Guru Nanak Jayanti 2022: गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा द्वारा सिख पंथ के पहले पातशाह धन धन श्री गुरु नानक देव जी महाराज के 553वें पावन प्रकाश पर्व पर रांची की कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब में आज मंगलवार को रात 8 बजे से विशेष दीवान सजाया गया.
सत्संग सभा द्वारा दीवान की शुरुआत रात 8 बजे स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल द्वारा नानक नाम चढ़दी कला तेरे भाड़े सरबत दा भला शबद गायन से हुई. भाई महिपाल सिंह एवं साथियों ने कोई बोले राम नाम कोई सेवै गोसाईंयां कोई अल्लाहे शबद गायन कर साध संगत को निहाल किया.
गुरुद्वारा के मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी जेवेन्दर सिंह ने कथावाचन कर गुरु नानक देव जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए संगत को बताया कि बाबा नानक का प्रकाश उस समय हुआ जब पाखंड एवं अज्ञानता रूपी अंधेरा छाया हुआ था. उन्होंने इस पाखंड और अज्ञानता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व के अनेक देशों का भ्रमण किया. इस विचरण यात्रा को उदासी कहा जाता है. इस दौरान उन्होंने कई लोगों का हृदय परिवर्तन किया. ठगों को साधु बनाया, कर्मकाण्डियों को बाह्य आडंबरों से निकालकर रागात्मिकता भक्ति में लगाया. अहंकारियों का अहंकार दूर कर उन्हें मानवता का पाठ पढ़ाया. उन्होंने विश्व को नाम जपो, कीरत करो और वंड के छको का संदेश दिया.
चंडीगढ़ से विशेष रूप से शिरकत करने पहुंचे रागी जत्था भाई बलविंदर सिंह जी रंगीला ने सा धरती भई हरियावली जिथे मेरा सतगुर बैठा आए एवं एक दृष्ट कर समसरि जाणे जोगी कहिए सोई, गली जोग जोग ना होई जैसे कई शबद गायन कर समूह साध संगत को भाव विभोर कर दिया. साथ में उन्होंने संगत को साखी भी सुनाई. रात 12 बजे प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में 6 नवंबर से पढ़े जा रहे श्री अखंड पाठ साहिब जी का भोग पड़ेगा. मौके पर आरती और बधाई का शबद पढ़ा गया. आनंद साहिब जी के पाठ, अरदास, हुक्मनामा एवं कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ मध्य रात्रि 2.30 बजे दीवान की समाप्ति होगी और इसी के साथ ही प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में अंतिम विशेष दीवान का समापन होगा. मंच संचालन मनीष मिढ़ा ने किया. सत्संग सभा के प्रधान द्वारका दास मुंजाल एवं सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने भाई बलविंदर सिंह जी रंगीला एवं साथियों को गुरु घर का सरोपा ओढ़ाकर सम्मानित किया. इस मौके पर सभा द्वारा गुरु का अटूट लंगर चलाया गया. इस मौके पर सभा के सचिव अर्जुन देव मिढ़ा ने लंगर कमिटी, जोड़ा सेवा कमिटी, चंदा उगड़ाई कमिटी, स्त्री सत्संग सभा, गुरु नानक भवन कमिटी, गुरु नानक बाल मंदिर स्कूल कमिटी, कीर्तन मण्डली, गुरु नानक सत्संग सभा समेत सभी सेवादारों का इस आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद किया तथा समूह साध संगत को प्रकाश पर्व की बधाई दी.
प्रकाश पर्व की खुशी में सभा द्वारा आतिशबाजी भी की गई. सत्संग सभा के मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने बताया कि 13 नवंबर (रविवार) को शाम 4 बजे से शुक्राने का दीवान सजाया जाएगा. आज के दीवान में सभा के प्रधान द्वारका दास मुंजाल, सुंदर दास मिढ़ा, हरविंदर सिंह बेदी, अशोक गेरा, चरणजीत मुंजाल, जीवन मिढ़ा, मोहन काठपाल, हरगोविंद सिंह, सुरेश मिढ़ा, हरीश मिढ़ा, नरेश पपनेजा, लक्ष्मण दास मिढ़ा, लेखराज अरोड़ा, इंदर मिढा, रमेश पपनेजा, प्रेम मिढ़ा, पाली मुंजाल, राजेंद्र मक्कड़, अनूप गिरधर, कवलजीत मिढ़ा, पवनजीत सिंह खत्री, महेन्द अरोड़ा, अमरजीत गिरधर, जीतू अरोड़ा, अश्विनी सुखीजा, रमेश तेहरी, हरविंदर सिंह, लक्ष्मण दास सरदाना, कमल मुंजाल, गुलशन मिढ़ा, रमेश गिरधर, बिनोद सुखीजा, सुभाष मिढ़ा, हरजीत बेदी, पंकज मिढ़ा, सुरजीत मुंजाल, सागर थरेजा, विशेष काठपाल, सूरज झंडई, गौरव मिढ़ा, रौनक ग्रोवर, अमन डावरा, पियूष मिढ़ा, आशु मिढ़ा, नवीन मिढ़ा, रिक्की मिढ़ा, गीता कटारिया, मंजीत कौर, बबली दुआ, बीबी प्रीतम कौर, खुशबू मिढ़ा, मंजीत कौर, दुर्गी मिढ़ा, बिमला मुंजाल, चांद नागपाल, तीर्थी काठपालिया, नीता मिढ़ा, श्वेता मुंजाल, उषा झंडई, नीतू किंगर, ममता थरेजा, कंचन सुखीजा, सुषमा गिरधर समेत अन्य श्रद्धालु शामिल हुए.
