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छत्तीसगढ़ में GST घोटाले का खुलासा! 76 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग मामले में बड़ी कार्रवाई

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) द्वारा कर चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग ने राजनांदगांव की व्यावसायिक इकाई मैसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक के संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। आधिकारिक जांच में यह बात सामने आई है कि उक्त फर्म ने पिछले छह महीनों के भीतर लगभग 76 करोड़ रुपये का ऐसा लेन-देन दिखाया जो वास्तव में हुआ ही नहीं था और वह केवल कागजों तक सीमित था। उपलब्ध दस्तावेजों और जीएसटी रिटर्न की बारीकी से जांच करने पर 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है, जिसके जरिए सरकारी राजस्व को भारी चपत लगाने की कोशिश की गई।

शुरुआती पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी की फर्म ने पश्चिम बंगाल की कई संदेहास्पद कंपनियों से लोहे और स्टील (आयरन एवं स्टील) की कोई वास्तविक खरीदारी नहीं की थी। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के फर्जी बिल हासिल किए गए और उन बोगस बिलों के दम पर गलत तरीके से आईटीसी का फायदा उठाया गया। इतना ही नहीं, इस अवैध टैक्स क्रेडिट के लाभ को आगे अन्य करदाताओं को भी ट्रांसफर कर दिया गया।

कागजी बिलिंग और बोगस नेटवर्क का पर्दाफाश

जीएसटी विभाग की जांच टीम ने जब माल सप्लाई करने वाली इन कंपनियों के रिकॉर्ड खंगाले, तो पता चला कि इनमें से अधिकांश फर्मों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द किए जा चुके हैं। इन कंपनियों द्वारा धरातल पर किसी भी प्रकार का वास्तविक व्यापार किए जाने का कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा है। कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला पूरी तरह से 'पेपर ट्रेडिंग' यानी सिर्फ कागजों पर बिलों की हेराफेरी करने और बोगस आईटीसी नेटवर्क का हिस्सा है।

फर्जीवाड़ा करने के लिए खड़ी की गईं फर्जी कंपनियां

विभागीय कार्रवाई में यह भी साफ हुआ है कि जिन सप्लायर कंपनियों से माल खरीदना दिखाया गया था, उनमें से कई का गठन ही सिर्फ फर्जी बिल काटने और अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट मुहैया कराने के लिए किया गया था। जांच के दौरान मिले तथ्य और सबूत इशारा करते हैं कि माल का कोई वास्तविक परिवहन या आवागमन नहीं हुआ था, बल्कि केवल बिलों के लेन-देन के जरिए टैक्स बचाने का एक सोची-समझी साजिश के तहत ताना-बाना बुना गया था।

बैंक खातों और परिवहन दस्तावेजों की गहन जांच

इस बड़े टैक्स घोटाले में पर्याप्त और ठोस सबूत मिलने के बाद ही राज्य कर विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश्वर चौरड़िया को हिरासत में लिया है। इस पूरे सिंडिकेट की विस्तृत जांच अभी भी की जा रही है। शुरुआती पूछताछ और छानबीन से संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कई और रसूखदार लोग तथा अन्य कारोबारी फर्में जुड़ी हो सकती हैं। विभाग अब संदिग्धों के बैंक खातों, ई-वे बिल, माल ढुलाई से जुड़े परिवहन दस्तावेजों के साथ-साथ इस खेल में शामिल अन्य व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रहा है।

जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस फर्जी बिलिंग रैकेट की कड़ियां जोड़ने पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। विभाग ने साफ किया है कि देश के ईमानदार टैक्सपेयर्स के हितों की सुरक्षा के लिए बोगस आईटीसी और फर्जी बिलिंग जैसे अवैध कामों में लिप्त तत्वों के खिलाफ इस तरह की सख्त और दंडात्मक कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

‘तुम्हें पता नहीं हम कौन हैं’! सूरजपुर में BJP नेता और तहसीलदार के बीच तीखी नोकझोंक

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सूरजपुर। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद का एक नया मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से सामने आया है। यहां जमीन विवाद के एक मामले में कार्रवाई करने पहुंचे तहसीलदार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता द्वारा खुलेआम धमकी देने और अपनी ताकत दिखाने की बात कही गई। इस पूरी घटना का घटनाक्रम अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह पूरा विवाद सूरजपुर के रहने वाले कुंजबिहारी साहू और अग्रवाल परिवार के बीच चल रहे पुराने जमीनी विवाद से जुड़ा है। खसरा नंबर 2170 और 2171 की करीब 13 डिसमिल जमीन पर कांग्रेस के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालचंद अग्रवाल, विमला अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल और रामू अग्रवाल का लंबे समय से कब्जा था। साल 1994 से कोर्ट में चल रहे इस मुकदमे में आखिरकार हाई कोर्ट ने कुंजबिहारी साहू के पक्ष में फैसला सुनाया।

