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पीयूष और सार्थक के म्यूजिक वीडियो ने धूम मचाई 

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जबलपुर । जबलपुर के गायक व गीत लेखक पीयूष घडसे व अभिनेता सार्थक श्रीवास्तव का म्यूजिक वीडियो ‘काहे सताए’ इन दिनों सोशल मीडिया में काफ़ी सुर्खियां बटोर रहा है। पीयूष घडसे व सार्थक श्रीवास्तव दोनों इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं लेकिन गीत, संगीत व अभिनय इनकी रगों में दौड़ रहा है। 
पीयूष घडसे ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है इसके बावजूद उनके ‘खैर मांग दा’ को २.९ मिलियन और ‘तुम हो तो’ को लाखों लोगों ने देख कर पसंद किया है। पीयूष ने ओरियंटल कॉलेज से और सार्थक श्रीवास्तव ने भोपाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सार्थक पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जनसम्पर्क अधिकारी केपी श्रीवास्तव व हितकारिणी महिला महाविद्यालय की प्राध्यापक डा. सुनीता श्रीवास्तव के पुत्र हैं।

 प्रीतम लोधी और धीरेंद्र शास्त्री ने बिगाड़ा भाजपा का खेल!

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  • बुंदेलखंड, बघेलखंड और चंबल में ओबीसी और ब्राह्मण भाजपा से नाखूश
  • 58 फीसदी आबादी की नाराजगी 2023 में भाजपा को पड़ सकती है भारी

भोपाल। 2023 में 200 सीटें जीतने का टारगेट लेकर चुनावी तैयारी में जुटी भाजपा के लिए एक नेता और एक कथावाचक परेशानी का सबब बन गए हैं। नेता हैं भाजपा से निष्कासित प्रीतम लोधी और कथावाचक हैं धीरेंद्र शास्त्री। दोनों के कारण भाजपा ओबीसी बनाम ब्राह्मण की सियासत में इस कदर फंस गई है कि प्रदेश  की 58 फीसदी आबादी भाजपा से नाराज हो गई है। खासकर बुंदेलखंड, बघेलखंड और चंबल में ओबीसी और ब्राह्मण भाजपा से नाखुश नजर आ रहे हैं। यह नाराजगी विधानसभा चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ सकती है। मप्र में विधानसभा चुनाव होने में एक साल से भी कम का वक्त बचा है। भाजपा प्रदेश में सरकार बनाने के लिए 51 फीसदी वोट का टारगेट लेकर चल रही है। लेकिन प्रदेश का सबसे बड़ा वोट बैंक ओबीसी (52 फीसदी आबादी) उससे नाराज है। इसकी एक वजह ओबीसी आरक्षण और दूसरी वजह ओबीसी समाज से आने वाले प्रीतम लोधी का अपमान और पार्टी से उनकी  बर्खास्तगी है। वहीं ब्राह्मण इसलिए नाराज हैं कि प्रीतम लोधी लगातार कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के साथ अन्य पंडितों और कथावाचकों के खिलाफ आग उगल रहे हैं और सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।

भाजपा से छिटक रहा ओबीसी वर्ग
प्रदेश में लगभग 52 फीसदी आबादी वाले ओबीसी अब भाजपा की चिंता बढ़ा रहे हैं। भाजपा 2003 में ओबीसी वोटों के समर्थन से सत्ता में आई थी खासकर लोधी के समर्थन से जिसका मप्र की 40 सीटों पर मजबूत प्रभाव है। जिसकी मदद से उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। बाद में उनकी जगह एक अन्य ओबीसी नेता बाबूलाल गौर को लाया गया और गौर की जगह शिवराज सिंह चौहान को लिया गया। लगातार तीन बार भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में ओबीसी मतदाताओं ने अहम भूमिका निभाई। जानकारों का कहना है कि भाजपा को इस मुद्दे से निपटने के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी क्योंकि यह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए खतरनाक हो सकता है। इस बीच भाजपा ने नुकसान को नियंत्रित करने के लिए ग्वालियर से पूर्व विधायक नारायण सिंह कुशवाहा को पार्टी के ओबीसी विंग के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में घोषित किया। लेकिन इसके बाद भी ओबीसी वर्ग भाजपा से छिटक रहा है। यह मिशन 2023 के लिए घातक हो सकता है।