प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा साहिब में सजा विशेष दीवान, शबद गायन से हुई शुरुआत
श्रीराम एवं श्रीरामकथा की प्रासंगिकता
राम चरित सत कोटि अपारा।
श्रुति सारदा न बरनै पारा।।
(श्रीरामचरितमानस उत्तरकाण्ड ५२ (क))।
यह प्रसिद्ध उक्ति रामायण के सम्बन्ध में प्रचलित है तथा चरितार्थ भी है कि जो रामायण में नहीं है वह विश्व में भी नहीं है क्योंकि
रामायण (श्रीरामकथा) केवल भारत की ही धरोहर नहीं है अपितु वह मानव मात्र की महिमा का गुणगान करने वाली विश्वव्यापी कृति है। यह देश काल और व्यक्ति की परिकल्पित सीमाओं से परे है।
राम शब्द में रमणीयता है और 'अयनÓ शब्द में जो गतिशीलता है- दोनों का मणि-कांचन संयोग ही रामायण (श्रीरामकथा) है। एक और महत्वपूर्ण विशेषता इस 'अयनÓ की यह है कि केवल राम का एकांगी अयन नहीं है, वरन् यह सीताजी और श्रीरामजी का समन्वित और समेकित अयन है। रामायण शब्द में ही यह समन्वयवादी भावना-विचारधारा है। देखा जाय तो वास्तव में यह श्रीराम और रामा (सीताजी) दोनों का अयन है। महर्षि वाल्मीकिजी ने सीताजी के लिए 'रामाÓ शब्द का प्रयोग किया है।
श्रीरामकथा वर्तमान भारतीय जन-जीवन के साथ इतनी निकटता से जुड़ी और गूँथी हुई है। जैसे वह उसका अन्न-पान अथवा जलवायु हो। साधारण जन के दैनंदिनी जीवन में ऐसी घटना नहीं घटती है, जिसमें श्रीरामकथा का कोई प्रसंग याद नहीं आता हो। सुख में, दु:ख में, संयोग में, वियोग में, भोग में, रोग में, त्याग में जीवन की हर क्षण अनुभूति में श्रीरामकथा की कोई न कोई बात अनायास जुड़ जाती है। प्राणों की चिन्ता किए बिना अपने दिए गए वचन का विधिवत पालन करने वाले आदर्श व्यक्ति को देखकर सत्यसंघ महाराजा दशरथजी का स्मरण हो जाता है। आदर्श पुत्र हो तो श्रीराम जैसा, साध्वी पत्नी हो तो सीताजी जैसी होनी चाहिए, अनुरागी भाई हो तो लक्ष्मण जैसा होना चाहिए। स्वार्थ रहित राजा (शासक) हो तो भरतजी जैसा होना चाहिए, पूर्ण समर्पित सेवक हो तो हनुमान्जी जैसा होना चाहिए। इसी प्रकार श्रीरामकथा के अनेक पात्रों को कई बराबर स्मरण करते हुए भारतवासी अपने जीवन में आदर्श गुणों को प्रतिष्ठित करने का भरपूर प्रयत्न करते हैं।
भारत के ही नहीं अपितु विश्वभर के प्रसिद्ध विद्वानों ने श्रीरामचरितमानस एवं श्रीराम के चरित्र की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। अयोध्यासिंह उपाध्याय ने इसकी विशेषता के सम्बन्ध में कहा है-
कविता करके तुलसी न लसे, कविता लसी पा तुलसी की कला।
इसी प्रकार राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है-
यह मानस आदर्श तुम्हारा, मनस्ताप सब हट जाता है।
उसमें रामचरित रसधारा, पाप आप ही हट जाता है।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने भी लिखा है-
सियाराम, हनुमान और भरत को छोड़कर हमारी कोई गति नहीं। हमारे मन की शान्ति, हमारा सब कुछ उन्हीं के ध्यान में निहित है। उनकी पुण्य कथा हमारे पूर्वजों की धरोहर है। इसी के आधार पर हम आज जीवित हैं। जब तक हमारी भारत भूमि में गंगा और कावेरी प्रवाहमान है, तब तक सीता-राम की कथा भी आबाल स्त्री पुरुष, सबमें प्रचलित रहेगी, माता की तरह हमारी जनता की रक्षा करती रहेगी।
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, डॉ. राजेन्द्रप्रसाद एवं राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीजी के अपने अमूल्य विचारों को सदैव स्मरण करते रहना चाहिए। अनेक विदेशी विद्वानों ने श्रीरामचरितमानस को विश्व का सर्वोत्कृष्ट महाकाव्य निरूपित किया है। यह हमारे लिए गौरव की बात है।
प्रसिद्ध इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने 'अकबर द ग्रेट मुगलÓ में उल्लेख किया है कि तुलसीदास उस युग के महानतम पुरुष थे। स्मिथ ने यह भी कहा है कि यह कहना उचित है कि तुलसी के काल में अकबर था न कि अकबर के काल में तुलसी थे।
