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आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ का सह निर्माता गिरफ्तार

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ओटीटी डिग्नी प्लस हॉटस्टार पर फिल्म को मंजूरी दिलाने के नाम पर निर्माता मान सिंह को लाखों का चुना लगाने वाले रजत मौर्य और संजय सहा की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े एक और शख्स अक्षत राज सलूजा को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है। फिल्म 'राष्ट्रकवत ओम द बैटल विदइन', वेबसीरीज 'शिक्षा मंडल' और 'यारगी'  के पटकथा लेखक और आयुष्मान खुराना अभिनीति फिल्म 'ड्रीम गर्ल' के एसोसिएट प्रोड्यूसर अक्षत राज सलूजा इस मामले में गिरफ्तार होने वाले तीसरे आरोपी हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस अब भी राधिका नंदा व अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।

 

Manish Malhotra की पार्टी में Shahrukh Khan की बेटी सुहाना ने ली यूं एंट्री, लुक देख दिल हार बैठे फैंस…

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दिवाली का जश्न पूरे देश के साथ बॉलीवुड में भी शुरू हो चुका है। रमेश तौरानी के बाद अब मनीष मल्होत्रा की पार्टी सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर ग्लैम और ग्लिट्स से भरी तस्वीरें छाई हुई हैं। इस पार्टी में सभी ट्रडिशनल आउटफिट्स में थे। शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान साड़ी पहनकर पहुंची थीं। उन्हें देखकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कमेंट्स किए जा रहे हैं। कुछ लोगों को उनकी झलक दीपिका पादुकोण जैसी लग रही है। वहीं कई लोग उन्हें शाहरुख की कॉपी बता रहे हैं। सुहाना के अलावा उनकी बेस्ट फ्रेंड्स नव्या नवेली नंदा और अनन्या पांडे ने भी पार्टी में ग्लैमर का तड़का लगाया।

मनीष मल्होत्रा की दिवाली पार्टी में साड़ियां हाइलाइट रहीं। शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान भी इस पार्टी में गोल्डन सीकुइन्ड साड़ी पहनी थी। बाल बांधकर बन बनाया था। पैप्स के इंस्टा पर सुहाना के वीडियोज हैं। इन पर कई कमेंट्स आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, नेक्स्ट दीपिका पादुकोण। एक और ने लिखा है, एक सेकंड को मुझे लगा कि दीपिका पादुकोण है। कुछ लोगों ने लिखा कि वह फीमेल शाहरुख खान लग रही है। वहीं कुछ लोगों ने बचाव करते हुए लिखा है कि शाहरुख की बेटी है तो वैसी ही लगेगी।

Sunny Leone पर चढ़ा Abdu Rozik का खुमार, सामने आया ये मजेदार वीडियो….

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बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार Sunny Leone अपने डांस और मासूमियत के साथ बिंदास अंदाज के लिए काफी जानी जाती हैं। उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग छवि बनाई हैं। वहीं सनी कई मौको पर मजाकिया अंदाज में लोगों को गुदगुदाती नजर आई है। इसी क्रम में एक्ट्रेस का एक और वीडियो सामने आया है।

जिसमें वह Bigg Boss 16 कंटेस्टेंट और तजाकिस्तान के सिंगर अब्दू रोजिक Abdu Rozik को कॉपी करती हुई नजर आ रही है। इस वीडियो में जिस तरह से Sunny Leone अब्दू रोजिक की मिमिक्री कर रही है, उसे देखकर यकीनन आप सनी लियोनी के फैन हो जाएंगे। दरअसल हाल ही में Sunny Leone ने अपने इंस्टाग्राम अंकाउट से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में देख सकते है कि सनी पर्पल ड्रेस में एक कुर्सी पर बैठी हुई हैं। खास बात यह है कि उनके हाथों में एक बर्गर है और सनी Abdu Rozik के स्टाइल में बर्गर को प्रोनाउंस करती हैं। उनकी इस वीडियो को देख कर आप की हंसी भी छूट पड़ेगी।