अदालत के आदेश पर कार्रवाई करने पहुंची थी टीम

उच्च न्यायालय द्वारा जमीन का मालिकाना हक मूल मालिक को सौंपने का आदेश (डिक्री) जारी किए जाने के बाद, सूरजपुर के तहसीलदार सूर्यकांत साय राजस्व विभाग की टीम के साथ जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंचे थे। कानूनी प्रक्रिया के तहत जब टीम वहां जमीन की सुपुर्दगी की कार्रवाई कर रही थी, तभी वहां मौजूद कब्जाधारी परिवार और बीजेपी नेता के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की तीखी बहस शुरू हो गई।

बीजेपी नेता और तहसीलदार के बीच तीखी बहस

कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लालचंद अग्रवाल के भतीजे और बीजेपी के पूर्व जिला महामंत्री राजेश महलवाला ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने तहसीलदार को निशाने पर लेते हुए कहा कि आप अभी हमें पहचानते नहीं हैं और न ही हमारी ताकत के बारे में जानते हैं। उन्होंने अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ताकत दिखानी पड़ी तो हम वह भी दिखा देंगे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई धमकी

बीजेपी नेता ने अधिकारी के बात करने के लहजे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आप हमारे बुजुर्गों से इस तरह बात नहीं कर रहे हैं और हमें पीछे हटने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि देखते हैं किसने मां का दूध पिया है जो यहां आकर कब्जा लेकर दिखाए। इस पर तहसीलदार सूर्यकांत साय ने संयम बरतते हुए जवाब दिया कि वे पूरी शालीनता से और नियमों के तहत ही बात कर रहे हैं। इस पूरी गहमागहमी का वीडियो अब इंटरनेट पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है।

नौकरी दिलाने का झांसा, करोड़ों रुपए हड़पने वाली प्रमिला का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

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भोपाल। सरकारी नौकरी और अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की जालसाजी करने वाली शातिर महिला प्रवीण उर्फ प्रमिला तिवारी के फर्जीवाड़े की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। भोपाल पुलिस की गिरफ्त में आई प्रमिला ने न सिर्फ आवास योजना बल्कि देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है।

अटल आवास योजना से लेकर कई सरकारी विभागों में ठगी

पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रमिला ने अपने गिरोह के साथ मिलकर केवल फ्लैट के नाम पर ही नहीं, बल्कि वन विभाग, रेलवे, एसबीआई (SBI), पीडब्ल्यूडी (PWD), एम्स (AIIMS) और नगर निगम जैसे बड़े विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने इन विभागों के फर्जी नियुक्ति पत्र (जॉइनिंग लेटर) तैयार कर भोपाल, रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना के युवाओं से लाखों रुपए हड़प लिए।

PWD मंत्री के जाली हस्ताक्षर से दिया झांसा

जालसाजी का स्तर इतना बड़ा था कि रीवा के राकेश दुबे की बेटी से 5 लाख रुपए लेकर उन्हें पीडब्ल्यूडी मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर वाला नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया। इसी तरह बैतूल की राधा और सतना के रविशंकर शर्मा को भी अलग-अलग विभागों के जाली दस्तावेज देकर लाखों की ठगी की गई।

जबलपुर और भोपाल के युवा भी बने शिकार

गिरोह ने जबलपुर के हिमांशु और प्रियांशु को फर्जी पत्र थमाकर मोटी रकम वसूली। भोपाल के नवीन सौंधिया को तो वन विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र देकर 1997 बैच का आईएफएस (IFS) अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक तक दर्शा दिया गया। वहीं, राजीव विश्वकर्मा नाम के युवक को एसबीआई में क्लर्क की नौकरी का झांसा दिया गया था।

भरोसा जीतने के लिए सरकारी दफ्तरों के बाहर मुलाकात

युवाओं को जरा भी शक न हो, इसके लिए यह गिरोह बेहद शातिर तरीका अपनाता था। प्रमिला और उसके साथी युवाओं को सरकारी दफ्तरों के बाहर बुलाते थे। वहां पहले से मौजूद गिरोह के अन्य सदस्य खुद को उसी विभाग का कर्मचारी बताकर पीड़ितों का भरोसा जीतते थे।