पहली बार ब्राह्मणों की मोर्चाबंदी
मप्र में पहली बार ब्राह्मण समुदाय ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी करनी शुरू की है। मप्र में ब्राह्मण समुदाय की कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत हैं। यह वर्ग भी भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। जिस तरह प्रीतम लोधी के समर्थन में ओबीसी महासभा और भीम आर्मी आए और कहा कि उनका इरादा गलत नहीं था और स्वयं घोषित आध्यात्मिक नेताओं द्वारा उन्हें गाली देने के लिए अपना विरोध दर्ज कराया। उससे ब्राह्मण वर्ग भाजपा से नाराज है। बताया जाता है कि भाजपा के कई सर्वण नेता भी ब्राह्मणों की मोर्चा बंदी को समर्थन दे रहे हैं।

भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं
बुंदेलखंड, बघेलखंड और चंबल में जिस तरह ओबीसी और ब्राह्मण भाजपा से नाखूश हैं और विरोध जता रहे हैं यह भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। पिछले 17 वर्षों में विशेष रूप से पिछले दो वर्षों में 2018 में हारने के बाद भाजपा नेताओं ने यह साबित करने के लिए विशेष प्रयास किए कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए काम करती है। उन्हें ओबीसी का मजबूत समर्थन था और विशेष योजनाओं के माध्यम से उन्होंने एससी और एसटी समुदाय को लुभाने की कोशिश की। लेकिन ओबीसी का यह विरोध पार्टी के लिए महंगा साबित हो सकता है। 1990 में यूपी में भाजपा का उदय अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के लिए गठित मंडल आयोग के साथ हुआ। उन्होंने मंडल और कमंडल के साथ जाने का फैसला किया। 2003 में उन्होंने एमपी में दोहराया और इसका लाभ मिला। 2018 में भाजपा ने ओबीसी वोटरों के सहारे कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी क्योंकि ऊंची जाति पार्टी से खफा थी। अब 2023 में वे ओबीसी मतदाताओं के केवल एक वर्ग को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते क्योंकि सत्ता विरोधी लहर पहले से ही एक कारक है।

ईपीएफ के कार्यों मे तेजी लाने ट्रेड यूनियनों से मांगे सुझाव 

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जबलपुर । केंद्रीय अपर आयुक्त मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के द्वारा ट्रेड यूनियनों की बैठक का शहर में आयोजन किया गया। ईपीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर में समस्त ट्रेड यूनियनों की बैठक आयोजित हुई। बैठक के मुख्य अतिथि केंद्रीय अपर आयुक्त पंकज कुमार एवं क्षेत्रीय आयुक्त जबलपुर राकेश शहरावत रहे। अपर मुख्य आयुक्त श्री कुमार के द्वारा सभी ट्रेड यूनियनों से ईपीएफ के कार्य में तेजी लाने हेतु सुझाव मांगे तथा विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की। सभी यूनियन के पदाधिकारियों ने ईपीएफ के लिए विभिन्न क्षेत्रों में आ रही समस्याओं से अवगत कराया। सभी के प्रश्नों का समाधान केंद्रीय अपर आयुक्त श्री कुमार ने किया, इस दौरान क्षेत्रीय आयुक्त श्री शहरावत के द्वारा जबलपुर कार्यालय में प्रतिमाह आयोजित होने वाली बैठक को आदर्श मानते हुए इसे पूरे प्रदेश में आयोजित करने कहा गया। बैठक के दौरान भारतीय मजदूर संघ की ओर से जिला मंत्री कृष्णकांत शर्मा तथा जिला कोषाध्यक्ष अशोक वर्मा ने बैठक में अपनी उपस्थिति देकर ईपीएफ की विभिन्न समस्यायों से अधिकारियों को अवगत कराया, जिनके शीघ्र निराकरण का आश्वासन संबंधित अधिकारियों द्वारा दिया गया। जबलपुर से बाहर होने के कारण बैठक में जिला अध्यक्ष रामकुमार सैयाम उपस्थित नही हो पाए। बैठक में सभी ट्रेड यूनियन से दो-दो पदाधिकारी उपस्थित हुए।

क्या नजरअंदाज होने लगे मंत्री विश्वास सारंग! 