अब्दू ने अपने स्टाइल में बोला था ‘बर्गर’
गौरतलब है कि अब्दू तजाकिस्तान से है, इसी वजह से उनके बोलने का स्टाइल दूसरों से काफी अलग है। बता दें कि सिद्धार्थ मल्होत्रा सलमान खान के शो Bigg Boss 16 में अपनी फिल्म थैंक गॉड के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरन सिद्धार्थ ने Abdu Rozik से कहा था कि टास्क पूरा करने पर उन्हें बर्गर मिलेगा।

इसी दौरान जिस स्टाइल से अब्दू ने बर्गर बोला था वह लोगों को बीच काफी पसंद किया गया था।अब्दू का यह स्टाइल Sunny Leone को इतना पसंद आ गया है कि उन्होंने भी वीडियो बना ली। इतना ही नहीं बल्कि Abdu Rozik की तरह ही सनी भी बाहर देश से ही आई थी और उन्हें भी उस समय हिंदी नहीं आती थी। यहीं वजह है कि सनी छोटे अब्दु को इतना पसंद करती है।

दो पक्षों के बीच विवाद रोकना पड़ा आरक्षक को महंगा

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दमोह में दो पक्षों के बीच हो रहे विवाद को सुलझाने पहुंचे आरक्षक पर अज्ञात आरोपियों ने चाकू से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। घायल आरक्षक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।दमोह के पुलिस लाइन में पदस्थ एक आरक्षक को दो पक्षों के बीच विवाद सुलझाना महंगा पड़ गया। जिन लोगों के बीच विवाद हो रहा था उन्होंने आरक्षक पर ही चाकू से हमला कर दिया और मौके से भाग गए। घायल आरक्षक को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया।

पुलिस लाइन में रहने वाले आरक्षक प्रशांत पिता गोकुल साहू 38 वर्ष ने बताया की वह गुरुवार रात लाइन से आ रहा था। जबलपुर नाका चौकी अंतर्गत बिजली ऑफिस के पास दो लोग आपस में झगड़ रहे थे। इसलिए वह बीच बचाव करने रुक गए लेकिन अज्ञात आरोपियों ने उन पर ही चाकू से हमला कर दिया और मौके से भाग गए। सूचना मिलते ही जबलपुर नाका चौकी प्रभारी रामअवतार पांडे, प्रधान आरक्षक तुलसीराम पटेल घायल आरक्षक को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए और अज्ञात आरोपियों पर मामला दर्ज किया। घायल आरक्षक सिविल ड्रेस में था उसने वर्दी नहीं पहनी थी।

मुरैना में मकान में विस्फोट मामले में थाना प्रभारी समेत चार निलंबित

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भोपाल | मध्य प्रदेश के मुरैना में बारूद के अवैध संग्रहण से मकान में हुए विस्फोट से चार लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 6 लोग घायल हुए है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को इंदौर में मीडिया से बातचीत में कहा कि राकेश गुर्जर का मकान था। जिसे जमील खान को किराए पर दिया था। उस मकान पर अवैध रूप से स्टोर कर बारूद रखा था। जिसमें गुरुवार को विस्फोट हो गया। इसमें जमीन खान की पत्नी, बेटी और गोलू प्रजापति और पप्पू गुर्जर की मौत हुई है। इस घटना में पड़ोस का मकान भी गिर गया। जिसमें छह लोग घायल हुए है। इस मामले में एफआईआर हो गई है। जमीन खान को हिरासत में लिया है। उन्होंने जहां से बारुद ली थी, उन जगहों पर भी पुलिस गई है। इस मामले में बीट के थाना प्रभारी, हेड कांस्टेबल, आरक्षक समेत चार लोगों को निलंबित किया है। इस जांच में टीआई और एसडीओपी को भी लिया गया है। साथ ही पूरे प्रदेश में इस तरह के बारूद के अवैध संग्रहण को लेकर पुलिस का अलर्ट किया हुआ है।