कामिल बुल्के रोमन कैथोलिक संघ के प्रसिद्ध धर्म प्रचारक थे। वे धर्म प्रचार के लिए १९३५ में भारत आए तथा उन्होंने 'रामकथा उदभव और विकासÓ पर डी. फिल किया। उन्होंने उनके देश बेल्जियम में ही एक जर्मन ग्रन्थ में पढ़ा।
धन्य जनम जग, तीतल तासू।
पितहि प्रमोद चरित सुन जासु।।
बस फिर क्या था? वे श्रीरामचरितमानस की कथा पर मुग्ध हो गए। भारत में आ जाने के पश्चात् उन्होंने जीवनभर हिन्दी की सेवा की। कामिल बुल्के श्रीरामचरितमानस के अनन्य उपासक भक्त थे।
आज भी हम देखते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया की संस्कृतियों के मूल में श्रीरामकथा विशेषत: प्रतिष्ठित है। थाईलैण्ड, कम्बोडिया, मलेशिया, इण्डोनेशिया, लाओस, म्यामार में श्रीरामकथा के दर्शन प्राप्त होते हैं। भारतीय मजदूरों ने गिरमिटिया के रूप में श्रीरामचरितमानस और हनुमान चालीसा अपने साथ ले जाकर मारिशस, फीजी, सूरिनाम आदि में उनको जीवन का आधार ही बना लिया। आज भी मारिशस को लघुभारत के नाम से जाना जाता है। इण्डोनेशिया मुस्लिम देश है किन्तु वहाँ रामायण संस्कृति जन-जन में घुली-बसी लगती है। इण्डोनेशिया में श्रीरामकथा के प्रचार और प्रसार का सम्पूर्ण श्रेय उड़ीसा राज्य के भारतीय व्यापारियों को है। जो व्यापार करने वहाँ जाते थे तथा रामायण साथ ले जाते थे। आज भी इण्डोनेशिया में योगेश्वरकृत 'ककाविनÓ रामायण जन-जन में अत्यन्त ही लोकप्रिय है। वहाँ के शासक वर्ग शपथ विधि समारोह में शपथ ग्रहण के समय 'ककाविनÓ में वर्णित उन आठ व्रतों को ग्रहण करते हैं, जो श्रीराम के आदेशानुसार विभीषण ने राज्याभिषेक के समय ग्रहण किए थे। इण्डोनेशिया के जावा प्रान्त में प्राय: सभी जनता मुसलमान है किन्तु रामायण संस्कृति विशेष रूप से परिलक्षित एवं जीवित है। इतना ही नहीं इण्डोनेशिया के बाली द्वीप की नृत्य नाट्य प्रदर्शनी में श्रीरामकथा का मंचन होता रहता है। इण्डोनेशिया में १३६७७ द्वीप हैं किन्तु समस्त द्वीप राममय हैं तथा रामकथा सर्वत्र राष्ट्रीय जीवन में ओत-प्रोत दिखाई देती है। मलेशिया, कम्बोडिया तथा बर्मा में रामायण परम्परा है तथा उनके भिन्न-भिन्न रूप हैं।
रहीम की राम भक्ति भी प्रसिद्ध है। उनकी गोस्वामी तुलसीदासजी से घनिष्ठता भारत में सर्वविदित है। यथा-
गहि सरनागति राम की, भवसागर की नाव।
रहिमन जगत उधार को, और कछु न उपाय।
इस तरह श्रीराम की भक्ति ही संसार-सागर में उद्धार पा जाने का एक मात्र ही शरणागति उपाय है।
अवध के नवाब वाजिद अली शाह कहते थे-
हमेशा हे अवधनन्दन, तुम्हारी छवि का दर्शन हो।
इस प्रकार श्रीरामकथा निश्चित रूप से सर्वकालिक एवं सार्वजनिक है। श्रीराम और श्रीरामकथा सबके लिए है।
डॉ. सर मोहम्मद इकबाल ने श्रीराम के बारे में लिखा है-
है राम के वजूद पै हिन्दोस्ताँ को नाज़।
अहल ए नजर समझते हैं उन्हें इमाम ए हिन्द।
ब्रह्माजी ने महर्षि वाल्मीकि को वरदान देकर कहा- पुण्यमयी मनोरम कथा कहो। पृथ्वी पर जब तक गिरि और सरिताएँ हैं, तब तक श्रीरामकथा लोकों में प्रचारित होती रहेगी यथा-
कुरु रामकथां पुण्यां श्लोकबद्धां मनोरमाम्।
यावत् स्थास्यन्ति गिरय: सरितश्च महीतले।।
तावद् रामायणकथा लोकेषु प्रचरिष्यति।
यावद् रामस्य च कथा त्वत्कृता प्रचरिष्यति।।
वाल्मीकि रामायण बाल ३५ ३६-३७
ब्रह्माजी ने वाल्मीकिजी से कहा कि तुम श्रीरामचन्द्रजी की परम् पवित्र एवं मनोरम कथा को श्लोकबद्ध करके रचना करो। इस पृथ्वी पर जब तक नदियों और पर्वतों की सत्ता रहेगी, तब तक संसार में रामायण की कथा का प्रचार होता रहेगा। जब तक तुम्हारी बनाई हुई रामायण का (श्रीरामकथा) तीनों लोकों में प्रचार रहेगा।
वाल्मीकिजी ने नारदजी से पूछा कि हे मुनि! इस समय इस संसार में गुणवान्, वीर्यवान्, धर्मज्ञ, उपकार मानने वाला, सत्यवक्ता और दृढ़ प्रतिज्ञ कौन है? सदाचार से युक्त समस्त प्राणियों का हित साधक विद्वान, सामर्थ्यशाली और एकमात्र प्रियदर्शन पुरुष कौन है?