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मंच से सीएम शिवराज ने क्यों नहीं लिया नाम 

भोपाल । प्रदेश के कद्दावर मंत्री विश्वास सारंग का नाम सीएम की रेस में दौड़ने लगा है। इसके बाद वो अपनी पार्टी के नेताओं के आँखो की किरकिरी बने हुए है। उन्हें अब सार्वजानिक कार्यक्रमों में भी नजरअंदाज किया जाने लगा है। ताजा मामला रायसेन जिले के सुल्तानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आया है। शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा की मूर्ति अनावरण और विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से अपने संबोधन के दौरान मंच पर प्रथम पंक्ति में मौजूद सांसदों और मंत्रियों के नाम लिए वही सीएम ने मंच पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के ठीक बगल में बैठे मंत्री विश्वास सारंग का नाम नहीं लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उनके सामने बैठे मंत्री विश्वास सारंग को यू नजरअंदाज करना चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी शिवराज के आँखो का तारा कहे जाने वाले विश्वास सारंग की नजरअंदाजगी लोगों के गले नहीं उतर रही है। गौरतलब है कि मंत्री विश्वास सारंग ने पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही में उनके विभाग द्वारा आयोजित एक बड़े आयोजन में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रदेश की राजनीति उनका कद तेजी से बड़ा है। विश्वास सारंग 30 सालों से राजनीति में सक्रिय है। सारंग ने पार्षद से लेकर मंत्री तक का सफर तय किया है। उन्हें प्रदेश का भावी सीएम माने जाने लगा है। 

प्रदर्शन करें, एनएसयूआई ने उठाए सवाल 

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जबलपुर । रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) शनिवार १२ नवंबर को सख्त पहरे के बीच बैकलॉग शिक्षको के ७० पदों पर बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित साक्षात्कार लिए गए। इसी दौरान छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी जबरदस्त विरोध जताया, सुबह-सुबह पहुंचे छात्र नेताओं ने नारेबाजी की। ये छात्र साक्षात्कार प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। बताया गया है कि साक्षात्कार के प्रथम चरण में इतिहास विभाग के लिए विज्ञापित एक पद के लिए विश्वविद्यालय को प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद कुल ९ अभ्यार्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, सभी को १२ नवंबर की सुबह ९ बजे कुलपति कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। लिहाजा निर्धारित समय पर सभी अभ्यार्थी पहुंच गए थे।

अगस्त २०२१ में निकली थी भर्ती…….
रादुविवि ने १९ अगस्त २०२१ को प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिसटेंट प्रोफेसर के बैक लॉक श्रेणी में आने वाले रिक्त पदों की भर्ती के लिए सूचना जारी की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी सूचना के तहत अक्टूबर माह तक पात्र अभ्यार्थियों को आवेदन जमा करने का मौका दिया गया था। विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर के १३ पदों के लिए सूचना जारी की थी जिसमें एसटी के लिए ५, एससी के ३ एवं ओबीसी वर्ग के लिए ४ पदों को आरक्षित किया था। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर के २७ पदों लिए एसटी के ११, एससी के ९ एवं ओबीसी के ७ वर्ग लिए आरक्षित किए गए था। सबसे ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसर के ३० रिक्त पदों के लिए एसटी वर्ग के लिए १२, एससी के लिए ९ एवं ओबीसी के लिए ९ पदों को आरक्षित किया गया था।

एनएसयूआई ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल……………
शनिवार को एक बार फिर रादुविवि में एक तरफ साक्षात्कार तो दूसरी तरफ एनएसयूआई का प्रदर्शन चल रहा था। हो-हल्ले के बीच रादुविवि के कुलपति प्रो.कपिल देव मिश्र स्वयं बाहर आए और छात्र नेताओं से चर्चित की। प्रों. कपिल देव मिश्र ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है तो वहीं एनएसयूआई पदाधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में कई सवाल उठाए। एनएसयूआई पदाधिकारियों का आरोप है कि शैक्षणिक पदों पर बैकलॉग भर्ती के लिए २०१९ के रोस्टर एवं विज्ञापन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया आयोजित कराई जा रही है जो कि पूर्णत: नियमों का उल्लंघन है। वर्ष २०१४ में विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक पदो पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। लेकिन मप्र हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर होने के बाद भर्ती प्रक्रिया थम गई थी। जनहित याचिका अभी भी लंबित है। नियम है कि पूर्व विज्ञापन को रद्द किए बिना नए रोस्टर एवं विज्ञापन को जारी नहीं किया जा सकता, परंतु रादुविविप्रशासन मनमाने ढंग से कार्य करते हुए अवैध रूप से भर्ती प्रक्रिया आयोजित करवा रहा है। वहीं दूसरी ओर २०१९ में विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए रोस्टर में विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग को एक इकाई माना गया था, परंतु केंद्र सरकार ने इस नियम में संशोधन किया और नए नियमानुसार विश्वविद्यालय को एक इकाई मानने का नियम है। अब चूंकि विश्वविद्यालय २०१९ के रोस्टर के आधार पर भर्ती कर रहा है और यह रोस्टर शासन के नियम के खिलाफ है इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान सागर शुक्ला, शाहनवाज अंसारी, अदनान अंसारी, अभिषेक सेठी सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

