आते ही अंबेडकरनगर जिले के सियासी गलियारों में लंबे वक्त से महसूस की जा रही एक बड़ी कमी और खालीपन दूर हो गया है। पार्टी हाईकमान ने क्षेत्र के कद्दावर नेता और कटेहरी विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी रह चुके अवधेश द्विवेदी पर बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें अवध क्षेत्र का नया क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है।

मूल रूप से भीटी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले दुबाने का पूरा गांव के निवासी अवधेश द्विवेदी का मुख्य राजनीतिक आधार हमेशा से कटेहरी विधानसभा क्षेत्र ही रहा है। उनके पिता स्वर्गीय जमुना प्रसाद द्विवेदी पैसे से एक शिक्षक थे। अवधेश ने अपने छात्र जीवन के दिनों से ही राजनीति की बारीकियों को समझना और सीखना शुरू कर दिया था। पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर चुनावी राजनीति से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों में बेहद सक्रिय और अग्रिम भूमिका निभाई है।

चुनावी राजनीति का सफर और पुरानी यादें

अवधेश द्विवेदी ने साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद, साल 2022 के आम चुनाव में उन्होंने एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की सहयोगी पार्टी 'निषाद पार्टी' के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया था। इन दोनों ही चुनावों के दौरान उन्होंने क्षेत्र के वोटरों के बीच अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान स्थापित की।

उपचुनाव में टिकट कटने के बाद भी रहे वफादार

कटेहरी विधानसभा सीट पर हुए हालिया उपचुनाव के दौरान जब अवधेश द्विवेदी को पार्टी की तरफ से उम्मीदवार नहीं बनाया गया, तो स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें और कयास लगाए जाने लगे थे। उस समय टिकट न मिलने से उनके समर्थकों में भी काफी रोष और नाराजगी देखने को मिली थी। हालांकि, इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अवधेश द्विवेदी ने धैर्य नहीं खोया और वे पूरी निष्ठा के साथ भाजपा संगठन से जुड़े रहे तथा पार्टी के प्रत्येक कार्यों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाते रहे।

संगठन के प्रति निष्ठा का मिला बड़ा इनाम

पार्टी के प्रति उनकी इसी निरंतर वफादारी, समर्पण और अथक परिश्रम को देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें अवध जैसे बेहद महत्वपूर्ण और बड़े क्षेत्र की कमान सौंपने का फैसला किया है। इस बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी के मिलने के बाद क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी इस नियुक्ति से आने वाले समय में अवध क्षेत्र में पार्टी का सांगठनिक ढांचा पहले से कहीं अधिक मजबूत और एकजुट होकर उभरेगा।

कर्नाटक से पकड़ा गया सहारनपुर का युवक, राम मंदिर को लेकर साजिश रचने का आरोप

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सहारनपुर। अयोध्या के भव्य राम मंदिर को निशाना बनाने की एक कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने एक संयुक्त कार्रवाई की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने सहारनपुर जिले के गंगोह क्षेत्र के रहने वाले मोहम्मद सुहैल को कर्नाटक से गिरफ्तार किया है। इस बड़ी गिरफ्तारी की भनक लगते ही पूरे गंगोह नगर में दिनभर तरह-तरह की चर्चाओं और अफवाहों का बाजार गर्म रहा, जबकि आरोपी के घर पर इस खबर के बाद से गहरा सन्नाटा और मायूसी पसरी हुई है।

आरोपी के पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद सुहैल अपने बड़े भाई सुएब के साथ पेंटिंग और रंगाई-पुताई का काम करता था। बीते ६ जून को दोनों भाई आजीविका कमाने के उद्देश्य से एक स्थानीय ठेकेदार के जरिए काम करने के लिए कर्नाटक रवाना हुए थे। इसी दौरान वहां सक्रिय केंद्रीय जांच एजेंसियों ने सुहैल को अपनी कस्टडी में ले लिया, जिसकी भनक परिवार को काफी बाद में लगी।