फर्जी सर्वे कराकर डेढ़ महीने तक उलझाए रखा

करोंद निवासी राहुल विश्वकर्मा और नवीन सौंधिया से नगर निगम में नौकरी के नाम पर पैसे ऐंठने के बाद, उन्हें असली जैसा अहसास कराने के लिए डेढ़ महीने तक बाकायदा सर्वे के काम पर भी लगाया गया। पुलिस के मुताबिक, प्रमिला के पास युवाओं का शैक्षणिक रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर पहले से होते थे, जिसका फायदा उठाकर वह उन्हें लालच देती थी।

शिकायत के बाद टीटीनगर पुलिस ने की गिरफ्तारी

इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब कोटरा सुल्तानाबाद के रहने वाले प्रतीक सोनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्रतीक को टीटीनगर स्थित अटल आवास योजना में 22 लाख का फ्लैट दिलाने का झांसा देकर प्रमिला ने 1.80 लाख रुपए एडवांस ले लिए थे। बदले में जो रसीदें और कागज दिए गए, वे जांच में फर्जी पाए गए। इसके बाद टीटीनगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 जून को प्रमिला को गिरफ्तार कर लिया।

डीएसपी के घर चोरी के आरोपों से भी जुड़ा है विवाद

पकड़ी गई आरोपी प्रमिला तिवारी का पुराना विवादों से भी नाता रहा है। वह इससे पहले एक डीएसपी कल्पना रघुवंशी के घर में घुसकर चोरी करने का आरोप लगाकर भी काफी चर्चा में आ चुकी है। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बाकी सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है और पीड़ितों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।

दीप्ति शर्मा बनेंगी नई रिकॉर्ड क्वीन? झूलन गोस्वामी के खास मुकाम से बस एक कदम दूर

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ढाका। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बेहतरीन ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप-ए मैच में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं। 28 साल की यह ऑफ स्पिनर अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे सफल गेंदबाज बनने से महज एक विकेट दूर हैं। फिलहाल दीप्ति के खाते में 355 अंतरराष्ट्रीय विकेट दर्ज हैं और वह भारत की पूर्व तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर काबिज हैं। बांग्लादेश के खिलाफ एक भी विकेट लेते ही वह दुनिया में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली महिला गेंदबाज बन जाएंगी।

मौजूदा विश्व कप में दीप्ति बेहतरीन फॉर्म में नजर आई हैं। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ शुरुआती मैच में पांच विकेट झटककर टीम को जीत दिलाई थी, जबकि नीदरलैंड्स के खिलाफ लीड्स में हुए मुकाबले में एक विकेट लेकर उन्होंने झूलन गोस्वामी के रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली और भारतीय टीम को छह विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके बावजूद बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले इस महत्वपूर्ण मैच में टीम को उनसे काफी उम्मीदें हैं।

टी20 अंतरराष्ट्रीय में विश्व रिकॉर्ड और वनडे में धाक

दीप्ति शर्मा के नाम महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया में सबसे ज्यादा विकेट लेने का विश्व रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने अब तक खेले 147 टी20 मैचों में 167 विकेट अपने नाम किए हैं। इसके साथ ही 124 वनडे मुकाबलों में उनके नाम 166 विकेट हैं, जहां भारत की ओर से उनसे आगे सिर्फ झूलन गोस्वामी (255 विकेट) हैं।

टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन और झूलन गोस्वामी का सफर

सीमित ओवरों के अलावा टेस्ट प्रारूप में भी दीप्ति का प्रदर्शन शानदार रहा है, जहां उन्होंने महज छह मैचों में 22 विकेट हासिल किए हैं। वहीं दूसरी तरफ, साल 2022 में संन्यास लेने वाली दिग्गज झूलन गोस्वामी ने अपने करियर में 44 टेस्ट, 255 वनडे और 56 टी20 विकेट चटकाए थे।

विश्व की शीर्ष महिला गेंदबाजों के आंकड़े

महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में भारत की दीप्ति शर्मा और झूलन गोस्वामी 355 विकेटों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं। इनके बाद इंग्लैंड की कैथरीन शीवर-ब्रंट 335 विकेट के साथ तीसरे, ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी 332 विकेट के साथ चौथे, इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन 327 विकेट के साथ पांचवें और दक्षिण अफ्रीका की शबनम इस्माइल 318 विकेट लेकर छठे स्थान पर मौजूद हैं।

दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल की राह आसान करने के लिहाज से यह मुकाबला बेहद अहम है। ऐसे में फैंस को उम्मीद है कि दीप्ति न सिर्फ भारत को जीत दिलाएंगी, बल्कि गेंदबाजी में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित करेंगी।

करिश्मा कपूर का अनसुना सफर: परिवार के खिलाफ जाकर फिल्मों में आईं, एक फैसले ने बदल दी जिंदगी

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नब्बे के दशक में लाखों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री करिश्मा कपूर का फिल्मी सफर और व्यक्तिगत जीवन दोनों ही काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। कपूर खानदान की पारंपरिक बंदिशों को तोड़कर सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाली करिश्मा ने विरासत में मिले अभिनय के हुनर के दम पर अपनी एक खास पहचान बनाई।

25 जून 1974 को रणधीर कपूर और बबीता के घर जन्मीं करिश्मा को प्यार से 'लोलो' कहा जाता है। बचपन से ही अभिनेत्री बनने का ख्वाब देखने वाली करिश्मा के माता-पिता साल 1988 में अलग हो गए थे। इसके बाद मां बबीता और छोटी बहन करीना के साथ रहते हुए आर्थिक तंगहाली के दौर में परिवार की मदद के लिए उन्होंने छठी कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी। कपूर खानदान में महिलाओं के फिल्मों में काम न करने की परंपरा को तोड़ते हुए, मां के सहयोग से उन्होंने 1991 में महज 17 साल की उम्र में फिल्म 'प्रेम कैदी' से बॉलीवुड डेब्यू किया। शुरुआती दौर में 'पुलिस ऑफिसर', 'जागृति' और 'दीदार' जैसी लगातार कई असफल फिल्में देने के बाद, 1992 में अजय देवगन के साथ आई फिल्म 'जिगर' उनके करियर की पहली हिट साबित हुई। इसके बाद 1993 में 'अनाड़ी' और 1994 में गोविंदा के साथ आई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'राजा बाबू' ने उनकी किस्मत बदल दी। गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी ने 'कुली नंबर 1' और 'हीरो नंबर 1' जैसी 11 सुपरहिट फिल्में दीं। आगे चलकर 'दिल तो पागल है' और 'राजा हिंदुस्तानी' जैसी व्यावसायिक फिल्मों से खुद को स्थापित करने के बाद उन्होंने 'फिजा' और 'जुबैदा' जैसी गंभीर फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।

निजी जीवन के संघर्ष और अधूरी प्रेम कहानियां

करियर की ऊंचाइयों के बीच करिश्मा का निजी जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। शुरुआत में अभिनेता अजय देवगन के साथ उनका नाम जुड़ा, लेकिन वे महज अफवाहें साबित हुईं। इसके बाद विनोद खन्ना द्वारा अपने बेटे अक्षय खन्ना के लिए भेजा गया रिश्ता भी बबीता ने ठुकरा दिया था। साल 2000 में फिल्म 'हां मैंने भी प्यार किया' के दौरान उनकी नजदीकियां अभिषेक बच्चन से बढ़ीं और अक्टूबर 2002 में दोनों की सगाई की आधिकारिक घोषणा भी हुई, मगर महज तीन महीने बाद जनवरी 2003 में यह सगाई टूट गई।

शादी के बाद के विवाद और संपत्ति की कानूनी जंग

अभिषेक बच्चन से रिश्ता टूटने के बाद करिश्मा ने बिजनेसमैन संजय कपूर से शादी की, लेकिन यह रिश्ता भी लंबा नहीं चला। 12 जून 2025 को संजय कपूर के निधन के बाद उनकी करोड़ों की संपत्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। करिश्मा कपूर ने संजय की दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव पर अपने बच्चों का तय खर्च न देने का आरोप लगाया, वहीं संजय की मां रानी ने प्रिया पर वसीयत में हेरफेर करने के गंभीर आरोप मढ़े। इन पारिवारिक विवादों के बढ़ने के बाद मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संजय कपूर की संपत्ति को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया।

कमबैक की कोशिशें और ओटीटी पर नया सफर

पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच करिश्मा ने साल 2012 में विक्रम भट्ट की फिल्म 'डेंजरस इश्क' से बड़े पर्दे पर वापसी की कोशिश की, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन का रुख किया और कई डांस रियलिटी शोज में बतौर जज नजर आईं। साल 2020 में उन्होंने 'मेंटलहुड' वेब सीरीज के जरिए अपना ओटीटी डेब्यू किया और इसके बाद वेब सीरीज 'ब्राउन' में अपने बेहतरीन अभिनय के लिए समीक्षकों से जमकर तारीफें बटोरीं। आने वाले समय में वे कुछ और रियलिटी शोज में जज की भूमिका में दिखाई दे सकती हैं।

भाजपा की नई टीम फाइनल, किसे मिला मौका और कौन हुआ बाहर?