जानें किशमिश खाने के फायदे

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स्वीट डिश को करना हो गर्निश या फिर सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से पानी हो निजात, एक अकेला किशमिश हर मर्ज का इलाज है। जी हां, किशमिश में प्रोटीन, आयरन, फाइबर, पोटैशियम, कॉपर, विटामिन बी6, कैल्शियम, फाइटोकैमिकल्स, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, हेल्दी फैट और विटामिन ई जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो सेहत के लिए बेहद गुणकारी माने जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं रोजाना किशमिश खाने से सेहत को मिलते हैं कौन से लाभ।

कब्ज होती है दूर

कब्ज को ठीक करने के लिए भीगी हुई किशमिश सबसे अच्छी रेमेडी साबित हो सकती है। ये लैक्सेटिव्स की तरह काम करती है जो डाइजेशन को ठीक करती है और कॉन्स्टिपेशन को कम करने में मदद करती है।

वजन घटाने में मददगार

मोटापे से परेशान हैं तो किशमिश का पानी पिएं। किशमिश में डाइट्री फाइबर और प्रीबायोटिक पाए जाते हैं, जो पेट के लिए अच्छे माने जाते हैं। किशमिश के पानी का रोजाना सेवन करने से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।

पेट साफ रखती है किशमिश

किशमिश कब्ज से राहत देने का एक प्रभावी और स्वस्थ प्राकृतिक उपाय है। फाइबर से भरपूर किशमिश कब्ज से राहत दिलाने और पाचन अच्छा करने में मुख्यत भूमिका निभाता है। किशमिश का पानी पीने से पेट साफ रहता है। किशमिश का सेवन करने से पेट में दर्द, ऐंठन और अपच जैसी समस्या में भी बहुत फायदा मिलता है।

एनर्जी देती है किशमिश

किशमिश के अंदर नेचुरल शुगर होती है, जो आपको तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है। इसके अलावा किशमिश के अंदर अधिक मात्रा में अमीनो एसिड होता है, जो हाई इंटेसिटी वर्कआउट के बाद आपके मसल्स को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है। अगर आप स्पोर्ट्स से जुड़े हुए व्यक्ति हैं तो किशमिश को भिगोकर खाएं, जिससे आपको पर्याप्त एनर्जी मिलेगी।

एनीमिया की कमी दूर करती है किशमिश

भीगे हुए किशमिश आयरन, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। इनका नियमित सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है और एनीमिया रोग दूर होता है।

बीपी रखें कंट्रोल

किशमिश में फाइबर के साथ अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है जो शरीर में सोडियम यानी नमक को संतुलित करता है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा। रात को सोने से पहले एक कप पानी में थोड़ी मात्रा में किशमिश भिगो दें और सुबह खाली पेट किशमिश के साथ-साथ पानी भी पी लें।

हड्डियों के लिए फायदेमंद

किशमिश का आकार भले ही छोटा होता है लेकिन इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है जो कि हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है। रात में किशमिश को पानी में भिगोकर सुबह रोजाना इसका सेवन करने से हड्डियों का घनत्व बढ़ता है और हड्डियां मजबूत होती है।

Cooking Tips : मलाई से कैसे निकालें ज्यादा देसी घी, जानें टिप्स…

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Cooking Tips : आइए, जानते हैं ऐसे आसान कुकिंग टिप्स, जो आपका काम आसान बना देते हैं। इन टिप्स से आपकी एक्सट्रा मेहनत भी बच जाती है। 

मलाई से ज्यादा देसी घी कैसे निकालें 
आपको अगर मलाई से ज्यादा घी निकालना है, तो इसके लिए मलाई में बर्फ डालकर इसे मिक्सी में चला दें। इससे मलाई से मक्खन निकलकर ऊपर आ जाएगा और फिर इस मक्खन को जलाकर इससे ज्यादा घी निकाल लें। 