सीएम शिवराज मध्य प्रदेश में इंडस्ट्री एवं इन्वेस्टमेंट को लेकर उद्योगपति से करेंगे मुलाकात

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भोपाल | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को पुणे के दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री पुणे में "इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी इन मध्यप्रदेश" कार्यक्रम में शामिल होंगे। सीएम मध्यप्रदेश में इंडस्ट्री एवं इन्वेस्टमेंट को लेकर उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे। साथ ही इंदौर में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित करेंगे। कार्यक्रम में मंत्री राजवर्धन सिंह दात्तीगांव भी उपस्थित रहेंगे।

सीएम कार्यक्रम के दौरान उद्योगपतियों के साथ वन टू वन मीटिंग करेंगे। इसमें कन्सूल जनरल ऑफ इइजराइल के कोबी शोनी, भारत फोर्ज लिमिटेड के बाबा कल्याणी, किर्लोस्कर ब्रदर लिमिटेड के संजय किर्लोस्कर, वीकफील्डस फूड्स प्रा. लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अश्विनी मल्होत्रा, पियोजिया व्हीकल्स इंडिया प्रा. लिमिटेड के डिएगो ग्रेफी, केपीआईटी टेक्नोलॉजी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवि पंडित, जेडएफ स्टीयरिंग गियर्स के उत्कर्ष मोनोतो, प्रवीण मसाला के विशाल चोरडिया, राठी ग्रुप के आदित राठी, मालपानी ग्रुप के आशीष मालपानी शामिल है।

सुनिए रमा एकादशी व्रत कथा, दूर होगी आर्थिक परेशानी

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इस साल कार्तिक कृष्ण एकादशी यानी रमा एकादशी 21 अक्तूबर को पड़ रही है, जिसका पारण द्वादशी यानी 22 अक्तूबर को होगा. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु यानी रमापति के साथ उनकी अर्धांगिनी रमा की भी पूजा होती है.

इस एकादशी का नाम रमा एकादशी माता लक्ष्मी के नाम पर ही पड़ा है. कहते हैं कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एक साथ पूजा करनी चाहिए, इससे भक्त पर माता लक्ष्मी की ऐसी कृपा होती है कि उसके जीवन में आर्थिक संकट नहीं आता. साथ ही पूजा के दौरान रमा एकादशी व्रत कथा सुननी चाहिए. इस व्रत कथा के सुनने से सभी पापों का नाश हो जाता है और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है.

रमा एकादशी व्रत कथाः
पुराने जमाने की बात है, एक नगर में मुचकुंद नाम के राजा थे, राजा मुचकुंद ने अपनी बेटी चंद्रभागा की शादी एक दूसरे नगर के राजा चंद्रसेन के बेटे शोभन के साथ कर दी. शोभन शारीरिक रूप से दुर्बल था और बिना अन्न के एक वक्त भी रह नहीं सकता था. कार्तिक में दोनों राजा मुचकुंद के यहां पहुंचे थे. इसी समय रमा एकादशी पड़ गई, उस वक्त माना जाता था राज्य के नर नारी तो रमा एकादशी व्रत रहते ही थे. पशु पक्षी भी यह व्रत करते थे. इसलिए उसने अपने पति शोभन को दूसरे नगर में जाकर भोजन करने की सलाह दी.

लेकिन शोभन ने चंद्रभागा की सलाह नहीं मानी और व्रत रहने की ठानी. इधर, उपवास करने से सुबह तक शोभन के प्राण पखेरू उड़ गए. पति की मृत्यु के बाद चंद्रभागा ससुराल नहीं गई और पिता के यहां ही रहकर पूजा पाठ और व्रत के सहारे जीवन बिताने लगी. उधर, एकादशी व्रत के प्रभाव से शोभन का अगला जन्म हुआ और देवपुरी नगर का राज्य मिला. यह राज्य धन धान्य से भरा था. एक दिन मुचकुंद के राज्य का ब्राह्मण सोम शर्मा उधर से गुजरा तो उसने शोभन को पहचान लिया. ब्राह्मण ने उससे ऐश्वर्य मिलने का रहस्य पूछा तो उसने रमा एकादशी के फल का जिक्र किया. साथ ही शोभन ब्राह्मण से इस ऐश्वर्य को स्थिर करने का मार्ग पूछता है. ब्राह्मण यहां से लौटकर सारा किस्सा चंद्रभागा को बताता है.