मन पर अधिकार रखने वाला, क्रोध को जीतने वाला कान्तिमान और किसी की भी निन्दा नहीं करने वाला कौन है? तथा संग्राम में कुपित (क्रोधित) होने पर जिससे देवता भी डरते हैं? महर्षे मैं यह सुनना चाहता हूँ इसके लिए मुझे बड़ी उत्सुकता है और आप ऐसे महापुरुष को जानने में समर्थ हैं।
महर्षि वाल्मीकि ने इन वचनों को सुनकर तीनों लोकों का ज्ञान रखने वाले नारदजी ने उन्हें सम्बोधित करके कहा- अच्छा सुनिये और फिर प्रसन्नतापूर्वक बोले-
बहवो दुर्लभाश्चैव ये त्वया कीर्तिता गुणा:।
मुने वक्ष्याम्यहं बुद्ध्वा तैर्युक्त: श्रूयतां नर:।।
इक्ष्वाकुवंश प्रभवो रामो नाम जनै: श्रुत:।
नियतात्मा महावीर्यो द्युतिमान् धृतिमान् वशी।।
वाल्मीकि रामायण बाल. १-७-८
मुने! आपने जिन दुर्लभ गुणों का वर्णन किया है, उनसे युक्त पुरुष को मैं विचार करके कहता हूँ आप सुने। इक्ष्वाकु के वंश में उत्पन्न हुए एक ऐसे पुरुष हैं, जो लोगों में राम नाम से विख्यात हैं वे ही मन् को वश में रखने वाले, महाबलवान् कान्तिमान, धैर्यवान् और जितेन्द्रिय हैं। वे बुद्धिमान नीतिज्ञ, वक्ता, शोभायमान तथा शत्रुसंहारक है।
इस प्रकार वे धर्म के ज्ञाता, सत्यप्रतिज्ञ तथा प्रजा के हित साधन में लगे रहने वाले हैं। वे यशस्वी इतनी पवित्र, जितेन्द्रिय और मन को एकाग्र रखने वाले हैं।
सर्वदाभिगत: सद्भि: समुद्र इव सिन्धुभि:।
आर्य: सर्वसमश्चैव सदैव प्रियदर्शन:।।
वाल्मीकि रामायण बाल १-१६
जैसे नदियाँ मिलती हैं, उसी प्रकार सदा श्रीराम से साधु पुरुष मिलते रहते हैं। वे आर्य एवं सबमें समान भाव रखने वाले हैं, उनका दर्शन सदा ही प्रिय मालुम होता है।
इस प्रकार श्रीराम में अनेक गुण हैं अत: आज भी हर परिवार कहता है कि बेटा (पुत्र) हो तो राम जैसा। जिन परिवारों में रामायण के आदर्शों का अनुसरण एवं आचरण होता है वहाँ सुख, समृद्धि और शान्ति की स्थापना हो जाती है, जिन परिवारों में रामायण के आदर्श नहीं होते हैं, वहाँ महाभारत हो जाता है अर्थात् परस्पर युद्ध और विनाश हो जाता है। श्रीराम का अर्थ है प्रेम और त्याग का जीवन। आज हमें परिवार में श्रीराम की नितान्त आवश्यकता है तभी परिवार सुखी समृद्ध और शान्तिपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकेगा।
अन्त में श्रीराम के गुण एवं चरित्र के बारे में श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदासजी ने जो वर्णन किया है वह हमें सदैव याद रखना चाहिए।
कहाँ कहाँ लगि नाम बड़ाई।
रामु न सकहि नाम गुन गाई।।
श्रीरामचरितमानस बाल. २६-४
संदर्भ ग्रन्थ : १. श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदासजी गीता प्रेस गोरखपुर
२. श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण। गीता प्रेस गोरखपुर।
३. रामकथामृत- शिवानन्द सर्वसेवा संघ- प्रकाशन राजघाट, वाराणसी- २२१ ००१
विचारों की तरंगें
राजा की सवारी निकल रही थी। सर्वत्र जय-जयकार हो रही थी। सवारी बाजार के मध्य से गुजर रही थी। राजा की दृष्टि एक व्यापारी पर पड़ी। वह चन्दन का व्यापार करता था। राजा ने व्यापारी को देखा। मन में घृणा और ग्लानि उभर आई। उसने मन ही मन सोचा, 'यह व्यापारी बुरा है। इसे मृत्युदंड दे देना चाहिए।'
नगर-परिभ्रमण कर राजा महल में पहुंचा। मंत्री को बुलाकर कहा, 'मंत्रीवर! न जाने क्यों उस व्यापारी को देखकर मेरा मन उद्विग्न हो गया और मन में आया कि उसको मार डाला जाए।' मंत्री ने कहा, 'राजन्! मैं सारी व्यवस्था करता हूं।' मंत्री व्यापारी के पास गया। औपचारिक बातें हुई। व्यापारी ने कहा, 'मंत्रीजी! चन्दन का भाव प्रतिदिन कम होता जा रहा है। मेरे पास चन्दन का बहुत संग्रह है। लाखों रूपयों का घाटा हो रहा है। मन चिन्ता से भरा है। राजा के सिवाय चन्दन को कौन खरीदे? राजा भी क्यों खरीदेगा? यह तो मरणवेला में प्रचुर मात्रा में काम आती है। मैं घाटे से दबा जा रहा हूं।