जल्दे हुए खाने की बदबू हटाएं 
इलायची, लौंग और तेजपत्ता सिर्फ आपके खाने को ही टेस्टी नहीं बनाता बल्कि आप जले हुए खाने की बदबू भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए किसी डिश को ऊपर-ऊपर से निकाल लें। आप पूरी सब्जी या चावल को अलग बर्तन में ट्रांसफर करना है। इसके बाद एक पतले कपड़े में लौंग, इलायची और तेजपत्ता बांधकर इस बर्तन में रख दें।

बनाये स्पंजी इडली 
क्या आप जब भी इडली बनाते हैं, तो यह स्पंजी नहीं बनती? अगर आपका जवाब हां है, तो इसके लिए एक आसान-सी ट्रिक अप्लाई करें। आपको इडली बनाते समय 2-3 ब्रेड के टुकड़े मसलकर बैटर में एड कर देना है। इससे आपकी इडली बहुत ही स्वादिष्ट बनेगी। 

उबालकर बनाएं टेस्टी ग्रेवी 
आमतौर पर आप किसी सब्जी को बनाने के लिए टमाटर, लहसुन, प्याज, अदरक को पीसकर इस्तेमाल करते होंगे लेकिन अगर आप इन चीजों को उबालकर पीसते हैं, तो ग्रेवी का स्वाद बढ़ जाता है। 

पराठे को ज्यादा टेस्टी कैसे बनाएं 
पराठो को ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए आप आटे में थोड़ा घी डालकर इसे गूंदे। आप पाएंगे कि पराठा पहले से ज्यादा स्वादिष्ट बनेगा। 

उम्र का असर कम करने के लिए खाएं ये चीजें…

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उम्र के साथ त्वचा से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। लोग इसके लिए खूबक पैसा बहाते हैं। आप अपने खानपान पर थोड़ा सा ध्यान देकर ऐंटी- एजिंग इफेक्ट पा सकते हैं।बढ़ती उम्र के साथ स्किन ढीली पड़ने लगती है और इसमें झुर्रियां आ जाती हैं। एजिंग के लक्षणों को रोका नहीं जा सकता लेकिन इन्हें जल्दी आने से जरूर रोका जा सकता है। हमारी सेल्स में मौजूद कोलैजन की वजह से स्किन यंग दिखती है। इलास्टिन और कोलैजन दोनों मिलकर स्किन को टेक्सचर देते हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलैजन बनना कम हो जाता है। अच्छी बात यह है कि कुछ एक्सरसाइज और खाने की चीजें कोलैजन बूस्ट कर सकती हैं।

विटामिन सी

आपने कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स में हायाल्युरॉनिक एसिड का नाम पढ़ा होगा। यह एसिड रिंकल्स और फाइन लाइन्स को कम करता है। यह स्किन को फ्लेक्सिबल भी बनाता है। हायाल्युरॉनिक एसिड बनने के लिए विटामिन सी बेहद जरूरी होता है। एक स्टडी के मुताबिक, इंसान के शरीर में हायाल्युरॉनिक एसिड कोलैजन के निर्माण को तेज करता है। हम विटामिन सी से भरपूर और अमीनो एसिड्स खाएं तो स्किन अच्छी होती है। आप संतरा, नींबू, ब्रॉकली, स्ट्रॉबेरी, आंवला जैसे विटामिन सी वाली चीजें खा सकते हैं।

हरा धनिया

भारतीय घरों में धनिया पसंदीदा हर्ब है। इसे चटनी के साथ खा सकते हैं या किसी भी डिश में ऊपर से डालकर स्वाद बढ़ाया जा सकता है। धनिया में विटामिन सी के अलावा लिनोलिनिक एसिड होता है। इसे ऐंटी एजिंग माना जाता है। धनिया का रस शरीर को डिटॉक्स भी करता है।

जिनसेंग

एक्सपर्ट्स जिनसेंग के पौधे को भी ऐंटी एजिंग मानते हैं। अगर आप जिनसिंग सप्लिमेंट या चाय के रूप में लेते हैं तो यह आपकी स्किन में ग्लो ला सकता है।