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लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्तर प्रदेश संगठन में जल्द ही बहुत बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा की नई टीम को लगभग अंतिम रूप दे दिया है और इसकी फाइनल सूची उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी को सौंप दी है। आगामी चुनावों और संगठन के विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस नई टीम में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों का विशेष ख्याल रखा गया है।

पंकज चौधरी और विनोद तावड़े की आधे घंटे चली अहम बैठक

इस बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब गुरुवार को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के बीच करीब आधे घंटे तक एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में संगठन की नई कार्यकारिणी, अलग-अलग मोर्चों के अध्यक्षों के नामों और आने वाले समय के राजनीतिक कार्यक्रमों पर विस्तार से मंथन किया गया। इस बैठक के बाद माना जा रहा है कि नई टीम की औपचारिक घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है।

युवा मोर्चा अध्यक्ष के लिए 35 वर्ष की आयु सीमा तय

नई टीम के गठन में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला भाजपा युवा मोर्चा को लेकर सामने आया है। पार्टी ने युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष तय कर दी है। भाजपा का मानना है कि युवा मोर्चा पार्टी की सबसे सक्रिय इकाई है, इसलिए इसमें ऐसे ही नए चेहरों को आगे लाया जाना चाहिए जो युवाओं के साथ सीधा और बेहतर संवाद बना सकें। इस फैसले के बाद युवा नेताओं में संगठनात्मक पदों को लेकर एक नई उम्मीद जगी है और इस रेस में कई नए नाम सामने आ रहे हैं।

नए और पुराने चेहरों के बीच दिखेगा बेहतर संतुलन

भाजपा की इस नई प्रदेश टीम में अनुभवी और नए नेताओं के बीच एक बेहतरीन तालमेल बिठाने की कोशिश की गई है। पार्टी नेतृत्व का पूरा जोर ऐसे चेहरों पर है जो बूथ स्तर तक जाकर संगठन को जमीनी मजबूती दे सकें। सूत्रों की मानें तो कुछ पुराने पदाधिकारियों को उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर दोबारा मौका मिल सकता है, जबकि कई नए चेहरों को पहली बार बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। इसके अलावा महिला, युवा और पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

आज लखनऊ पहुंचेंगे पंकज चौधरी, कभी भी हो सकती है घोषणा

नई टीम को लेकर उत्तर प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उत्सुकता का माहौल बहुत बढ़ गया है। लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय में भी दिनभर इसी सूची को लेकर चर्चाएं चलती रहीं। इसी बीच खबर है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी आज लखनऊ पहुंच रहे हैं। उनके लखनऊ आगमन के साथ ही यह अटकलें तेज हैं कि आज ही नई प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ पार्टी के सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों की भी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

सुपरकंप्यूटिंग की दौड़ में चीन सबसे आगे, बनाया दुनिया का नंबर-1 सुपरकंप्यूटर

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बीजिंग। तकनीक की दुनिया से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अमेरिका को तगड़ा झटका दिया है। चीन के 'लाइनशाइन' नामक सुपरकंप्यूटर ने अमेरिका के सबसे तेज कंप्यूटर को पीछे छोड़कर दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। साल 2017 के बाद यह पहला मौका है जब किसी चीनी कंप्यूटर ने दुनिया में यह गौरव हासिल किया है, जो वैश्विक स्तर पर चीन की बढ़ती तकनीकी ताकत का लोहा मनवाता है।

धमाकेदार एंट्री के साथ टॉप500 रैंकिंग में शीर्ष पर

चीन के शेनझेन शहर में स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में स्थापित 'लाइनशाइन' को दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों की प्रतिष्ठित 'टॉप500' सूची में पहला स्थान मिला है। मंगलवार को जारी हुई इस ग्लोबल रैंकिंग में लाइनशाइन ने पहली ही बार में बाजी मार ली। इसकी गणना करने की रफ़्तार अविश्वसनीय रूप से 2.198 एक्साफ्लॉप्स आंकी गई है। इसे आसान शब्दों में समझें, तो यह जादुई कंप्यूटर महज एक सेकंड में 2 क्विंटिलियन (यानी 1 के बाद 18 शून्य) से भी ज्यादा गणनाएं कर सकता है। इतनी तेज गति से मौसम के सटीक पूर्वानुमान से लेकर नई दवाओं की खोज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे जटिल क्षेत्रों में एक नई क्रांति आ सकती है।