यह होता है व्रत का प्रभावः इस पर चंद्रभागा ने बताया कि वह आठ वर्षों से रमा एकादशी व्रत कर रही है. इसके प्रभाव से उसके पति को पुण्य मिलेगा. इसके बाद वह शोभन के पास चली जाती है और एकादशी व्रत का पुण्य फल शोभन को सौंप देती है. इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा से देवपुर का ऐश्वर्य स्थिर हो जाता है और दोनों खुशी-खुशी जीवन बिताने लगते हैं.

कब है धनतेरस? जानें पूजा मुहूर्त, खरीदारी का शुभ समय और सोना खरीदने का महत्व

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भारत की सभ्यता काफी समृद्ध है और यहां के बाशिंदे उत्सवधर्मी. फसल बुआई कटाई से लेकर जन्म और छोटी से छोटी घटना को सेलिब्रेट करने की यहां की समृद्ध रवायत रही है.इसी के कारण भारतीय संस्कृति अनोखी है. वैसे तो साल भर यहां कोई न कोई व्रत पूजा, त्योहार चलती रहते हैं. लेकिन पंचांग के अनुसार कुआर और कार्तिक का महीना खास हो जाता है. भारतीयों का फेस्टिव सीजन शुरू हो जाता है. इसकी वजह है कि हिंदू धर्मावलंबियों के बड़े पर्व नवरात्रि में दुर्गा पूजा, दशहरा दिवाली आदि इन्हीं महीनों में पड़ते हैं. इसमें भी कार्तिक का महीना और विशेष है क्योंकि इस महीने में एक साथ ही कई त्योहार पड़ते हैं.

जान लें फेस्टिव सीजन में अभी कौन-कौन से त्योहार पड़ेंगे
त्योहार तारीख
धनतेरस 22 अक्टूबर
नरक चतुर्दशी 23 अक्टूबर
दिवाली 24 अक्टूबर
गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर
भाई दूज 27 अक्टूबर

क्यों मनाते हैं धनतेरस
हिंदू धर्मावलंबी हर कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाते हैं. इस दिन भगवान धन्वंतरि (जिन्हें कुछ विद्वान भगवान विष्णु का अवतार ही मानते हैं), माता लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की पूजा की जाती है. इस तिथि को हिंदू धर्मावलंभी भगवान धन्वंतरि के जन्मदिन के रूप में सेलिब्रेट करते हैं. अक्सर यह तिथि छोटी दिवाली से एक दिन पहले पड़ती है. धन तेरस पर इनकी पूजा के साथ घर में कोई नया सामान लाना शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन बाजार में तेजी रहती है. इस दिन खास तौर पर सोने चांदी के गहने और बर्तनों की खरीद होती है. लेकिन बाइक या अन्य सामानों की खरीदारी भी खूब होती है. यह भी कहा जाता है इस दिन घर लाई गई चल अचल संपत्ति में 13 गुना वृद्धि होती है.

धनतेरस 2022 और पूजा का शुभ मुहूर्तः पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी इस साल 22 अक्तूबर को पड़ रही है. लखनऊ के ज्योतिषाचार्य उमा शंकर मिश्र के अनुसार त्रयोदशी तिथि 22 अक्तूबर शाम छह बजकर 02 मिनट से शुरू हो रही है. जो 23 अक्तूबर शाम छह बजकर 03 मिनट पर संपन्न होगी.

धनतेरस 2022 पूजा मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा का मुहूर्त 22 अक्टूबर रविवार को शाम पांच बजकर 44 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट तक है.