सच कहूं, आज जब राजा की सवारी निकल रही थी, तब राजा को देखकर मेरे मन में आया कि यदि आज राजा की मृत्यु हो जाए तो मेरा सारा चन्दन बिक जाए, अच्छे मूल्य में बिक जाए।'
मंत्री ने सुना। राजा के उदास होने और व्यापारी को मृत्युदंड देने की भावना के जागने का रहस्य समझ में आ गया। विचार संप्रमणशील होते हैं। वे बिना कहे दूसरे तक पहुंच जाते हैं। विचारों की रश्मियां होती हैं और तरंगें पूरे आकाशमण्डल में फैल जाती हैं और सम्बन्घित व्यक्ति के मस्तिष्क से टकराकर उसे प्रभावित करती हैं।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (09 नवंबर 2022)
मेष राशि :- प्रयास से लाभ, मांगलिक कार्यों में बाधा, व्यय, घर में सुख व कलह के योग बनेगे।
वृष राशि – शरीर कष्ट, व्यापार आदि से लाभ, पत्नी सुख तथा मानसिक टेंशन बना ली।
मिथुन राशि – विरोधियों से सतर्क होकर कार्य करें, व्यवसाय मध्य अचानक कार्य होवे।
कर्क राशि – प्रयास के योग बनेंगे, किसी उत्सव में सम्मिलित होना पड़े, ट्रांसफर के योग होवे।
सिंह राशि – मित्रों से लाभ, किन्तु मन अशांत बना रहे, बीमार होने से समस्या बने।
कन्या राशि – वाद-विवाद से दूर रहे, व्यर्थ भय, कष्ट होवे, पड़ोसी से वाद विवाद।
तुला राशि :- प्रतिष्ठा बढ़ेगी, मांगलिक कार्यों मे सम्मिलित होंगे तथा रुके कार्य अवश्य होवे।
वृश्चिक राशि – कुटुम्ब जिम्मेदारियों का निर्वाह होवे, मित्रों के सानिध्य में लाभ अवश्य होवे।
धनु राशि – विरोध, कष्ट, भय का वातावरण, दूषित न करें, विवाद से बचें।
मकर राशि – आय, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, खानपान में ध्यान रखे, अन्यथा रोग का कष्ट होगा।
कुंभ राशि – किसी विशेष उत्सव में सम्मिलित होंगे, व्यय विवाद, राज्य शासन से लाभ।
मीन राशि – प्रगति में बाधा असमंजस की स्थिति होने से कार्य, व्यवसाय में लाभ मिले।
नोटबंदी की आज 6वीं बरसी : ‘गायब’ होते 2000 के नोट, ना ATM में, ना बैंक में
नोटबंदी की आज 6वीं बरसी : आज से 6 साल पहले यानी 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के 15.52 लाख करोड़ रुपए अर्थव्यवस्था से बाहर हुए। फिर एंट्री हुई 500 रुपए के नए और 2000 रुपए के बड़े नोट की। इनमें से 500 वाले नोट तो मार्केट में हैं, लेकिन 2000 वाले गायब हो गए। देश में साल 2017-18 के दौरान 2000 के नोट सबसे ज्यादा चलन में रहे। तब बाजार में 2000 के 33,630 लाख नोट थे, जिनकी संख्या साल दर साल कम होती गई। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या में 9,120 लाख यानी 27% की कमी आई है। इस तरह बाजार से 1.82 लाख रुपये के 2000 के नोट चलन से बाहर हो गए हैं। सवाल उठता है कि ये नोट आखिर गए कहां ?
नोटबंदी के बाद बड़ी संख्या में जारी किए गए 2000 के नोट अब उतने चलन में नहीं दिख रहे। आपने भी ध्यान दिया होगा कि 2000 के नोट अब न तो लेनदेन में उतने प्रयोग होते दिख रहे हैं, न एटीएम से निकासी के दौरान ये पहले जितनी संख्या में मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 2000 के नोट आखिर ‘गायब’ कहां हो गए ?
वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में ये जानकारी दी थी कि पिछले दो साल से 2000 रुपये के एक भी नोट की छपाई नहीं हुई है दरअसल सरकार (Modi Government) RBI के साथ बातचीत करने के बाद नोटों की छपाई को लेकर निर्णय करती है। अप्रैल 2019 के बाद से केंन्द्रीय बैंक ने 2000 का एक भी नोट नहीं छापा है। उसकी वार्षिक रिपोर्ट (RBI annual report) में भी इस बात का जिक्र है। तो कहां गए ये नोट?