Beetroot Lip Balm: घर पर बनाएं चुकंदर से नेचुरल लिप बाम…

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Beetroot Lip Balm: ठंड के दिनों में होंठ फटना बहुत ही नॉर्मल है। यह शरीर में नमी की कमी से होता है इसलिए लिप्स जो हाइड्रेट रखने के लिए आपको पानी ज्यादा पीना चाहिए लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ज्यादा पानी पीने के बाद भी लिप्स क्रैक दिखाई देते हैं।  लिप्स को हाइड्रेट रखने के लिए कई घरेलू उपाय हैं लेकिन अगर आप घर पर नेचुरल लिप बाम बनाना चाहते हैं, तो इसका तरीका बेहद आसान है। खासतौर पर चुकंदर से लिपबाम बनाना बहुत आसान है। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं चुकंदर का लिप बाम- 

चुकंदर से बनाएं लिप बाम  
नेचुरल लिपबाम को बनाने के लिए सबसे पहले आपको चुकंदर को छिलकर काट लेना है। इसके बाद आप इसे पीसकर जूस निकाल लें। इसका जूस निकालना बहुत आसान है। आप छलनी या एक कपड़े की मदद से जूस निकाल सकते हैं। अब इसके जूस को अच्छी तरह उबाल लें। इसके बाद ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसमें एलोवेरा जेल और कोकोनट ऑयल मिक्स कर दें। आप करीब एक महीने तक फ्रिज में रखकर इस नेचुरल लिपबाम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बेस्ट होता है रिजल्ट 
आप इस लिप बाम को हर बार होंठ सूखने पर लगा सकते हैं। आप पाएंगे कि 4-5 दिनों में आपके लिप्स के क्रैक हट जाएंगे और आपके लिप्स सॉफ्ट नजर आएंगे। आप इसे रात में होंठो पर लगाकर सो सकते हैं।

इरफान पठान ने Pakistan PM के ट्वीट का दिया करारा जवाब, कहा- “आप में और हम में फर्क है….”

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टीम इंडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ट्वीट मेन इन ब्लू के प्रशंसकों को रास नहीं आया। पिछले गुरुवार को एडिलेड में टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मैच में इंग्लैंड से करारी हार के बाद शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर भारतीय टीम की आलोचना की थी। शहबाज शरीफ का यह पोस्ट तुरंत ही वायरल हो गया और अब पाकिस्तान के पीएम को उनके ट्वीट के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

शनिवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान के विश्व कप फाइनल की पूर्व संध्या पर, भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर इरफान पठान ने ट्वीट का करारा जवाब दिया। पठान ने ट्वीट कर लिखा, “आप में और हम में फर्क यही हैं, हम अपनी खुशी से खुश और आप दूसरे की तकलीफ से। इसलिए खुद के मुल्क को बेहतर करने पे ध्यान नहीं हैं।”

भारत के हारने पर पाक पीएम ने किया था ट्वीट

भारत को सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने आसानी से शिकस्त दी थी। एलेक्स हेल्स और जोस बटलर की सलामी जोड़ी ने केवल 16 ओवर में ही लक्ष्य हासिल करते हुए 170 रन का रिकॉर्ड बनाया। हार के बाद, पाकिस्तान के पीएम ने ट्विटर पर पोस्ट किया था, “तो, इस रविवार, यह है, 152/0 बनाम 170/0।” इस ट्वीट में पहला आंकड़ा, पिछले साल टी20 विश्व का है जब पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया था, वहीं दूसरा इस विश्व कप का जब इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से हराया है।

टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्विटर पर टीम इंडिया का जमकर मजाक उड़ा था। अब उनके इस ट्वीट का मुंह तोड़ जवाब भारतीय पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान ने दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत के 10 विकेट से हारने के बाद शहबाज शरीफ ने ट्वीट किया था 'तो, इस रविवार, यह है: 152/0 vs 170/0'। पाकिस्तान प्रधानमंत्री के इस ट्वीट में दो स्कोर मेंशन है, पहला स्कोर वो है जो पाकिस्तान ने पिछले साल टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ रन चेज में बनाया था, वहीं दूसरा स्कोर इस साल इंग्लैंड ने टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ बनाया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस ट्वीट का जवाब देते हुए इरफान पठान ने लिखा 'आप में और हम में फर्क ये है। हम अपनी खुशी से खुश और आप दूसरों की तकलीफ से। इसलिए खुद के मुकल्क को बेहतर करने पर ध्यान नहीं है।'बता दें, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस ट्वीट के बाद काफी ट्रोल होना पड़ा था।

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