अमेरिकी कंप्यूटर दूसरे स्थान पर खिसका

चीन की इस कामयाबी से अमेरिकी खेमे में हलचल मचना तय है। अब तक दुनिया में नंबर वन का रुतबा रखने वाला अमेरिका का 'एल कैपिटन' सुपरकंप्यूटर, जो कैलिफोर्निया की लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी में है, अब दूसरे पायदान पर खिसक गया है। इसके अलावा, तीसरे और चौथे स्थान पर भी अमेरिकी सुपरकंप्यूटर ही काबिज हैं, जबकि जर्मनी का 'जुपिटर' सुपरकंप्यूटर पांचवें स्थान पर है। वर्तमान में दुनिया भर में केवल यही पांच कंप्यूटर ऐसे हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'एक्सास्केल' यानी दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटरों की श्रेणी में रखा गया है।

बिना ग्राफिक्स चिप के स्वदेशी सीपीयू से किया कमाल

लाइनशाइन की सबसे अनोखी और हैरान करने वाली बात यह है कि इसने यह मुकाम बिना किसी विशेष ग्राफिक्स चिप (GPU) के, सिर्फ सामान्य कंप्यूटर चिप यानी सीपीयू (CPU) के दम पर हासिल किया है। आज के समय में जहां एआई के ज्यादातर बड़े सुपरकंप्यूटर ग्राफिक्स चिप का इस्तेमाल करते हैं, वहीं चीन ने अपने स्वदेशी सीपीयू के बेहतर तालमेल और शानदार इंजीनियरिंग से यह रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर दिखाया है। इस महामशीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 42.2 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ती है। इस बड़ी छलांग के साथ चीन ने भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधानों की दौड़ में खुद को सबसे आगे ला खड़ा किया है।

महंगाई के बीच नया बोझ, पटना में 15% बढ़ा वार्षिक किराया मूल्य

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पटना। बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले मकान मालिकों और जमीन-जायदाद के मालिकों के लिए एक जरूरी और जेब पर असर डालने वाली खबर है। पटना नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाली सभी तरह की संपत्तियों के वार्षिक किराया मूल्य (एनुअल रेंटल वैल्यू) में 15 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले के बाद अब शहरवासियों को पहले के मुकाबले ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना होगा। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पटना नगर निगम ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। टैक्स की ये संशोधित दरें 24 जून 2026 से ही पूरे निगम क्षेत्र में लागू मानी जाएंगी। आपको बता दें कि पटना में साल 1995 के बाद, यानी करीब 31 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार टैक्स की दरों में ऐसा बदलाव किया गया है।

क्यों लिया गया टैक्स बढ़ाने का यह फैसला?

बिहार नगरपालिका कानून, 2007 की धारा 127 के नियमों के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों की होल्डिंग्स के लिए प्रति वर्ग फुट कवर्ड एरिया का किराया मूल्य हर 5 साल में कम से कम 15 प्रतिशत बढ़ाना कानूनी रूप से जरूरी है। इस कानून के मुताबिक, नगर निकाय राज्य सरकार से पहले अनुमति लेकर इस 5 साल की अवधि के दौरान भी दरों को संशोधित कर सकते हैं। पटना नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति और निगम पार्षदों ने इस 15% की वृद्धि को लेकर वर्ष 2021 में ही अपनी सहमति दे दी थी, जिसे अब सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद धरातल पर उतारा गया है।

विकास कार्यों और जन-सुविधाओं में होगा सुधार

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि दरों में इस बदलाव से निगम की कमाई (राजस्व) में अच्छा-खासा इजाफा होगा। टैक्स के जरिए आने वाले इस अतिरिक्त बजट का इस्तेमाल पटना शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से जलजमाव (वॉटरलॉगिंग) की समस्या को दूर करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करना, नई सड़कों का निर्माण, आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाना और साफ-सफाई की व्यवस्था को और मजबूत करना शामिल है।