दो दशक पहले लखनौती से गंगोह आया था परिवार

मोहम्मद सुहैल का परिवार मूल रूप से लखनौती इलाके का निवासी है, जो तकरीबन २० वर्ष पहले अपना पैतृक स्थान छोड़कर गंगोह में आकर बस गया था। वर्तमान समय में यह परिवार मोहल्ला कोटला में एक किराए के मकान में अपना गुजर-बसर कर रहा है, और पूरे घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से मजदूरी और छोटे-मोटे दैनिक कार्यों पर टिकी है। सुहैल के पिता लियाकत ने बताया कि उनकी पांच बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि उनका सबसे बड़ा बेटा सऊदी अरब में ड्राइविंग करता है और एक अन्य बेटा दिल्ली में कपड़ों के व्यापार से जुड़ा है; सुहैल उनके नौ बच्चों में सबसे छोटा है।

परिजनों ने दावों से जताई पूरी अनभिज्ञता

इस चौंकाने वाली गिरफ्तारी के बाद सुहैल के पिता और अन्य परिजनों का कहना है कि वे अपने बेटे की किसी भी तरह की कथित गैर-कानूनी या संदिग्ध गतिविधियों से पूरी तरह अनजान थे। परिवार का निरंतर यही दावा है कि सुहैल का किसी भी संगठन से कोई वास्ता नहीं है और वह केवल सीधे तरीके से अपनी मजदूरी व पुताई के काम में लगा रहता था। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इतनी बड़ी धारा और मामले में उसकी संलिप्तता की खबर पाकर पूरा परिवार गहरे सदमे और आश्चर्य में है।

डिजिटल फुटप्रिंट्स और ऑनलाइन संपर्कों की खंगाली जा रही कुंडली

फिलहाल एनआईए और एटीएस की संयुक्त विंग सुहैल के पास से बरामद मोबाइल फोन, उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों, ऑनलाइन चैट्स और देश के विभिन्न राज्यों में फैले उसके संभावित नेटवर्क की बारीकी से पड़ताल कर रही है। सूत्रों के हवाले से यह भी संकेत मिले हैं कि उसके कुछ कथित विदेशी संपर्कों और संदिग्ध इंटरनेट समूहों से जुड़ाव की भी जांच की जा रही है, हालांकि इन सभी गंभीर संवेदनशील पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सार्वजनिक हो सकेगी। इस बीच, मोहल्ला कोटला में स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले की सच्चाई और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

DAP की अवैध ढुलाई का भंडाफोड़, गरियाबंद में 280 बोरी खाद समेत वाहन जब्त

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अवैध खाद व्यापार और उसकी तस्करी के विरुद्ध पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुस्तैदी से की गई इस कार्रवाई के दौरान डीएपी खाद की बोरियों से भरे एक मेटाडोर वाहन को पकड़ा गया है। पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर उसमें लदी 280 बोरी रासायनिक खाद जब्त की है, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 3.50 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अग्रिम वैधानिक जांच शुरू कर दी है।

यह सफलता उस समय मिली जब देवभोग थाना पुलिस की टीम रात्रि के समय क्षेत्र में गश्त पर तैनात थी। इसी दौरान एक संदिग्ध मेटाडोर आता दिखाई दिया, जिसे रोककर जब उसकी बारीकी से तलाशी ली गई, तो उसमें भारी मात्रा में डीएपी खाद भरी पाई गई। वाहन चालक से जब इस खाद के परिवहन से जुड़े वैध कागजात और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल वाहन और उस पर लदे माल को जब्त कर लिया।

ओडिशा से छत्तीसगढ़ पहुंचाई जा रही थी अवैध खेप

पकड़े गए वाहन चालक से जब पुलिस टीम ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। चालक ने बताया कि वह महज 8 हजार रुपये के तय किराए पर खाद की इस बड़ी खेप को गंतव्य तक ले जा रहा था। उसके बयान के अनुसार, यह पूरी खेप उरमाल क्षेत्र के एक लाइसेंसधारी खाद व्यापारी के निर्देश पर पड़ोसी राज्य ओडिशा के सीनापाली इलाके से लोड की गई थी। इस अवैध माल को जांगड़ा नामक स्थान पर पहुंचाया जाना था, जहां इसे एक मक्का कारोबारी को सुपुर्द करने की योजना थी।