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ इस बात की प्रबल संभावना जता रहे हैं कि इन नोटों की कीमत अधिक होने के कारण काले धन के रूप में जमा किया गया हो। नोटबंदी के समय भी काले धन का अनुमान लगभग 4-5 लाख करोड़ रुपये था, जो विशेषज्ञों का मानना था कि यह सिस्टम में वापस नहीं आएगा।
आपको बताते हैं कि इन नोटों को छापने में कितना खर्चा आता है।
5 रुपए के नोट को छापने में लगभग .48 पैसे का खर्च आता है।
10 रुपए के नोट को छापने में लगभग .96 पैसे का खर्च आता है।
20 रुपए के नोट को छापने में लगभग 1.50 रुपए का खर्च आता है।
50 रुपए के नोट को छापने में लगभग 1.81 रुपए का खर्च आता है।
100 रुपए के नोट को छापने में लगभग 1.79 रुपए का खर्च आता है।
200 रुपए के नोट को छापने में लगभग 2.15 रुपए का खर्च आता है।
500 रुपए के पुराने नोट को छापने में लगभग 2.50 रुपए का खर्च आता है।
500 रुपए के नए नोट को छापने में लगभग 3.09 रुपए का खर्च आता है।
1000 रुपए के पुराने नोट को छापने में लगभग 3.17 रुपए का खर्च आता है।
2000 रुपए के नोट को छापने में लगभग 3.54 रुपए का खर्च आता है। दो बाइकों की भिड़ंत होने के बाद लगी आग, एक युवक जला, तीन गंभीर
बालाघाट । लांजी से भिलाई छत्तीसगढ़ मुख्य मार्ग पर मंगलवार करीब शाम सवा पांच बजे ग्राम कालीमाटी के सरकारी स्कूल समीप दो बाइकों की भिड़ंत गई।हादसे में एक बाइक जलने से उसमें सवार एक युवक की जिंदा जलने से मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के संबंध में बताया गया है कि लांजी निवासी शिवा पिता संतोष बागड़े 22 वर्ष ग्राम बरेजपट्टी लांजी निवासी अपने रिश्तेदार धुरपता बाई व राजेश्वर घोरमारे को ग्राम गोर्रे छोड़ने जा रहा था।इसी दौरान कालीमाटी के पास पहुंचा था।इस दौरान दूसरी ओर से बहेला निवासी अमान खान 47 वर्ष अपनी बाइक में लांजी से किराना सामान लेकर बहेला की ओर जा रहे थे।तभी शिवा बागड़े और अमान खान दोनों की बाइक में भिड़ंत हो गई।हादसे में अमान खान की बाइक आग के हवाले हो गई।इसके चलते बाइक में सवार अमान के शरीर में आग लगने से देखते ही देखते घटनास्थल जिंदा जलने से मौके पर मौत हो गई।जबकि तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
पेट्रोल लेकर जा रहा था गांव अमान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटनास्थल अमान खान ग्राम बहेला में किराना दुकान चलाता है।दुकान में पेट्रोल भी बेचते रहता था।लांजी तहसील मुख्यालय से किराना सामान के अलावा एक डबकी में पेट्रोल लेकर जा रहे थे।दोनों बाइकों की आमने सामने टक्कर होने से पेट्रोल की डबकी फूटने से बाइक में आग लगी और जिसकी चपेट में अमान खान आ गया।घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद कर लिया है।वहीं शिवा पिता संतोष बागड़े 28 वर्ष ग्राम मड़ई टेकरी लांजी को जिला अस्पताल रेफर किया गया है और राजेश्वर पिता भूरू घोरमारे 60 वर्ष और धुरपता पति राजेश्वर घोरमारे ग्राम गोर्रे निवासी का सिविल अस्पताल लांजी में उपचार जारी है।
इनका कहना
दो बाइकों की आमने सामने भिड़ंत होने के कारण एक बाइक चालक जिसकी बाइक में पेट्रोल से भरी प्लास्टिक से भरी डिबकी थी वह जिंदा जल गया।घटना में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जिसमें एक को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
दिनेश सोलंकी, थाना प्रभारी, पुलिस थाना लांजी।
टोल नाके के कर्मचारियों ने विधायक उमाकांत शर्मा से की अभद्रता, डेढ़ घंटे तक हुआ हंगामा
विदिशा । ब्यावरा-सिरोंज राष्ट्रीय राजमार्ग 752 बी पर स्थित टोल नाके पर सोमवार की रात टोल कर्मियों ने सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा के साथ अभद्रता की। जिसके चलते करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा होता रहा। स्थानीय अधिकारियों के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ। सिरोंज विधायक शर्मा रात करीब नौ बजे भोपाल से मकसूदनगढ़ होते हुए लटेरी में युवा मोर्चा कार्यकर्ता शिवायु भार्गव के घर रसोई में शामिल होने के लिए जा रहे थे। विधायक शर्मा ने बताया कि लटेरी के पहले नेशनल हाइवे 752 बी पर स्थित टोल नाके पर उनका वाहन रोक दिया गया। जब उनके गनमैन ने विधायक कार्ड दिखाया तो टोल कर्मचारियों ने इसे मानने से इंकार कर दिया। कर्मचारी उनसे अभद्र व्यवहार करने लगे। इसके बाद उन्होंने टोल नाके के मैनेजर को बुलाने की बात कही तो एक व्यक्ति चड्डी – बनियान पहने सामने आया। उसका कहना था कि वह अभी ड्यूटी पर नहीं है, इसलिए उनकी कोई मदद नहीं कर सकता। विधायक के मुताबिक