धनतेरस 2022 खरीदारी का शुभ समय
शाम 07 बजकर 03 मिनट से रात 10 बजकर 39 मिनट तक.

धनतेरस पूजा विधिः जो शख्स पहली बार पूजा कर रहा है, उसे यह विधि अपनानी चाहिए. धनतेरस के दिन शाम को शुभ मुहूर्त में एक लकड़ी की चौकी पर उत्तर की ओर कुबेर और भगवान धन्वंतरि को बैठाएं मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या तस्वीर जो भी उपलब्ध हो, उसको भी वहीं आसन दें. फिर दीप जलाकर पूजा शुरू करें सभी का तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि अर्पित करें कुबेर को सफेद मिष्ठान्न और भगवान धन्वंतरि को पीले मिष्ठान्न अर्पित करें पूजा के दौरान बारी बारी से ऊं ह्रीं कुबेराय नमः मंत्र का जाप करते रहें भगवान धन्वंतरि की पूजा कर धन्वंतरि स्त्रोत का पाठ करें सभी देवी देवताओं की आरती करें और पूजा के दौरान हुई त्रुटि के लिए क्षमा मांगें

धनतेरस का महत्व
मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि ही कलश में अमृत लेकर प्रकट हुए थे. इसी से इस दिन को भगवान धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाते हैं और उनकी पूजा करते हैं. इसी दिन माता लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा की जाती है. इसके पीछे मान्यता है कि इन देवताओं की कृपा से घर में धन की कमी नहीं रहती है. इस दिन बर्तन, आभूषण और अन्य चीजें खरीदने की परंपरा है.

धनतेरस के दिन सोना खरीदने के पीछे कारण
त्रयोदशी में भारत में सोने की खरीद की पुरानी परंपरा है. क्योंकि इसे समृद्धि और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि इसमें माता लक्ष्मी का वास होता है. इसीलिए इस दिन माता लक्ष्मी के रूप में इसकी पूजा होती है.

धनतेरस पर स्वर्ण खरीदने का इतिहास
धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा की शुरुआत से जुड़ी एक कहानी है. इसके अनुसार प्राचीन काल में हिमा नाम का एक राजा था, उसने अपने 16 साल के पुत्र का विवाह कर दिया. इस बीच ज्योतिषियों ने बताया कि उसके पुत्र की विवाह के चौथे दिन सर्प दंश से मौत हो जाएगी, यह बात राजा ने बहू को भी बताई. इस भविष्यवाणी से दोनों चिंतित हुए लेकिन बहू बुद्धिमती थी, चौथे दिन उसने महल का सारा स्वर्ण मुख्य द्वार पर रखवा दिया और पति को सोने नहीं दिया और खुद भी जागकर गाने लगी.

इसी वक्त निर्धारित समय पर यमराज आए और सर्प का वेश धारण कर मुख्य द्वार पर पहुंचे तो सोने की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं, उन्हें महल के भीतर प्रवेश का रास्ता भी नहीं मिला. इस बीच दुल्हन के गीत सुनने में वे सबकुछ भुला बैठे और इस बीच राजकुमार की मृत्यु का समय बीत गया. इससे उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, तभी से लोग सौभाग्य के लिए इस दिन स्वर्ण की खरीदारी करने लगे.

पुत्रवती महिलाएं इस विधि से करें व्रत, पढ़ें कथा

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कार्तिक कृष्ण द्वादशी को गो वत्स द्वादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गो धूली बेला में गऊओं की पूजा की जाती है विशेष कर पुत्रवान महिलाएं सारा दिन निराहार रहती हैं।
संध्या के समय घर के आंगन को लीप कर चौक पूरती हैं। उसी चौक में गाय खड़ी करके चंदन अक्षत, धूप, दीप, नैवैद्य आदि से विधिवत पूजा की जाती है। इस व्रत के पूजन में धान या चावल वर्जनीय हैं। काकून के चावल से पूजा होती है और उसी से मंत्राक्षत दिया जाता है। इस दिन चने की दाल के भोजन का महत्व है। गेहूं और धान के अतिरिक्त गाय का दूध भी व्रत वालों को खाना वर्जित है।