आगे की जांच के लिए कृषि विभाग को सौंपा माल

प्रारंभिक पुलिसिया कार्रवाई और जब्ती का पंचनामा तैयार करने के बाद देवभोग थाना पुलिस ने बरामद की गई सभी 280 बोरी डीएपी खाद को आगे की कानूनी और वैधानिक प्रक्रिया के लिए स्थानीय कृषि विभाग की टीम को सौंप दिया है। कृषि विभाग के अधिकारी अब इस बात की गहनता से पड़ताल करेंगे कि इस खाद का मुख्य स्रोत क्या था, इसके परिवहन के लिए क्या नियम तय किए गए थे और इस पूरे सिंडिकेट में शामिल दोनों राज्यों के संबंधित व्यापारियों की वास्तविक भूमिका क्या है।

अंतरराष्ट्रीय किल्लत के बीच कालाबाजारी का खेल

विभागीय सूत्रों और बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक उत्पादन में आई भारी गिरावट के चलते रासायनिक खादों की सामान्य उपलब्धता काफी प्रभावित हुई है। इसी संकट का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व और लालची व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में खाद की अवैध जमाखोरी, परिवहन और कालाबाजारी के खेल में लिप्त हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि पुलिस की इस मुस्तैदी से क्षेत्र में खाद की ब्लैक मार्केटिंग पर काफी हद तक लगाम लगेगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब कर उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ट्रंप की सलाह पर नाटो का पलटवार, बैठक में हुआ तीखा जवाब

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वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान उम्मीद के मुताबिक पूरा साथ न मिलने पर अपने ही नाटो (NATO) सहयोगी देशों के प्रति गहरी नाराजगी जताई है। व्हाइट हाउस में नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि भले ही अमेरिका को ईरान के खिलाफ किसी की सीधी मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन वह अपने साथियों से कम से कम वफादारी और नैतिक समर्थन की उम्मीद तो कर ही रहा था। ट्रंप ने तल्ख अंदाज में कहा, "हमने ईरान को पहले ही हफ्ते में पूरी तरह तबाह कर दिया था। हमें किसी की मदद नहीं चाहिए थी, लेकिन अगर हमारे सहयोगी देश संकट के समय यह कहते कि 'हम आपके साथ हैं', तो अच्छा लगता।" जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ दिया, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, "नहीं।"

नाटो प्रमुख ने किया बचाव, विमानों की उड़ानों का दिया हवाला

डोनाल्ड ट्रंप के इन तीखे आरोपों के बाद नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यूरोपीय देशों का खुलकर बचाव किया। उन्होंने ट्रंप के सामने ही स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ छह हफ्तों तक चले लंबे सैन्य अभियान के दौरान यूरोप ने अमेरिका का पूरा साथ दिया था। रुटे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस जंग के दौरान यूरोप के अलग-अलग सैन्य ठिकानों से अमेरिका के करीब 4,000 से 5,000 लड़ाकू विमानों ने लगातार उड़ानें भरी थीं। उन्होंने उदाहरण दिया कि रोमानिया के बुखारेस्ट हवाई अड्डे को तो आम जनता के लिए कुछ समय तक बंद रखना पड़ा था, ताकि अमेरिकी सैन्य विमान वहां से बिना किसी रुकावट के उड़ान भर सकें। रुटे ने कहा कि एकाध घटनाओं को छोड़कर पूरा यूरोप अमेरिका के साथ मुस्तैदी से खड़ा रहा।

यूरोपीय देशों को ट्रंप की दोटूक- 'मुफ्त की सवारी' नहीं चलेगी

इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोप के कई बड़े देशों का नाम लेकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, "स्पेन का रवैया पूरी तरह निराशाजनक रहा। मैं इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से भी बेहद निराश हूं। ज्यादातर देश रक्षा के नाम पर कुछ भी खर्च करना नहीं चाहते। उन्हें लगता है कि अमेरिका हमेशा उनकी रक्षा करता रहेगा और उन्हें मुफ्त की सवारी (फ्री राइड) मिलती रहेगी।" ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिका के हजारों सैनिक यूरोप की सुरक्षा में तैनात हैं, जिसमें अकेले जर्मनी में ही करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका को सहयोगियों के पैसे की नहीं बल्कि उनकी वफादारी की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, हमें सिर्फ वफादारी चाहिए। हम हमेशा उनके लिए लड़ते हैं, लेकिन बदले में थोड़ा समर्थन भी नहीं मिलता।"