उन्होंने रसीद कटवाने की बात कही, इसके बावजूद नाके का बैरियर नहीं खोला। शर्मा के मुताबिक उन्होंने मैनेजर के हाथ पांव जोड़े, इसके बावजूद टोल कर्मचारी उनकी बात को अनसुना करते रहे। इसके विरोध में वे टोल नाके के समीप ही सड़क पर जाकर बैठ गए। इस दौरान सड़क से गुजर रहे लोग और आसपास के कार्यकर्ता भी पहुंच गए। शर्मा के मुताबिक उन्होंने मौके से ही लटेरी पुलिस थाने के टीआइ, एसडीएम, आरटीओ, कलेक्टर, एसपी और आईजी को फोन लगाकर टोल नाके पर उनके साथ किए गए अभद्र व्यवहार की शिकायत की। कुछ देर बाद लटेरी टीआइ काशीराम कुशवाह और तहसीलदार अजय शर्मा मौके पर पहुंचे। जब दोनों अधिकारियों ने टोल नाका मैनेजर से बात की तो वह अधिकारियों के सामने खुद को आन ड्यूटी बताने लगा। इसके बाद उन्होंने टोल नाके की रसीद और वे करीब डेढ़ घंटे बाद लटेरी के लिए रवाना हुए। इधर, टीआइ कुशवाह का कहना था कि विधायक ने कोई लिखित शिकायत नही दी है, इसलिए किसी के खिलाफ कोई प्रकरण नहीं दर्ज किया गया है।
किससे करें शिकायत, अधिकारी नहीं बता पाए
विधायक शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस टोल नाके पर कर्मचारियों की पहले भी शिकायतें मिलती रही है। नाके के कर्मचारी आसपास के गांवों के लोगों से भी जबरन टोल टैक्स की वसूली करते है। घटना के बाद उन्होंने जिले के अधिकारियों से जानना चाहा कि इन नाकों की निगरानी का जिम्मा किस विभाग के पास है। वे किस अधिकारी से टोल कर्मियों की शिकायत कर सकते है लेकिन जिले के अधिकारी न तो निगरानी का जिम्मा संभालने वाले विभाग का नाम बता पाए और न ही अधिकारी का नाम बता पाए।
खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी के सामान्य कोच में भीड़ से दम घुटने से महिला की मौत
छतररपुर । खजुराह से झांसी आ रही इंटरसिटी एक्सप्रेस के सामान्य कोच में यात्रा कर रही 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की भीड़ के चलते दम घुटने से मौत हो गई। वह पति, देवर के साथ झांसी जा रही थी। महिला में कोई हलचल नहीं होने से शव हरपालपुर स्टेशन उतारा गया। स्टेशन प्रबंधक द्वारा इस सूचना जीआरपी सहित थाना हरपालपुर को दी गई। इस दौरान शव प्लेटफार्म पर चार घंटे से अधिक समय तक पड़ा रहा और परिजन रोते बिलखते रहे। पोस्टमार्टम के लिए एंबुलेंस से शव नौगांव भिजवाने का इंतजाम किया गया। 70 वर्षीय बुजुर्ग बेनीबाई पाल पुत्र हरदयाल ग्राम दादरी थाना महोबकंठ जिला महोबा उत्तर प्रदेश अपने पति हरदयाल पाल, देवर मनमोहन के साथ कुलपहाड़ स्टेशन से झांसी रिश्तेदारी में जाने के लिए उदयपुर इंटरसिटी ट्रेन के सामान्य कोच में सवार हुईं थीं। भीड़ के चलते घुटाई स्टेशन के पास महिला की तबीयत बिगड़ी और सांसें थम गईं। स्वजन ने शव को हरपालपुर स्टेशन पर उतारकर इसकी सूचना जीआरपी सहित स्टेशन प्रबंधक को दी। साथ ही सूचना थाना हरपालपुर पुलिस को दी गई। थाना पुलिस ने जीआरपी का मामला बताकर कुछ करने से इंकार कर दिया चार घंटे बाद पुलिस और प्रशासन ने एंबुलेंस से शव को पीएम के लिए नौगांव अस्पताल के डेड हाउस भिजवाया है।
शादी के लिए हिंदू युवती पर डाल रहा था दबाव, मुस्लिम युवक पर केस दर्ज
खंडवा । शादी करने के लिए दबाव बनाकर युवती को परेशान करने वाले मुस्लिम युवक पर पदमनगर पुलिस ने कार्रवाई की। आरोपित युवक पिछले कुछ महीनों से पीछा कर युवती को परेशान कर रहा था। घटना के विरोध में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पदमनगर थाने का घेराव कर आरोपित युवक पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने आरोपित युवक पर प्रकरण दर्ज किया है। वहीं इस कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज के युवकों ने थाने पहुंचकर हंगामा किया। इसके चलते काफी देर तक थाने में गहमा-गहमी का माहौल बना रहा। दुबे कालोनी निवासी 18 वर्षीय युवती मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे पदमनगर थाने पहुंची। उसके साथ पिता, बुआ और हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी व कार्यकर्ता थे। पीड़िता ने थाना प्रभारी केडी तिवारी और महिला पुलिसकर्मी को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार पीड़िता ने बताया- चार दिन पहले चार नवंबर को सुबह करीब 10 बजे घर से मजदूरी करने के लिए जा रही थी। तभी मुंशी चौराहे पर मोहल्ले में रहने वाले सलमान पुत्र करीम शाह ने मुझे देखकर गंदे कमेंट किए और पीछा किया। आरोपित के डर की वजह से उसने घर पर किसी को नहीं बताया। इसके बाद भी सलमान की हरकतें कम नहीं हुई। सलमान पीड़िता का आए दिन पीछा करने लगा। मंगलवार