30 जून तक भुगतान करने पर मिलेगी विशेष राहत

बढ़े हुए टैक्स के बीच पटना नगर निगम ने ईमानदार करदाताओं को एक छोटी सी राहत भी दी है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जो भी प्रॉपर्टी मालिक आने वाली 30 जून 2026 तक अपने संपत्ति कर का एकमुश्त (पूरा) भुगतान कर देंगे, उन्हें नगर निगम की तरफ से कुल टैक्स राशि पर 5 प्रतिशत की खास छूट दी जाएगी। लोग इस टैक्स को ऑनलाइन डिजिटल माध्यमों या ऑफलाइन काउंटर पर जाकर जमा कर सकते हैं।

MVA में सब ठीक नहीं? 23 विधायकों की गैरहाजिरी पर उद्धव ठाकरे नाराज

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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक सरगर्मी बढ़ गई है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बीच, बुधवार रात मुंबई में महाविकास आघाड़ी (MVA) के प्रमुख नेताओं की एक डिनर मीटिंग हुई, जिसका मकसद गठबंधन में एकजुटता का संदेश देना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के मुखिया शरद पवार नदारद रहे। इसके बावजूद, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, एनसीपी (शरद गुट) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और सांसद संजय राउत समेत कई दिग्गज नेता इस बैठक में शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दलों की एकजुटता पर उठाए सवाल

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने महाविकास आघाड़ी की एकता को लेकर सहयोगियों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि केवल मंच पर साथ होने का दावा कर देना ही काफी नहीं है। सहयोगियों को झकझोरते हुए उद्धव ने पूछा, "हम बार-बार कहते हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या सच में हम सब एक साथ हैं?" गौरतलब है कि इस गठबंधन में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद गुट) मुख्य रूप से शामिल हैं।

विपक्ष को मिलकर और मजबूती से लड़ने की दी नसीहत

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने बैठक में चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा हो रहा है कि क्या महाविकास आघाड़ी वाकई विधानसभा और विधान परिषद में जनता की आवाज को एकजुट होकर उठा पा रही है। उन्होंने सहयोगियों को नसीहत दी कि अगर सरकार की नीतियों का मुकाबला करना है, तो विपक्ष को सदन के अंदर और सड़क पर पूरी ताकत व एकजुटता के साथ उतरना होगा।

60 में से केवल 37 विधायकों का पहुँचना बना चर्चा का विषय

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच आयोजित की गई इस बेहद खास बैठक में महाविकास आघाड़ी के लिए एक असहज करने वाली स्थिति भी सामने आई। गठबंधन के तीनों दलों के कुल 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही इस डिनर मीटिंग में पहुंचे। विधायकों की इस कम संख्या ने राजनीतिक गलियारों में एमवीए के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाओं को हवा दे दी है।

सदन में सरकार को घेरने की साझा रणनीति पर हुआ मंथन

तमाम कड़वाहट और सवालों के बीच, बैठक में आगामी विधानसभा कार्यवाही को लेकर एक साझा रणनीति पर मुहर लगाई गई। नेताओं ने फैसला किया कि जनता की समस्याओं और मुद्दों को सदन के पटल पर बेहद आक्रामक ढंग से रखा जाएगा। इसके अलावा, सदन के भीतर और बाहर सभी सहयोगी दल हर मुद्दे पर एक जैसा रुख अपनाएंगे। बैठक में तीनों दलों के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल और संगठन को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सांसदों के टूटने के बाद पहली बड़ी परीक्षा

उद्धव गुट के छह सांसदों के पाला बदलकर शिंदे गुट में जाने के बाद महाविकास आघाड़ी की यह पहली बड़ी और रणनीतिक बैठक थी। ऐसे नाजुक वक्त पर गठबंधन के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार का बैठक में न आना और दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का अपनी ही आघाड़ी की एकता पर सवाल खड़े करना, महाराष्ट्र की सियासत में किसी बड़े बदलाव की तरफ इशारा कर रहा है।

सोने की दौड़ में भारत का बड़ा कदम, पहली निजी गोल्ड माइन से शुरू हुआ उत्पादन

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अमरावती। भारत के खनिज क्षेत्र (माइनिंग सेक्टर) में एक नया इतिहास रच गया है। आजादी के बाद देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी प्राइवेट कंपनी के मालिकाना हक वाली सोने की खदान में कमर्शियल (व्यावसायिक) तौर पर कामकाज पूरी तरह शुरू कर दिया गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले के जोंनागिरी इलाके में इस बड़े गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया।

इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने न केवल इसकी पहली यूनिट को देश को समर्पित किया, बल्कि इसके अगले चरण (सेकंड फेज) की नींव भी रखी। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आया है और इससे देश को कितना सोना मिलेगा।

405 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश

इस ऐतिहासिक सोने की खदान को चालू करने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में 405 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसे जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GMSI) द्वारा डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है।

इस बड़े कदम को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने उद्घाटन से ठीक पहले 'जोंनागिरी' गांव का नाम बदलकर सम्मानपूर्वक 'स्वर्णगिरी' करने का फैसला किया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार की ओर से कुल 1500 एकड़ जमीन दी गई है, जिसमें से शुरुआती चरण में 600 एकड़ पर खुदाई का काम शुरू हो चुका है। खदान में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए 'हंद्री नीवा सुजला स्रवंती' परियोजना के तहत 18 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है।

हर साल कितना निकलेगा सोना? समझिए इसका पूरा समीकरण

इस खदान से सोने के उत्पादन को लेकर समय के साथ बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं:

  • पहले साल की उम्मीद (2026-27): व्यावसायिक कामकाज के पहले पूरे साल में यहाँ से करीब 400 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य है।

  • भविष्य की योजना: इसके बाद आने वाले वर्षों में सालाना प्रोडक्शन को बढ़ाकर 1000 किलोग्राम तक पहुँचाया जाएगा।

  • पूरी क्षमता पर उत्पादन: जब इसकी दूसरी प्रोसेसिंग यूनिट (जिसका शिलान्यास हुआ है) पूरी तरह काम करने लगेगी, तब यहाँ से हर साल लगभग 2000 किलो सोना निकाला जा सकेगा।

स्थानीय लोगों को रोजगार और सरकार को बंपर राजस्व

इस प्राइवेट गोल्ड माइन के चालू होने से स्थानीय समाज और सरकार दोनों को सीधे तौर पर बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा:

  • स्थानीय युवाओं को काम: इस प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर करीब 700 लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे बेहतरीन बात यह है कि इस वर्कफोर्स का तकरीबन 80 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र के स्थानीय लोगों से लिया जाएगा।

  • सरकारी खजाने में करोड़ों की रॉयल्टी: सोने के उत्पादन से आंध्र प्रदेश सरकार को रॉयल्टी और अन्य टैक्स के रूप में बड़ा राजस्व मिलेगा। जब सालाना 400 किलो उत्पादन होगा, तब सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की आय होगी। वहीं, उत्पादन बढ़कर 900 किलो पहुंचने पर यह सालाना कमाई 144 करोड़ रुपये हो जाएगी।

क्या होती है प्राइमरी गोल्ड माइन? यह वर्तमान में देश की एकमात्र चालू निजी 'प्राइमरी गोल्ड माइन' (प्राथमिक सोने की खदान) है। प्राइमरी गोल्ड माइनिंग एक जटिल 'हार्ड-रॉक' प्रक्रिया है, जहाँ सोना किसी दूसरी धातु के साथ उप-उत्पाद के रूप में नहीं मिलता, बल्कि सीधे जमीन के नीचे मौजूद कठोर चट्टानों और क्वार्ट्ज की परतों से निकाला जाता है। इसमें पहले चट्टानों में ब्लास्टिंग की जाती है, फिर पत्थरों को बाहर निकालकर विभिन्न केमिकल और फिजिकल प्रक्रियाओं के जरिए शुद्ध सोना अलग किया जाता है।

क्या आंध्र प्रदेश बनेगा नया 'KGF'?

भूवैज्ञानिकों (Geologists) का मानना है कि कुरनूल का यह इलाका तो बस एक शुरुआत है। यह पूरा क्षेत्र एक समृद्ध खनिज बेल्ट का हिस्सा है, जहाँ जमीन के नीचे सोने का विशाल भंडार छुपा हुआ है। इसके अलावा अनंतपुर जिले के बोक्समपल्ली, रामागिरी और जवकूला जैसी जगहों पर भी नए भंडारों की तलाश का काम तेजी से चल रहा है।

एक्सपर्ट्स इन प्राचीन चट्टानी संरचनाओं की तुलना कर्नाटक की प्रसिद्ध 'कोलार' (KGF) और 'हुट्टी' गोल्ड फील्ड्स से कर रहे हैं, जो कभी दुनिया में सबसे ज्यादा सोना देने के लिए जानी जाती थीं। अगर इन क्षेत्रों में भी वैसी ही कामयाबी मिलती है, तो यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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