दबाव के बाद यूरोप ने बढ़ाया रक्षा बजट

तनावपूर्ण बहस के बीच नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यह भी दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बनाए गए दबाव का ही असर है कि यूरोप और कनाडा ने अपने रक्षा खर्च में करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को भी अरबों डॉलर के नए हथियारों के ऑर्डर दिए गए हैं। रुटे के मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि सहयोगी देशों ने रक्षा के क्षेत्र में अपना बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बहरहाल, व्हाइट हाउस की इस बैठक ने अमेरिकी विदेश नीति और नाटो देशों के आपसी रिश्तों में चल रही खींचतान को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।

तारातला त्रासदी में बढ़ा मौतों का आंकड़ा, पुलिस ने गोदाम मालिक सहित पांच को दबोचा

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के तारातला क्षेत्र में एक निर्माणाधीन गोदाम के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया है, जिसमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गोदाम के मालिक शंभूनाथ बेहरा समेत पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में खुद संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। गोदाम मालिक बेहरा को बुधवार देर रात तारातला के ही एक आवासीय परिसर से पकड़ा गया। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में स्ट्रक्चरल इंजीनियर कमल सामंत, सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार, लेबर सप्लायर मोहम्मद अताउल और सुभाष सरकार शामिल हैं। इससे पहले पुलिस ने सुपरवाइजर समेत करीब नौ लोगों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की थी।

मलबे से निकाले गए 28 लोग, अस्पताल में इलाज जारी

यह भयानक हादसा दोपहर के समय हुआ, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के वक्त वहां काम कर रहे करीब 40 मजदूर लोहे के भारी ढांचों और कंक्रीट के मलबे के नीचे दब गए। राहत और बचाव कार्य के दौरान अब तक मलबे से 28 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से आठ मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे में घायल हुए 20 अन्य मजदूरों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से दो की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। जान गंवाने वाले मजदूरों में से चार नदिया जिले के और एक उत्तर 24 परगना के भाटपाड़ा का रहने वाला था, जबकि बाकी मृतकों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

सेना और एनडीआरएफ का संयुक्त बचाव अभियान

घटनास्थल पर अभी भी युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है क्योंकि मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका है। शुरुआत में स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने मोर्चा संभाला, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के अनुरोध पर सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवान भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए हैं। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए हाइड्रोलिक क्रेनों की मदद ली जा रही है। साथ ही गैस कटर से भारी लोहे की बीम और धातुओं के ढांचों को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है।

जांच के लिए एसआईटी का गठन और जमीन का विवाद

इस पूरे हादसे की गहराई से जांच करने के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त, मर्डर ब्रांच के प्रभारी अधिकारी, जासूसी विभाग के चार अधिकारी और तारातला थाने के दो सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो जासूसी विभाग के उपायुक्त की निगरानी में काम करेंगे। कोलकाता नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस जमीन पर यह गोदाम बन रहा था, वह पोर्ट अथॉरिटी की है। इस जमीन को अगस्त 2024 में 30 साल के लिए 'बेहरा ब्रदर्स' नाम की कंपनी को लीज पर दिया गया था, जो चाय के स्टोरेज और पैकेजिंग का काम करती है। इसी कंपनी के मालिक शंभूनाथ बेहरा के जिम्मे इस कंस्ट्रक्शन के काम की देखरेख थी, जिसके गिरने से यह बड़ा हादसा हुआ।

AC में विस्फोट बना जानलेवा, रायगढ़ में आग की चपेट में आया घर, एक की मौत

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर के अंतर्गत आने वाली आईटीआई कॉलोनी में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक रिहायशी मकान में लगे एयर कंडीशनर (एसी) में भीषण विस्फोट होने से आग लग गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में एक अधेड़ व्यक्ति की झुलसने और दम घुटने के कारण जान चली गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से जख्मी हो गया है। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग सहम गए और तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए। मकान से धुआं और आग की लपटें उठती देख स्थानीय नागरिकों ने फौरन आपातकालीन सेवा डायल-112 और स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी।