को सुबह करीब 10 बजे घर से काम करने जा रही थी। तभी मुंशी चौराहे पर सलामन बैठा हुआ था। वह मेरे पास आया और हाथ पकड़ लिया। उसने कहा कि मुझसे शादी कर ले या मेरे साथ भाग चल। अगर ऐसा नहीं किया तो मैं तुझे व तेरे स्वजन को जान से खत्म कर दूंगा। सलमान से हाथ छुड़ाकर वह भागते हुए घर आ गई। पिता और बुआ को अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उनके साथ पदमनगर थाने पहुंची। थाने में पीड़िता के साथ आए हिंदू जागरण मंच और बजरंग सेना के कायकर्ताओं ने विरोध किया। हिंदू जागरण मंच के डाक्टर अनीष अरझरे, माधव झा, आशीष मित्तल, मोनू गौर और हर्षराज बाथम सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने आरोपित पर कार्रवाई करने की मांग की। हिंदू जागरण मंच के माधव झा ने बताया कि युवती के साथ आरोपित सलमान ने छेड़छाड़ की है। आरोपित की वजह से चौराहे से लड़कियों ने निकलना बंद कर दिया है। ऐसे आरोपित पर प्रकरण दर्ज उनके मकान पर बुलडोजर चलाया जाए।
कार्रवाई के विरोध में थाने में लगी भीड़
सलमान पर प्रकरण दर्ज करने की बात पता चलते ही पदमगनर थाने में दुबे कालोनी के रहवासी पहुंच गए। उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा किया। साथ ही थाने के अंदर जाने का प्रयास करते रहे। उन्हें पुलिसकर्मियों ने थाने के बाहर किया। करीब एक घंटे तक थाने के बाहर भीड़ लगी रही। पुलिसकर्मियों ने बेवजह भीड़ लगाने वालों को थाना परिसर से निकाला। थाने से हटने के बाद झीलोद्यान के पास भीड़ लग गई थी। यहां खड़े लोगों को हटाते हुए घर की तरफ रवाना किया।
इनका कहना है
सलमान पर धारा 354 और अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम की धारा में प्रकरण दर्ज किया गया। आरोपित सलमान की तलाश की जा रही है।
-केडी तिवारी, पदमनगर थाना प्रभारी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुम्बई में उद्योगपतियों को देंगे इंवेस्टर्स समिट का न्योता
भोपाल । राज्य सरकार ने इंदौर में जनवरी 2023 में होने वाली इंवेस्टर्स समिट की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मुम्बई में उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ 10 नवंबर को बैठक करेंगे और उन्हें इंवेस्टर्स समिट में आने के लिए आमंत्रित भी करेंगे। मुख्यमंत्री मुम्बई में महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के एमडी तथा सीईओ डा. अनीश शाह, हिन्दुस्तान यूनिलिवर के सीईओ संजीव मेहता, रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनंत अंबानी, धनराज नाथवानी, सिएट टायर्स के एमडी अनंत गोयनका, यूएस फार्मा के सीएमडी तपन संघवी, केमेरिक्स लाईफ साइंसेज के डायरेक्टर एके मिश्रा, एनक्यूब ऐथिकल फार्मा के एमडी मेहुल शाह, ग्यूफिक बायोसाइंसेज के सीएमडी जयश चौकसी और पीरामल ग्रुप के वाइस चेयरपर्सन डा. स्वाति पीरामल से भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान इंफोबींस लिमिटेड के उद्घाटन कार्यक्रम और मध्य प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर आयोजित सत्र में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपने निवास कार्यालय में मुम्बई में उद्योगपतियों से 10 नवंबर को मुलाकात एवं रोड-शो के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा है कि उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए होने वाली इंवेस्टर्स समिट परिणाममूलक हो, इस उद्देश्य से प्रदेश की आवश्यकताओं, निवेश के अवसरों और संभावनाओं की निवेशकों और उद्योगपतियों को विस्तार से जानकारी दी जाए। प्रदेश में कृषि उपकरणों के निर्माण और फार्मा तथा मेडिकल उपकरणों के निर्माण से संबंधित उद्योगों की संभावनाओं से इस क्षेत्र में कार्यरत उद्योगपतियों को विशेष रूप से अवगत कराया जाए। इस दौरान प्रमुख सचिव संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव मनीष सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
फार्मा- मेडिकल उपकरणों की निर्माण इकाई स्थापित करने होगी चर्चा
मुख्यमंत्री चौहान फार्मा और मेडिकल उपकरणों के निर्माण से संबंधित इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर इस क्षेत्र में कार्यरत उद्योगपतियों से विशेष रूप से चर्चा करेंगे। इसके अंतर्गत गोदरेज, एलेम्बिक फार्मा, आदित्य बिरला ग्रुप, हीरानंदानी ग्रुप, सन फार्मास्युटिकल्स, टाटा संस, प्रोक्टर एंड गेंबल इंडिया, लार्सेन एंड ट्यूबरो, परस्सिटेंट सिस्टम्स और पंचशील रियल्टी रिजर्व के प्रमुखों और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे।