यह व्रत कार्तिक, माघ व वैशाख और श्रावण महीनों की कृष्ण द्वादशी को होता है। कार्तिक में वत्स वंश की पूजा का विधान है। इस दिन के लिए मूंग, मोठ तथा बाजरा अंकुरित करके मध्यान्ह के समय बछड़े को सजाने का विशेष विधान है। व्रत करने वाले व्यक्ति को भी इस दिन उक्त अन्न ही खाने पड़ते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन पहली बार श्री कृष्ण वन में गऊएं-बछड़े चराने गए थे। माता यशोदा ने श्री कृष्ण का शृंगार करके गोचारण के लिए तैयार किया था।

पूजा-पाठ के बाद गोपाल ने बछड़े खोल दिए। यशोदा ने बलराम जी से कहा कि बछड़ों को चराने दूर मत जाना और कान्हा को अकेला मत छोड़ना, देखना यमुना के किनारे अकेला न जाए।

गोपालों द्वारा गोवत्संचारण की पुण्यतिथि को इसीलिए पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पुत्र की मंगल-कामना के लिए किया जाता है। इसे पुत्रवती स्त्रियां करती हैं। इस पर्व पर गीली मिट्टी की गाय, बछड़ा, बाघ तथा बाघिन की मूर्तियां बनाकर पाट पर रखी जाती हैं तब उनकी विधिवत पूजा की जाती है।

आज है गाय पूजन का पर्व, जानें महत्व

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कार्तिक कृष्ण द्वादशी को गोवत्स द्वादशी के नाम से जाना जाता है। आज के दिन गो धूली बेला में गऊओं की पूजा की जाती है। विशेष कर पुत्रवान महिलाएं सारा दिन निराहार रहती हैं। संध्या के समय घर के आंगन को लीप कर चौक पूरती हैं। उसी चौक में गाय खड़ी करके चंदन अक्षत, धूप, दीप, नैवैद्य आदि से विधिवत पूजा की जाती है। इस व्रत के पूजन में धान या चावल वर्जनीय हैं। काकून के चावल से पूजा होती है और उसी से मंत्राक्षत दिया जाता है। इस दिन चने की दाल के भोजन का महत्व है। गेहूं और धान के अतिरिक्त गाय का दूध भी व्रत वालों को खाना वर्जित है।
यह व्रत कार्तिक, माघ व वैशाख और श्रावण महीनों की कृष्ण द्वादशी को होता है। कार्तिक में वत्स वंश की पूजा का विधान है। इस दिन के लिए मूंग, मोठ तथा बाजरा अंकुरित करके मध्यान्ह के समय बछड़े को सजाने का विशेष विधान है। व्रत करने वाले व्यक्ति को भी इस दिन उक्त अन्न ही खाने पड़ते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन पहली बार श्री कृष्ण वन में गऊएं-बछड़े चराने गए थे। माता यशोदा ने श्री कृष्ण का शृंगार करके गोचारण के लिए तैयार किया था। पूजा-पाठ के बाद गोपाल ने बछड़े खोल दिए। यशोदा ने बलराम जी से कहा कि बछड़ों को चराने दूर मत जाना और कान्हा को अकेला मत छोड़ना, देखना यमुना के किनारे अकेला न जाए।

गोपालों द्वारा गोवत्संचारण की पुण्यतिथि को इसीलिए पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पुत्र की मंगल-कामना के लिए किया जाता है। इसे पुत्रवती स्त्रियां करती हैं। इस पर्व पर गीली मिट्टी की गाय, बछड़ा, बाघ तथा बाघिन की मूर्तियां बनाकर पाट पर रखी जाती हैं तब उनकी विधिवत पूजा की जाती है।

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