घटना की सूचना मिलते ही चक्रधर नगर थाना पुलिस और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण पुलिस और स्थानीय निवासियों ने मिलकर उसे कड़े प्रयास के बाद तोड़ा। इसके बाद मुस्तैदी दिखाते हुए घर के भीतर फंसे दो लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया और तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया।

हादसे में पिता की मौत और पुत्र की हालत नाजुक

इस भीषण अग्निकांड के वक्त घर के भीतर पुरुषोत्तम पटेल और उनका बेटा आर्यन पटेल मौजूद थे। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद पुरुषोत्तम पटेल को मृत घोषित कर दिया, जबकि उनके बेटे आर्यन की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में इलाज किया जा रहा है। एसी में हुए इस जोरदार धमाके के बाद फैली आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे मकान के भीतर रखा गृहस्थी का सारा कीमती सामान और आंगन में खड़ी मोटरसाइकिल जलकर पूरी तरह राख हो गई।

विंडो एसी के कंप्रेसर में ब्लास्ट होने से हुआ हादसा

दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद चक्रधर नगर थाना पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने दुर्घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तकनीकी जांच से यह संकेत मिले हैं कि कमरे में लगे विंडो एयर कंडीशनर के कंप्रेसर में अत्यधिक दबाव या तकनीकी खराबी के कारण ब्लास्ट हुआ था। चूंकि वह कमरा आकार में काफी छोटा था और पूरी तरह बंद था, इसलिए विस्फोट के बाद निकलने वाला जहरीला धुआं तेजी से पूरे कमरे में फैल गया और पीड़ितों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच जारी

पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले में मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी के अनुसार, फॉरेंसिक टीम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही ब्लास्ट के सटीक और वास्तविक कारणों का पूरी तरह से खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस टीम आसपास के लोगों के बयान दर्ज कर रही है और हादसे के शिकार हुए परिवार को हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

Women’s T20 World Cup: सेमीफाइनल के लिए जबरदस्त मुकाबला, जानिए क्यों मुश्किल में है भारत

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दुबई। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 जैसे-जैसे अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, अंतिम चार यानी सेमीफाइनल में जगह बनाने की जंग बेहद रोमांचक हो गई है। टूर्नामेंट के शुरुआती 22 मैचों के बाद अब तक केवल इंग्लैंड ही एकमात्र ऐसी टीम बनी है जिसने आधिकारिक तौर पर सेमीफाइनल का टिकट कटाया है। ग्रुप-बी से इंग्लैंड के क्वालिफाई करने के बाद वहां सिर्फ एक स्थान बचा है, जिसके लिए वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। दूसरी ओर, ग्रुप-ए का समीकरण पूरी तरह उलझा हुआ है और वहां ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के रूप में चार टीमें सेमीफाइनल की रेस में मजबूती से डटी हुई हैं।

मैनचेस्टर में खेले गए एक बेहद अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के हाथों भारत को मिली छह विकेट की शिकस्त ने ग्रुप-ए के पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया है। इस मैच में भारतीय टीम ने 158/7 का स्कोर खड़ा किया था, जिसे दक्षिण अफ्रीकी टीम ने सफलतापूर्वक हासिल कर अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा। इस हार के बाद भारतीय टीम की राह कठिन हो गई है और अब प्रत्येक मुकाबला नॉकआउट की तरह हो गया है। इस ग्रुप से पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और आयरलैंड जैसी टीमें पहले ही खिताबी दौड़ से बाहर हो चुकी हैं।

ग्रुप-ए का अंक तालिका हाल और भारत के लिए क्वालीफिकेशन की राह

ग्रुप-ए में फिलहाल ऑस्ट्रेलिया 4 मैचों में 4 जीत और +4.724 के नेट रन रेट के साथ शीर्ष पर काबिज है। भारत 3 मैचों में 2 जीत और +2.511 के बेहतरीन रन रेट के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश भी क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर बने हुए हैं। भारतीय टीम को अपना अगला मैच बांग्लादेश और अंतिम ग्रुप मैच ताकतवर ऑस्ट्रेलिया से खेलना है। भारत के लिए सेमीफाइनल में पहुंचने के तीन प्रमुख रास्ते हैं:

  • समीकरण 1: यदि भारत अपने दोनों आगामी मैचों में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया को पराजित कर देता है, तो उसके 8 अंक हो जाएंगे। इस स्थिति में उसे दक्षिण अफ्रीका या ऑस्ट्रेलिया में से किसी एक की हार की दुआ करनी होगी, जो भारत के लिए सबसे मुफीद स्थिति होगी।

  • समीकरण 2: यदि भारतीय टीम बांग्लादेश को हरा देती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार जाती है, तो उसके 6 अंक रहेंगे। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका को अपने बचे दो मैचों में से एक मैच हारना अनिवार्य होगा और फिर फैसला नेट रन रेट पर होगा।

  • समीकरण 3: यदि भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका तीनों ही अपने-अपने मैच जीतकर 8-8 अंकों पर आ जाते हैं, तो सेमीफाइनल की दो टीमों का फैसला नेट रन रेट के आधार पर होगा। भारत का मौजूदा रन रेट दक्षिण अफ्रीका से काफी बेहतर है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के आगामी मैच अपेक्षाकृत कमजोर टीमों से हैं, जो भारत की राह मुश्किल बनाता है।

ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के समीकरण

ऑस्ट्रेलिया के लिए स्थिति सबसे अनुकूल है, उसे केवल भारत को हराना है जिससे उसके 10 अंक हो जाएंगे और वह टेबल टॉपर के रूप में सीधे क्वालिफाई कर जाएगी। दक्षिण अफ्रीका के लिए रास्ता तब आसान होगा जब वह नीदरलैंड्स और बांग्लादेश के खिलाफ अपने दोनों मैच जीत जाए और ऑस्ट्रेलिया भारत को हरा दे; ऐसी स्थिति में दक्षिण अफ्रीका 8 अंकों के साथ सीधे आगे बढ़ जाएगा। वहीं, बांग्लादेश की टीम भी अभी रेस में बनी हुई है। यदि बांग्लादेश अपने दोनों मैचों में भारत और दक्षिण अफ्रीका को हरा देता है, तो वह बिना किसी अन्य समीकरण के सेमीफाइनल में पहुंच सकता है। यदि वह भारत को हराता है और दक्षिण अफ्रीका से हार जाता है, तो भी वह अन्य मैचों के नतीजों और नेट रन रेट के भरोसे तकनीकी रूप से रेस में बना रहेगा।

ग्रुप-बी का गणित और वेस्टइंडीज की मजबूत दावेदारी

ग्रुप-बी की बात करें तो इंग्लैंड 8 अंकों के साथ पहले ही सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर चुका है। स्कॉटलैंड और आयरलैंड की टीमें बाहर हो चुकी हैं। अब दूसरे स्थान के लिए वेस्टइंडीज (6 अंक), न्यूजीलैंड (4 अंक) और श्रीलंका (4 अंक) के बीच सीधी टक्कर है। वेस्टइंडीज का समीकरण सबसे सीधा है; यदि वह अपने आखिरी मैच में आयरलैंड को हरा देती है, तो वह 8 अंकों के साथ सीधे अंतिम चार में पहुंच जाएगी और न्यूजीलैंड व श्रीलंका की उम्मीदें तत्काल समाप्त हो जाएंगी। यदि वेस्टइंडीज हारती है, तभी न्यूजीलैंड और श्रीलंका के लिए दरवाजे खुलेंगे। हालांकि, श्रीलंका का नेट रन रेट (-0.973) सबसे खराब है, जिसके कारण उसे स्कॉटलैंड पर एक बहुत बड़ी जीत की दरकार होगी और साथ ही वेस्टइंडीज की बड़ी हार की दुआ करनी होगी। डिफेंडिंग चैंपियन न्यूजीलैंड को भी इंग्लैंड को हर हाल में हराना होगा और वेस्टइंडीज की हार पर निर्भर रहना होगा।

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